एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ जेपी समूह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा आदेश 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 24 Oct 2019 07:01 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले के खिलाफ जेपी समूह की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। एनसीएलएटी ने अपने फैसले में संकटग्रस्त जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) की नीलामी में हिस्सा लेने से जेपी समूह को रोक दिया है। जेआईएल जेपी समूह की ही एक कंपनी है।
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समूह ने कहा कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान उसने 6000 इकाइयों का निर्माण कर घर खरीदारों को सौंपे। इस साल 30 जुलाई को एनसीएलएटी ने नकदी की तंगी झेल रही जेआईएल की नए सिरे से नीलामी की अनुमति दी थी लेकिन इसके प्रमोटर जेपी समूह को नीलामी में हिस्सा लेने से रोक दिया था।
रियल एस्टेट कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एफएस नरीमन ने जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ को बताया कि करीब 12000 फ्लैट या आवासीय इकाइयां घर खरीदारों को सौंपे जा चुके हैं और करीब 6000 आवासीय इकाइयां कंपनी ने अपने संकटकाल में सौंपे। उन्होंने कहा कि किसी ने नहीं कहा कि हम पैसा हजम कर गए।
पीठ ने नरीमन से पूछा कि क्या कंपनी अपनी संकट ग्रस्त कंपनी के लिए बोली लगाने के लिए कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स के 90 फीसदी सदस्यों की वैधानिक अनुमति हासिल कर सकते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि वह इसकी गारंटी नहीं दे सकते हैं। लेकिन कंपनी के प्रस्ताव में किसी तरह की कटौती की बात नहीं कही गई है और उसने खरीदारों को कई रियायतों का प्रस्ताव रखा है।

घर खरीदारों के वकील ने समूह की याचिका का विरोध किया और कहा कि वे पिछले दस साल से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं तथा वे सिर्फ अपना घर चाहते हैं। ये घर जेपी समूह द्वारा बनाए जाए या फिर एनबीसीसी द्वारा, उनके लिए इसका कोई महत्व नहीं है। इस पर पीठ ने मामले की सुनवाई 6 नवंबर को तय की और उसी दिन वह जेपी समूह की याचिका पर अपना आदेश सुनाएगी। 
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