आईटीबीपी ने तोड़ा है अपनी सेना पर गुरूर करने वाले देशों का भ्रम

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2020 01:09 AM IST
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आइटीबीपी के स्थापना दिवस पर आयोजित परेड में सलामी देते जवान ।
आइटीबीपी के स्थापना दिवस पर आयोजित परेड में सलामी देते जवान । - फोटो : Grnoida

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आईटीबीपी ने तोड़ा है अपनी सेना पर गुरूर करने वाले देशों का भ्रम
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ग्रेटर नोएडा। कोविड-19 केे कारण भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का 59वां स्थापना दिवस सूरजपुर के पास स्थित शिविर में परेड की जगह सलामी देकर मनाया गया। हर बार के मुकाबले इस बार काफी कम लोगों ने शिरकत की। गृह मंत्री अमित शाह की जगह कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने जवानों का उत्साहवर्धन किया। लद्दाख में चीन के साथ चल रहे गतिरोध पर उन्होंने कहा कि आईटीबीपी ने उन देशों का भ्रम तोड़ दिया है, जो अपनी शक्तिशाली सेना पर गुरूर करते हैं। उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जवानों को सम्मानित भी किया।
जी किशन रेड्डी ने कहा कि आईटीबीपी सिर्फ सरहदों और देश की आंतरिक सुरक्षा की रखवाली नहीं कर रहा, बल्कि आर्थिक हितों की भी रक्षा कर रहा है। देश की सीमाएं शत्रु भावना रखने वाले पड़ोसियों से घिरीं हैं। हमारा आर्थिक विकास रोकने के लिए दुश्मन बार-बार अड़ंगे लगाते हैं। देश एवं यहां के नागरिकों को आईटीबीपी की वीरता और समर्पण पर गर्व है। आईटीबीपी भारत-चीन के बीच की 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रखवाली करने वाला विशिष्ट बल है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मोदी सरकार आईटीबीपी को मजबूत और आधुनिक करने के लिए दृढ़ है। आईटीबीपी को 47 सीमा चौकियों पर स्थापित करने के लिए समान विशेष कपड़े और ज्यादा ऊंचाई वाले स्थानों के लिए पर्वतारोहण उपकरणों के वास्ते गृह मंत्रालय ने स्वीकृति प्रदान की है और आधुनिकतम हथियार प्रदान किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि केंद्र ने वित्त वर्ष 2019-20 में आईटीबीपी के लिए 7,223 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी थी। इस मौके पर आईटीबीपी के महानिदेशक सुरजीत सिंह देसवाल ने कार्यक्रम में लद्दाख में प्रदर्शित की गई बहादुरी के लिए जवानों की सराहना की। उन्होंने बताया कि चीन के सैनिकों से लड़ने वाले कुछ जवानों को वीरता पुरस्कार देने के लिए सरकार से सिफारिश की गई है। देसवाल ने बताया कि बल ने भारत-चीन सीमा सड़क के फेज-2 निर्माण के लिए एक प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर गृह मंत्रालय को भेज दिया है। आईटीबीपी का गठन 1962 में चीन के हमले के बाद किया गया था। इसकी क्षमता 90,000 कर्मियों की है और इसमें 60 बटालियन हैं।
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