Exclusive: मनीष सिसोदिया ने कहा- हालात संतोषजनक हैं फिर भी हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Jul 2020 05:45 AM IST
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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • दुनिया का कोई भी हेल्थ सिस्टम इतना तैयार नहीं, जितना कोरोना से लडने के लिए होना चाहिए

विस्तार

कोरोना काल में दिल्ली भी वायरस के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ रही है। मरीजों की संख्या के मामले में दिल्ली देश के तीन शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। कारोबारी गतिविधयां ठप पड़ी हैं और सरकार को राजस्व का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। स्कूल बंद होने से बच्चों को भविष्य अंधकार में है, जबकि दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था के अपने मॉडल को वैश्विक स्तर पर तैयार करने का दावा कर रही थी। इन सभी मसलों पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार से बातचीत में बेबाक राय रखी....
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कोराना काल के करीब साढ़े तीन माह गुजर गए हैं, लेकिन दिल्ली में संक्रमण के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं। क्या आपको लगता है कि तैयारियों के लिहाज से कहीं पिछड़े हैं या सब कुछ सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ा।
देखिए, कोरोना सभी के लिए चुनौती है। हमें स्वीकार करना पड़ेगा कि आज कोराना एक हकीकत है और यह दिल्ली जैसे शहरों में, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कनेक्ट हैं, यह होना ही था। शुरुआत में ही दिल्ली ने 35,000 अंतरराष्ट्रीय ट्रेवलर होस्ट किए, जो अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी। उस वक्त थोड़ी कमियां भी रहीं। दुनिया का कोई भी हेल्थ सिस्टम इतना तैयार नहीं होगा, जितना कोरोना से लड़ने के लिए होना चाहिए था। तब कुछ चीजें समझ में आई कि यह चीजें और ज्यादा ठीक होनी हैं। वो ठीक भी की गईं। आज हालात संतोषजनक हैं। आज जहां हम खड़े हैं, वहां कोरोना का स्टेटस स्टैटिक है। मतलब, नए मामलों में एक स्थिरता है। जितना बड़ा खतरा है, तैयारियों के लिहाज से हम उसमें आगे खड़े हैं। हम मानकर चल रहे थे कि जून के आखिर तक 15,000 बेड की जरूरत होगी, लेकिन आज 15,243 बेड तैयार हैं। यह हमारे लिए बड़ी चीज हैं कि जो तैयारी होनी चाहिए थीं, सरकार ने उतनी कर ली है। हालांकि, हमें अभी स्थिरता दिख रही है, लेकिन हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे हैं। हम आगे भी तैयारियों को बढ़ा रहे हैं।
आपने कहा था कि जून के आखिर में एक लाख मामले होंगे, जुलाई में करीब छह लाख। क्या वह अधिक आकलन था, जिसका फायदा तैयारियों में दिख रहा है।
यह आकलन भारत सरकार का एक पोर्टल करता है। उस पर विशेषज्ञ बताते हैं कि आने वाले समय में हम कहां खड़े होंगे। दिल्ली के लिए भी उनका जो आकलन था, जून की शुरुआत में उसे मैंने जनता से साझा किया। मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा करने से लोग सतर्कहुए। सार्वजनिक स्थलों से लेकर घरों तक सब लोगों ने एहतियात बरती। बहुत सारे संस्थान साथ आग आए कि अगर इतनी बड़ी महामारी आ रही है तो हमें भी लड़ने में मदद करनी है। केंद्र सरकार साथ में आई। मुख्यमंत्री जी ने सबसे कहा कि सबको साथ आना है। उनका मानना था कि तैयारी इतनी बड़ी करनी है कि चुनौती जितनी बड़ी दिख रही है वह उससे बड़ी भी हो सकती है। हमारी तैयारियों को हमने उतना स्केल दिया। इससे मदद मिली। तो इसे ओवर असस्टमेंट नहीं कहेंगे, वह उस वक्त का भविष्य को लेकर किया गया आकलन था।

आपको लगता है कि आंकड़े साझा करने से जनता सजग हुई।
महामारी में आम लोगों की बड़ी भूमिका है। जब हम उन्हें सच्चाई बताते रहेंगे तो वह अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाते रहेंगे। हम सही-सही नहीं बताएंगे तो वह अपनी भूमिका कैसे तय करेगा।

सबके सहयोग के बीच श्रेय लेने की लड़ाई भी चल रही है। भाजपा कह रही है कि सारा कुछ केंद्र सरकार कर रही है? आम आदमी पार्टी कहती है कि सारा काम दिल्ली का है? हकीकत में कर कौन रहा है।
हमारी तरफ से सामान्य सी बात कही गई है कि क्रेडिट सारा आपका, जिम्मेदारी सारी हमारी। मुख्यमंत्री जी ने भी यही कहा कि जिसको क्रेडिट लेने की लड़ाई लडनी है, लड़ता रहे। हमारी जिम्मेदारी यह है कि दिल्ली के लोगों को कोई परेशानी न हो। हमारा सिर्फ इतना सा कहना है कि जो दिल्ली के लोगों के लिए करना पड़ेगा, करेंगे। केंद्र की मदद मांगनी पड़ेगी, मांगेगे। निजी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं की मांगनी पड़ेगी, उनसे मांगेगे। वो मुख्यमंत्री जी ने मांगी भी और अच्छी बात है कि उनको मिली। तमाम विरोधों के बावजूद केंद्र ने भी मदद की। रेलवे कोच दिए, आईटीबीपी के डॉर्क्ट्स दिए। कुछ मॉस्क, कुछ सेनीटाइजर, पीपीई किट्स दिए हैं।

विवाद तो कोरोना से होने वाली मौतों को भी लेकर रहा।
यह दुर्भाग्यपूर्ण था। क्योंकि मौतों को लेकर जो दिखाने की कोशिश हुई, वह वास्तविक नहीं थी। दिल्ली सरकार डेथ कमेटी से ऑडिट कराकर आंकड़े जारी करवा रही थी। केंद्र सरकार ने कहा था कि बगैर डेथ कमेटी से ऑडिट कराए आंकड़े जारी नहीं करना है। कमेटी हॉस्पिटल से बहुत जानकारी लेती थी। अब वो जानकारी इतनी नहीं आ रही है। पर किसी एक समय पर श्मशान में कितने लोग लाए गए और कमेटी कितने लोगों का कह रही है कि कोविड से मरे हैं, इसके अंतर को मुझे लगता है कि राजनीति में नहीं ले जाना चाहिए। यह छोटी मानसिकता है। पर मुझे अभी उसका कुछ नहीं कहना है, क्योंकि वो समय निकल गया। हमारी कोशिश है कि सब लोग सुरक्षित रहें और अगर यह बीमारी किसी भी वजह से आगे बढ़ती है तो हमें तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने पांच हथियार बताए हैं, जिससे कोरोना से लड़ाई लड़ी जा रही है।

चूंकि अभी आपके पास स्वास्थ्य विभाग भी है तो क्या लगता है कि मौजूदा तैयारियों में कुछ अतिरिक्त जोड़ना पड़ेगा।
हम सब सीख रहे हैं। मैं किसी चीज को यह नहीं कह रहा हूं कि वह सुपर सेचुरेशन के स्तर पर आ गई है। नए चैलेंज सामने आएंगे तो नया करना पड़ेगा। जैसे, हम अपने हॉस्पिटल में तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्लाज्मा बैंक नया कांसेप्ट है। तो नई-नई चीजें जरूरत के हिसाब से जुड़ती रहेंगी। क्योंकि बीमारी नई है, इसका स्केल सामने आता रहेगा। इसका नया चरित्र सामने आता रहेगा।
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