नए अध्यक्ष के साथ पूर्वांचल और पंजाबी वोटरों को साधने की कवायद में कांग्रेस

नवनीत शरण, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 24 Oct 2019 05:56 AM IST
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मध्य में दिल्ली कांग्रेस के नए अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा
मध्य में दिल्ली कांग्रेस के नए अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा - फोटो : Social Media

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काफी मशक्कत के बाद आखिरकार कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी। सुभाष चोपड़ा को प्रदेश की कमान सौंपकर कांग्रेस ने जहां पंजाबी मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने की कवायद की है तो कीर्ति आजाद को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी देकर पूर्वांचल मतदाताओं पर डोरे डाले है।
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 इस तरह से कांग्रेस आलाकमान ने अपने तरकश से ऐसे दो तीर छोड़े है जो दिल्ली की सियासत में अपने पुराने वोट बैंक को अपने पाले में करने का काम करेंगे। यह प्रयोग प्रदेश की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को कमान सौंप कर कर चुकी है। चुनावी रणनीतिकारों की माने तो दीक्षित पंजाबी व पूर्वांचली दोनों वोटरों पर समान रूप से अधिकार रखती थी, क्योंकि मूलत: दीक्षित पंजाबी समुदाय से थी और उनकी शादी उत्तर प्रदेश में हुई थी।
चुनावी समीकरण भी यहीं कहते है कि पूर्वांचल व पंजाबी मतदाता को पार्टी साध लेती है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। सुभाष चोपड़ा की पंजाबी समुदाय में बेहतर पकड़ है। चोपड़ा डीयू के अध्यक्ष भी रह चुके है। वहीं कीर्ति आजाद पूर्वांचली समेत युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं।
पुराने नेता का भी मिलेगा फायदा

सुभाष चोपड़ा कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ता है। छात्र राजनीति से ही वह कांग्रेस से जुड़ गए थे। रणनीतिकारों की माने तो चोपड़ा को कमान सौंपने से पुराने कैडर जहां एकजुट होंगे वहीं गुटबाजी भी कम होगी। पार्टी उनके अनुभव का भी फायदा उठाएगी। गौरतलब है कि पंजाबी बिरादरी का दिल्ली की राजनीति में अब भी दबदबा है। कई सीटों पर इनकी निर्णायक भूमिका है। आम आदमी पार्टी के गठन के पूर्व विधानसभा में जीत कर पहुंचने वाले ज्यादातर विधायक भी इसी समुदाय के रहते थे। दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित भी इसी समुदाय के थे।

विधानसभा में इस समुदाय का इतिहास : 1993 में विधिवत विधानसभा के गठन के बाद प्रथम मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना बने। खुराना के कैबिनेट में दो प्रमुख मंत्री हरशरण सिंह बल्ली व प्रो. जगदीश मुखी थे। इसी तरह शीला दीक्षित के कैबिनेट में डॉ. एके वालिया और महेंद्र सिंह साठी थे और तीसरे विधानसभा में डॉ. एके वालिया व अरविंदर सिंह लवली कैबिनेट स्तर के मंत्री रह चुके है। आम आदमी पार्टी में भी एक दर्जन से अधिक विधायक इसी समुदाय के हैं।

इन सीटों पर अहम भूमिका : सरोजनी नगर, कस्तूरबा नगर, जंगपुरा, कालकाजी, आरके पुरम, जनकपुरी, हरि नगर, तिलक नगर, रजौरी गार्डन, गीता कॉलोनी, गांधी नगर, मोती नगर, राजेंद्र नगर तीमारपुर, विष्णु गार्डन, पहाड़गंज, पटेल नगर, हौजखास, साकेत, तुगलकाबाद, ग्रेटर कैलाश, हरिनगर, जनकपुरी, मालवीय नगर, दिल्ली कैंट।

पंजाबी-सिख प्रतिशत

ग्रेटर कैलाश में 21 फीसदी, तिलक नगर 26 फीसदी, मॉडल टाऊन 17 फीसदी, मालवीय नगर 22 फीसदी, तिमारपुर में 26 फीसदी, आदर्श नगर 14 प्रतिशत, विकासपुरी 16 प्रतिशत, राजौरी गार्डन में 21 फीसदी, साथ ही इन सभी इलाके में 5-9 फीसदी सिख मतदाता भी हैं।

पूर्वांचल दबदबे वाला विधानसभा क्षेत्र

त्रिलोकपुरी, कोंडली, लक्ष्मी नगर, विश्वासनगर, सीमापुरी, सीलमपुर, घोंडा, मुस्तफाबाद, अंबेडकर नगर, संगम विहार, तुगलकाबाद, बुराड़ी, किराड़ी, नांगलोई जट, द्वारका, नजफगढ़, मटियाला।
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