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दिल्लीः ऑनलाइन क्लास न कर पाने वाले बच्चों के लिए कांस्टेबल बने सहारा, मंदिर में ले रहे क्लास

दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों के लिए मदद का बड़ा हाथ बनकर सामने आया है। कांस्टेबल ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और जरूरतमंद...

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

निकिता हत्याकांड: वारदात के बाद तौसीफ-रेहान ने बदल लिया था हुलिया, सीसीटीवी ने ऐसे बिगाड़ा हत्यारों का खेल

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दिल्ली से अंतरराज्यीय बसों के परिचालन को मंजूरी, 20 यात्रियों की बाध्यता भी खत्म

दिवाली से पहले बस यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अंतरराज्यीय बस सेवाओं को फिर से शुरू करने की मंजूरी दे दी है। साथ ही, सरकारी बसों में सभी सीटों पर यात्रियों को बैठाने की भी स्वीकृति दी गई है। कोरोना महामारी के मद्देनजर अभी तक बसों में सिर्फ 20 यात्रियों को बैठाने की अनुमति थी। दिल्ली सरकार ने एलजी को इस बाबत प्रस्ताव भेजा था।

उपराज्यपाल एवं दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के अध्यक्ष अनिल बैजल के निर्देश पर इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा रही है। परिवहन विभाग के आलाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह से फिर दिल्ली से दूसरे राज्यों में बसों का आवागमन शुरू हो जाएगा।

23 अक्तूबर को डीडीएमए की बैठक में डीटीसी और क्लस्टर बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया था। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने बसों में सभी सीटों पर यात्रियों को बैठने की अनुमति मांगी थी। डीटीसी और क्लस्टर बसों में करीब 40 यात्री सफर कर सकते हैं।

कोरोना को देखते हुए फिलहाल सामाजिक दूरी के पालन के साथ कंडक्टर और ड्राइवर समेत 20 यात्री सफर कर रहे हैं। शुक्रवार शाम तक भी बसों में पहले की तरह यात्री सफर करते नजर आए।

डीटीसी ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सभी सीटों पर यात्रियों को बैठने की इजाजत मांगी थी। डीटीसी के आलाधिकारी का कहना है कि इसके लिए सभी तैयारियां हैं और जैसे ही औपचारिक आदेश मिलते हैं सभी सीटों पर यात्रियों को बैठने की इजाजत दे दी जाएगी।
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दिल्ली की हवा बहुत खराब, आज हो सकता है कुछ सुधार, बवाना में बदले नहीं हालात

anil baijal
पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं और मौसमी दशाओं के कारण राजधानी की हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में 21 अंकों के सुधार के बाद भी दिल्ली इस श्रेणी से बाहर नहीं निकल पाई। औसत एक्यूआई 374 रहा, जो बृहस्पतिवार को 395 था। 

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, बवाना इलाके की हवा लगातार दूसरे दिन राजधानी में सबसे अधिक प्रदूषित रही। वहां का एक्यूआई 447 रिकॉर्ड किया गया, जो एक दिन पहले 453 था। यह स्थिति बेहद गंभीर श्रेणी में आती है। सफर का पूर्वानुमान है कि शनिवार और रविवार को स्थिति में सुधार हो सकता है।

पराली जलने पर उत्पन्न होने वाले पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की भागीदारी राजधानी में 19 फीसदी रही है। बृहस्पतिवार को यह 36 फीसदी दर्ज की गई थी, जो इस सीजन में सबसे अधिक थी। बुधवार को इसका स्तर 18 फीसदी, मंगलवार को 23, सोमवार को 16, रविवार को 19 और शनिवार को नौ फीसदी रहा था।

सफर के अनुसार, हवा की गति में बदलाव के कारण एक्यूआई में सुधार की उम्मीद है। एक नवंबर के बाद से फिर से गुणवत्ता खराब हो सकती है। राजधानी में हॉटस्पॉट क्षेत्रों की बात करें तो शादीपुर में एक्यूआई 417, पटपड़गंज में 406, बवाना में 447 और मुंडका में 427 रहा। बता दें कि बृहस्पतिवार को राजधानी में जनवरी के बाद से सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया था। इसकी प्रमुख वजह पराली जलाने की घटनाएं रही थी। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटा रहने के साथ न्यूनतम तापमान भी 13.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

ये हैं एक्यूआई के मानक
- 0 से 50 अच्छा
- 51 से 100 संतोषजनक
- 101 से 200 मध्यम
- 201 से 300 खराब
- 301 से 400 बहुत खराब
- 401 से 500 गंभीर माना जाता है।
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पटाखे पर स्टील का गिलास रखकर फोड़ा, शरीर में टुकड़े घुसने से बच्चे की मौत

राजधानी में तेज आवाज वाले पटाखे बेचने और खरीदने पर पाबंदी है। बावजूद इसके अलीपुर में बिक रहे पटाखे ने एक मासूम की जान ले ली। नौ साल का मासूम पटाखे पर स्टील का गिलास रखकर उसे फोड़ने की कोशिश कर रहा था। आग लगाने के बावजूद पटाखे के नहीं फूटने पर वह नजदीक गया और इसी दौरान तेज धमाका हो गया। गिलास के टूकड़े बच्चे के शरीर में घुस गए। उसे पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव को परिवार वालों के हवाले कर पुलिस ऐसे पटाखा बेचने वालों की तलाश कर रही है। 

मृत बच्चे की शिनाख्त प्रिंस दास (9) के रूप में हुई है। वह परिजनों के साथ ओउम कॉलोनी बख्तावरपुर में रहता था। वह शांति निकेतन पब्लिक स्कूली चौथी कक्षा में पढता था। उसके पिता राम रखबाल दास निजी कंपनी में नौकरी करते हैं जबकि मां बबीता देवी खेतों में काम करती है।
 
बुधवार को उसके माता-पिता काम पर गये थे। अन्य बच्चों की तरह प्रिंस इलाके की किसी दुकान से पटाखे खीदकर लाया था। उसके बाद वह पड़ोस के बच्चों के साथ खाली प्लॉट में पटाखे चलाने के लिए चला गया। बम को फोड़ने के दौरान उसने स्टील का गिलास उस पर रख दिया। पटाखा नहीं फूटने पर वह उसे पास से देखने गया। इसी दौरान बम में धमाका हो गया और गिलास के परखच्चे उड़ गये। गिलास के कई टूकड़े उसके शरीर में घुस गये। वह घायल होकर वहीं गिर गया। घटना की जानकारी मिलते ही प्रिंस के माता पिता वहां पहुंचे और उसे पास के अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने प्रिंस को मृत घोषित कर दिया। 

इलाके में पटाखों पर नहीं है कोई प्रतिबंध 
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में पटाखे बेचने पर कोई पाबंदी नहीं है। छोटे से परचून की दुकान में भी चोरी छिपे पटाखे बेचे जाते हैं। घर पर परिजनों के नहीं रहने पर अकसर बच्चे इन दुकानों पटाखे खरीदकर उसे चलाते हैं। ऐसे में वह इसके चपेट में आकर घायल हो जाते हैं या फिर उन्हें प्रिंस की तरह जान गंवानी पड़ती है। परिजनों का कहना है कि  ऐसे पटाखे पर पूरी तरह से प्रतिबंध होना चाहिए और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दुकानदारों के पास पुराने पटाखे मौजूद हैं जिसे वह कम दाम पर बेच रहे हैं। 
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राजधानी में होगी केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री, पर्यावरण मंत्री ने दिए निर्देश

राजधानी में प्रदूषण को देखते हुए ग्रीन पटाखों की बिक्री व उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है। केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेता ही इनकी बिक्री कर सकेंगे। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दीपावली और गुरु पर्व के अवसर पर रात्रि आठ से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे। क्रिसमस और नए वर्ष के अवसर पर इसकी अनुमति रात्रि 11:55 से 12:30 बजे तक रहेगी।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राजधानी में सिर्फ लाइसेंस प्राप्त विक्रेता ही ग्रीन पटाखों की बिक्री कर सकेंगे। दूसरी ओर पटाखों की बिक्री के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट को ऑर्डर न लेने के लिए भी निर्देश दिया गया है। गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली सरकार ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और पुलिस उपायुक्त को आदेश के पालन को लेकर प्रतिदिन की एक्शन रिपोर्ट दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी में जमा करने का निर्देश दिया है। प्रदूषण नियंत्रण समिति और पुलिस की 11 टीम पटाखे बनाने वाली फैक्टरियों का निरीक्षण करेंगी, जिससे कोई पुराना स्टॉक जमा न रह सके।

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में प्रदूषण के खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री को अनुमति दी थी। ग्रीन पटाखों में अन्य पटाखों की तुलना में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे केवल 30 फीसदी पदार्थ ही शामिल होते हैं। इनमें कम प्रदूषण होता है। इसके लिए राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा ग्रीन पटाखों को तैयार करने का काम दिया गया था, लेकिन लाइसेंस की जरूरतों को देखते हुए बहुत कम संख्या में ही ग्रीन पटाखे मार्केट में उपलब्ध हो सके थे।
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एम्स निदेशक ने चेताया, बाजारों में घूमने और मास्क न लगाने वाले कर रहे बड़ी चूक

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को कोरोना वायरस के प्रति लापरवाही बरतने वालों को चेतावनी देते हुए कहा है कि बाजारों में घूमने, सामाजिक दूरी का पालन नहीं करने और मास्क नहीं लगाने वाले बड़ी चूक कर रहे हैं। जो लोग अपने घरों में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और सोचते हैं कि लंबे समय से घर में रह लिए अब कहीं चलते हैं, वे लापरवाही न बरतें। 

जो युवा सोच रहे हैं कि उन्हें कोरोना नहीं होगा, उनकी उम्र वालों को बस फ्लू हो रहा है, यह गलत है। जबकि दिल्ली एम्स में वेंटिलेटर पर भर्ती कई युवा मरीज इसके गवाह हैं कि कोरोना संक्रमण किस तरह जानलेवा हो सकता है।डॉ. गुलेरिया का कहना है कि महामारी की शुरुआत में लोगों ने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था, लेकिन उसके बाद लोग लापरवाह हो गए हैं। 

ज्यादातर लोगों को लगता है कि संक्रमण उनको और उनके परिवार को नहीं होगा और बाकी किसी को भी हो सकता है। यह विचारधारा पूरी तरह से गलत है। इस वक्त देश के हर व्यक्ति को अपने बचाव पर ध्यान देना चाहिए। दिल्ली और केरल में लोगों की लापरवाही हुई तो आज वहां स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है।

प्रदूषकों के साथ मिलकर और नुकसान पहुंचाता है वायरस
डॉ. गुलेरिया ने कहा, देश की राजधानी दिल्ली में अभी कोरोना की तीसरी लहर नहीं आई है। यह दूसरी लहर का असर है जो अब रोजाना साढ़े पांच हजार से ज्यादा संक्रमित मरीजों के रूप में देखने को मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सहित कई शहरों में इस समय प्रदूषण भी एक समस्या बना हुआ है। अब तक के चिकित्सीय अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कोरोना के वायरस पीएम-2.5 कणों के साथ मिल जाते हैं। ऐसे में लोगों को न सिर्फ प्रदूषण, बल्कि पीएम-2.5 कणों से भी बचाव करना चाहिए। दोनों ही बचाव में उपाय सिर्फ यही है, चेहरे पर मास्क लगाना। 
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दिल्ली में कोरोनाः अक्तूबर में रिकॉर्ड 96 हजार रोगियों ने दी महामारी को मात

राजधानी में इस माह रिकॉर्ड 96 हजार मरीजों ने कोरोना संक्रमण को मात दी है। कोरोना की शुरुआत से अब तक एक महीने में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में रोगी स्वस्थ हुए। दिल्ली सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और जनभागीदारी से ही यह संभव हो सका है।

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक 3,42,811 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इनमें से 96 हजार इस माह ठीक हुए हैं। पिछले तीन दिन से रोजाना चार हजार से ज्यादा मरीज स्वस्थ हो रहे हैं। इससे संक्रमण के मामले बढ़ने के बावजूद रिकवरी दर करीब 90 फीसदी पर बनी हुई है। एम्स अस्पताल के डॉक्टर विक्रम बताते हैं कि यह सब बेहतर प्रबंधन के कारण संभव हो रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है मरीजों की छंटनी। अस्पताल में भर्ती के दौरान उनका आकलन कर आईसीयू या वार्ड में भर्ती किया जाता है। 

गंभीर मरीजों के इलाज का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समय पर सही इलाज मिलने से मरीज ठीक हो रहे हैं। वहीं, अब संक्रमण का प्रभाव भी हल्का हो गया है। कुछ मरीजों को एक सप्ताह के भीतर ही अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। कोरोना से उन मरीजों को ज्यादा समस्या हो रही है, जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी है।

अधिक जांच का मिला फायदा
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि अधिक जांच करने का भी लाभ मिल रहा है। इसमें काफी हद तक लोगों का सहयोग रहा है। जिस व्यक्ति में भी संक्रमण के लक्षण होते
हैं वह जांच केंद्र जाकर टेस्ट करा रहा है। इससे समय पर संक्रमित की पहचान हो रही है और उसे इलाज मिल रहा है।

इस माह की स्थिति
तारीख    स्वस्थ
01    3167
02    3126
08    2643
12    2975
16    3197
20    2126
24    3614
26    3736
30    4433
नोट : आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं।
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