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चंद्र ग्रहण 2020 : चंद्र ग्रहण पर रखें इन बातों का खास ख्याल
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चंद्र ग्रहण 2020 : चंद्र ग्रहण पर रखें इन बातों का खास ख्याल

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सीएम केजरीवाल ने डॉक्टर असीम के परिवार को दी एक करोड़ की सम्मान राशि, बेटे ने लिखा भावुक खत

कोरोना वायरस से लोकनायक अस्पताल के जिस डॉक्टर असीम गुप्ता की मौत हुई थी आज दिल्ली के सीएम उनके परिवार से मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने डॉ. असीम के परिवार को एक करोड़ रुपये कीट सम्मान राशि भी प्रदान की।

केजरीवाल ट्वीट कर बताया कि, आज डॉ. असीम के परिवार से मिला, जिनकी मौत कोरोना के कारण हो गई थी। हम 'जनता के डॉक्टर' को किसी तरह वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनके परिवारों के लिए कुछ करें जिन्होंने हमारे लिए अपनी जान दे दी। आज हमने उनके परिवार को एक करोड़ की सम्मान राशि भी दी।

केजरीवाल के जाने के बाद डॉ. असीम के बेटे ने उन्हें ट्विटर पर एक पत्र लिखकर धन्यवाद दिया। डॉ. असीम के बेटे ने लिखा कि मैं अक्षत गुप्ता यह खत मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लिख रहा हूं और उनका आभार व्यक्त करना चाहता हूं क्योंकि उन्होंने मेरे पिता और परिवार को बहुत सहारा और इज्जत दी है।

अक्षत ने आगे लिखा कि आप प्यार भरे शब्द और समर्थन ने मेरे दिल को छू लिया है और इसके लिए मैं आपका आभारी रहूंगा। आपने सही ही कहा कि मेरे पिता जी का अपना ही तरीका था मरीजों की मदद करने का और उन्होंने कभी उनकी जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया। हम एक बुरे समय में जी रहे हैं और पिता जी के न होने से यह समय और बुरा हो गया है, लेकिन आपके(मुख्यमंत्री) आशीर्वाद से हमारे परिवार को वापस शक्ति मिली है। न सिर्फ हम बल्कि देश ने एक महान आदमी और एक योद्धा खो दिया है।

अक्षत ने केजरीवाल के लिए लिखा कि मैं आपको सलाम करता हूं, जिस तरह से आपने इस महामारी को अब तक हैंडल किया है। आप जिस तरह से लोगों की सेवा कर रहे हैं वह प्रशंसनीय है। इतने व्यस्त होते हुए भी आपने समय निकालकर मेरे परिवार को फोन किया उनसे मिलने आए, इसने हमें साहस और हिम्मत दी है। मुझे उम्मीद है कि आपके काम कोविड महामारी को जल्द ही खत्म करेंगे। मैं आपके लिए हमेशा दुआ करूंगा कि आप और आपका परिवार स्वस्थ रहे। काश मैं आपसे मिलूं, मुझे लगता है मैं आपसे जल्द मिलूंगा।
 
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अरविंद केजरीवाल डॉ. असीम के परिवार से मिले अरविंद केजरीवाल डॉ. असीम के परिवार से मिले

Exclusive: मनीष सिसोदिया ने कहा- हालात संतोषजनक हैं फिर भी हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे

कोरोना काल में दिल्ली भी वायरस के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ रही है। मरीजों की संख्या के मामले में दिल्ली देश के तीन शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। कारोबारी गतिविधयां ठप पड़ी हैं और सरकार को राजस्व का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। स्कूल बंद होने से बच्चों को भविष्य अंधकार में है, जबकि दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था के अपने मॉडल को वैश्विक स्तर पर तैयार करने का दावा कर रही थी। इन सभी मसलों पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार से बातचीत में बेबाक राय रखी....

कोराना काल के करीब साढ़े तीन माह गुजर गए हैं, लेकिन दिल्ली में संक्रमण के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं। क्या आपको लगता है कि तैयारियों के लिहाज से कहीं पिछड़े हैं या सब कुछ सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ा।

देखिए, कोरोना सभी के लिए चुनौती है। हमें स्वीकार करना पड़ेगा कि आज कोराना एक हकीकत है और यह दिल्ली जैसे शहरों में, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कनेक्ट हैं, यह होना ही था। शुरुआत में ही दिल्ली ने 35,000 अंतरराष्ट्रीय ट्रेवलर होस्ट किए, जो अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी। उस वक्त थोड़ी कमियां भी रहीं। दुनिया का कोई भी हेल्थ सिस्टम इतना तैयार नहीं होगा, जितना कोरोना से लड़ने के लिए होना चाहिए था। तब कुछ चीजें समझ में आई कि यह चीजें और ज्यादा ठीक होनी हैं। वो ठीक भी की गईं। आज हालात संतोषजनक हैं। आज जहां हम खड़े हैं, वहां कोरोना का स्टेटस स्टैटिक है। मतलब, नए मामलों में एक स्थिरता है। जितना बड़ा खतरा है, तैयारियों के लिहाज से हम उसमें आगे खड़े हैं। हम मानकर चल रहे थे कि जून के आखिर तक 15,000 बेड की जरूरत होगी, लेकिन आज 15,243 बेड तैयार हैं। यह हमारे लिए बड़ी चीज हैं कि जो तैयारी होनी चाहिए थीं, सरकार ने उतनी कर ली है। हालांकि, हमें अभी स्थिरता दिख रही है, लेकिन हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठे हैं। हम आगे भी तैयारियों को बढ़ा रहे हैं।

आपने कहा था कि जून के आखिर में एक लाख मामले होंगे, जुलाई में करीब छह लाख। क्या वह अधिक आकलन था, जिसका फायदा तैयारियों में दिख रहा है।
यह आकलन भारत सरकार का एक पोर्टल करता है। उस पर विशेषज्ञ बताते हैं कि आने वाले समय में हम कहां खड़े होंगे। दिल्ली के लिए भी उनका जो आकलन था, जून की शुरुआत में उसे मैंने जनता से साझा किया। मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा करने से लोग सतर्कहुए। सार्वजनिक स्थलों से लेकर घरों तक सब लोगों ने एहतियात बरती। बहुत सारे संस्थान साथ आग आए कि अगर इतनी बड़ी महामारी आ रही है तो हमें भी लड़ने में मदद करनी है। केंद्र सरकार साथ में आई। मुख्यमंत्री जी ने सबसे कहा कि सबको साथ आना है। उनका मानना था कि तैयारी इतनी बड़ी करनी है कि चुनौती जितनी बड़ी दिख रही है वह उससे बड़ी भी हो सकती है। हमारी तैयारियों को हमने उतना स्केल दिया। इससे मदद मिली। तो इसे ओवर असस्टमेंट नहीं कहेंगे, वह उस वक्त का भविष्य को लेकर किया गया आकलन था।

आपको लगता है कि आंकड़े साझा करने से जनता सजग हुई।
महामारी में आम लोगों की बड़ी भूमिका है। जब हम उन्हें सच्चाई बताते रहेंगे तो वह अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाते रहेंगे। हम सही-सही नहीं बताएंगे तो वह अपनी भूमिका कैसे तय करेगा।

सबके सहयोग के बीच श्रेय लेने की लड़ाई भी चल रही है। भाजपा कह रही है कि सारा कुछ केंद्र सरकार कर रही है? आम आदमी पार्टी कहती है कि सारा काम दिल्ली का है? हकीकत में कर कौन रहा है।
हमारी तरफ से सामान्य सी बात कही गई है कि क्रेडिट सारा आपका, जिम्मेदारी सारी हमारी। मुख्यमंत्री जी ने भी यही कहा कि जिसको क्रेडिट लेने की लड़ाई लडनी है, लड़ता रहे। हमारी जिम्मेदारी यह है कि दिल्ली के लोगों को कोई परेशानी न हो। हमारा सिर्फ इतना सा कहना है कि जो दिल्ली के लोगों के लिए करना पड़ेगा, करेंगे। केंद्र की मदद मांगनी पड़ेगी, मांगेगे। निजी संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं की मांगनी पड़ेगी, उनसे मांगेगे। वो मुख्यमंत्री जी ने मांगी भी और अच्छी बात है कि उनको मिली। तमाम विरोधों के बावजूद केंद्र ने भी मदद की। रेलवे कोच दिए, आईटीबीपी के डॉर्क्ट्स दिए। कुछ मॉस्क, कुछ सेनीटाइजर, पीपीई किट्स दिए हैं।

विवाद तो कोरोना से होने वाली मौतों को भी लेकर रहा।
यह दुर्भाग्यपूर्ण था। क्योंकि मौतों को लेकर जो दिखाने की कोशिश हुई, वह वास्तविक नहीं थी। दिल्ली सरकार डेथ कमेटी से ऑडिट कराकर आंकड़े जारी करवा रही थी। केंद्र सरकार ने कहा था कि बगैर डेथ कमेटी से ऑडिट कराए आंकड़े जारी नहीं करना है। कमेटी हॉस्पिटल से बहुत जानकारी लेती थी। अब वो जानकारी इतनी नहीं आ रही है। पर किसी एक समय पर श्मशान में कितने लोग लाए गए और कमेटी कितने लोगों का कह रही है कि कोविड से मरे हैं, इसके अंतर को मुझे लगता है कि राजनीति में नहीं ले जाना चाहिए। यह छोटी मानसिकता है। पर मुझे अभी उसका कुछ नहीं कहना है, क्योंकि वो समय निकल गया। हमारी कोशिश है कि सब लोग सुरक्षित रहें और अगर यह बीमारी किसी भी वजह से आगे बढ़ती है तो हमें तैयार रहना होगा। मुख्यमंत्री ने पांच हथियार बताए हैं, जिससे कोरोना से लड़ाई लड़ी जा रही है।

चूंकि अभी आपके पास स्वास्थ्य विभाग भी है तो क्या लगता है कि मौजूदा तैयारियों में कुछ अतिरिक्त जोड़ना पड़ेगा।
हम सब सीख रहे हैं। मैं किसी चीज को यह नहीं कह रहा हूं कि वह सुपर सेचुरेशन के स्तर पर आ गई है। नए चैलेंज सामने आएंगे तो नया करना पड़ेगा। जैसे, हम अपने हॉस्पिटल में तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्लाज्मा बैंक नया कांसेप्ट है। तो नई-नई चीजें जरूरत के हिसाब से जुड़ती रहेंगी। क्योंकि बीमारी नई है, इसका स्केल सामने आता रहेगा। इसका नया चरित्र सामने आता रहेगा।
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अध्ययनः हर व्यक्ति पर अलग तरीके से ‘अटैक’ करता है ‘बहरूपिया वायरस’

कोरोना वायरस का प्रभाव एक व्यक्ति से दूसरे पर अलग-अलग तरीके से पड़ रहा है। राजधानी के राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान के छात्रों ने यह शोध किया है। इसको यूरोप की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका जर्नल ऑफ क्लीनिकल वायरोलॉजी में भी प्रकाशित किया गया है। शोध पत्र में कहा गया है कि मानव शरीर में फैलने वाले कोरोना वायरस की जीनोम संरचना चमगादड़ की जीनोम संरचना से काफी मिलती-जुलती है।

इस विषय पर शोध करने वाले राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान के एक शोधार्थी मनीष तिवारी ने बताया कि कोराना के जीनोम में परिस्थितियों के हिसाब से अनुकूलन क्षमता है, जिस कारण ये संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। कोरोना की जीनोमिक संरचना में कुछ न्यूक्लोटाइड्स का बदलाव पाया गया। 

इसके कारण अमिनो एसिड बदल जाता है। ऐसे ही कुछ अमिनो एसिड के परिवर्तन से जीका वायरस, एचआईवी और ईबोला में एंटी वायरल थेरेपी और निरोधात्मक दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध पाया गया। यही कारण है कि कोरोना वायरस के इलाज में एचआईवी प्रतिरोधक कुछ दवाइयों के इस्तेमाल को सुझाया गया है। यह दवाइयां छोटे स्तर पर कामयाब हैं, लेकिन बड़े स्तर पर फेल हो गई हैं।

शोध के अनुसार, जीनोमिक संरचना को समझकर इलाज की प्रक्रिया अपनाने से और भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए कई सारी दवाइयों के मिश्रण का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। पूरा शोध पत्र विभिन्न देशों के 591 मानव कोरोना वायरस के जीनोम के विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है।

ऐसे करता है प्रभावित
जीनोम संरचना के कारण कोरोना वायरस का असर हर व्यक्ति में अलग तरीके होता है। यह इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है उसके शरीर में जाकर वायरस कमजोर हो जाता है। इसी कारण ऐसे लोगों के अंदर इसके लक्षण नहीं आते हैं और कुछ ही दिनों में शरीर एंटी बॉडी बनाने लगता है। जिन लोगों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी नहीं होती है उनके शरीर में जाते ही वायरस अपना रूप बदल लेता है और उनको प्रभावित करके बीमार करने लगता है। यही कारण है कि बुजुर्ग लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।
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मास्क न पहनने पर टोका तो तीन युवकों ने सिपाही की कर दी धुनाई, बाद में पकड़े गए

कोरोना वायरस
सिविल लाइन इलाके में मास्क के लिए टोकने पर नशे में धुत तीन युवकों ने सिपाही की पिटाई कर दी। सिपाही ने तुरंत इसकी सूचना थाने में दी। थाने से पहुंचे पुलिसकर्मियों ने तीनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। युवकों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और मारपीट करने का मामला दर्ज किया गया है।  

सिविल लाइंस थानेे में तैनात पूरनमल (29) बुधवार को इलाके में बाइक पर गश्त कर रहा था। हिंदूराव अस्पताल के गोल चक्कर के पास पूरनमल ने तीन युवकों को बिना मास्क पहने आते देखा। उसने युवकों को रोककर मास्क नहीं पहनने के बारे में पूछा। 

इतना सुनते ही तीनों युवक सिपाही के साथ दुर्व्यवहार करने लगे। सिपाही ने तुरंत मदद के लिए थाने में फोन कर दिया। इतने में तीनों युवक उसके साथ मारपीट करने लगे। इसी बीच थाने की गश्त करने वाली गाड़ी मौके पर पहुंच गई और आरोपी युवकों को पकड़ लिया। 

तीनों आरोपियों को पुलिस थाने लेकर आई। जहां नशे में आरोपियों ने काफी शोरशराबा किया। पूरनमल का मेडिकल करवाने के बाद पुलिस ने उसके बयान पर मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया। 

गिरफ्तार युवकों की पहचान मलकागंज बस्ती निवासी जितेंद्र, मयूर विहार फेज तीन निवासी अभिषेक और करोलबाग निवासी कुलदीप सिंह के रूप में हुई है। बताया जाता है आरोपी जितेंद्र एक सेशन जज का ड्राइवर है।
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थूकने पर अब लगेगा एक हजार जुर्माना, एनडीएमसी ने शरू किया अभियान

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) क्षेत्र में थूकने पर अब एक हजार रुपये जुर्माना लगेगा। इस नियम को लागू कराने के लिए एनडीएमसी ने बृहस्पतिवार से अभियान शुरू कर दिया है। कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए यह पहल की गई है।

इस अभियान में 10 सिविक वार्डन भी शामिल किए गए हैं। सिविक वार्डन जुर्माने के साथ-साथ लोगों को गंदगी नहीं फैलाने के लिए जागरूक भी करेंगे। उन्हें विशेष वर्दी के साथ जुर्माने के लिए पीओएस मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी।

नगद राशि नहीं होने की स्थिति में नियम तोड़ने वाले क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भी जुर्माने का भुगतान कर सकेंगे। पहले चरण में यह अभियान कनॉट प्लेस, खान मार्केट, गोल मार्केट, सरोजनी नगर मार्केट, बंगाली मार्केट, जनपथ और अन्य प्रमुख मार्केट क्षेत्रों में चलेगा। दूसरे चरण के तहत पार्कों, बड़े उद्यानों और सार्वजनिक स्थानों पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दो महीने पहले जज की कार हुई चोरी, पुलिस ने भेजा ओवर स्पीडिंग का चालान

पश्चिमी दिल्ली निवासी जिला जज की जो कार दो महीने पहले चोरी हो गई, पुलिस ने उसी कार का ओवर स्पीडिंग का चालान उनके घर भेजा है। इसमें हैरान करने वाली बात यह है कि पंजाबी बाग थाने में कार चोरी की एफआईआर दर्ज हुई थी। उसकी जांच रिपोर्ट में पुलिस ने कहा है कि यह कार पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

यह कार पश्चिम विहार निवासी डिस्ट्रिक्ट जज के पति के नाम पर रजिस्टर है। कार का इस्तेमाल पति पत्नी दोनों ही करते हैं। कार पर जज लिखा हुआ स्टीकर भी लगा हुआ है। जज के पति ने बताया कि अब उन्हें चिंता सता रही है कि इस कार का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इस कार के जरिये कहीं भी प्रवेश किया जा सकता है।

कार 21 मार्च को जज के घर से चोरी हुई थी। उसी दिन जज के पति ने एफआईआर दर्ज कराई थी। लगभग 1 महीने बाद पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट में इस मामले की जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें पुलिस ने बताया कि कार को चोरों ने नष्ट कर दिया है। अब पुलिस को यह पता चला है कि चोरी की गई कार अभी सड़कों पर दौड़ रही है तो पुलिस ने इस मामले की नए सिरे से जांच का आश्वासन दिया है।

जज के पति ने बताया कि जब उन्हें चोरी हुई उनकी कार की ओवर स्पीडिंग का चालान थमाया गया तब वह हैरान थे। अब उन्होंने अपनी चोरी हुई कार की तस्वीर और चालान की रसीद जांच अधिकारी को सौंपी है और इस मामले में सही जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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