प्री-स्कूल में न ली जाए बच्चों की परीक्षा, इस तरह हो मूल्यांकन: NCERT

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 14 Oct 2019 03:11 PM IST
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प्री-स्कूल में बच्चों की लिखित या मौखिक, किसी तरह की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। यह एक ऐसी प्रथा है जिसके कारण बच्चों की छोटी उम्र से ही अभिभावक उनसे अलग-अलग अपेक्षाएं रखने लगते हैं। ऐसा करना नुकसानदेह हो सकता है। ये कहना है राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) का। 
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD Ministry) के तहत एनसीईआरटी पाठ्यक्रम बनाने, विकसित करने व इनमें बदलाव करने का कार्य करता है। इस परिषद ने कहा है कि प्री स्कूल के दौरान होने वाले मूल्यांकन से किसी बच्चे पर पास या फेल का टैग नहीं लगाया जाना चाहिए।
एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने कहा कि 'अभी हमारे देश में प्री-स्कूल की व्यवस्था इस तरह बनी हुई है कि छोटी उम्र से ही बच्चों पर सीखने के औपचारिक तरीके थोप दिए जाते हैं। उन्हें अंग्रेजी सीखने, होमवर्क और टेस्ट देने का तनाव रहता है। ये सही नहीं है।'
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इसके लिए एनसीईआरटी ने एक सूची (Guidelines for pre-school education) तैयार की है। इसमें बताया है कि प्री-स्कूल में बच्चों का मूल्यांकन करने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

क्या दिए गए हैं निर्देश

  • एनसीईआरटी ने जो दिशानिर्देश तैयार किए हैं, उनमें मूल्यांकन के कई तरीकों का जिक्र किया गया है। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं - 
  • हर बच्चे के मूल्यांकन के लिए अलग चेकलिस्ट, पोर्टफोलियो और दूसरे बच्चों के साथ उनके संवाद व घुलने-मिलने के तरीकों को आधार बनाया जाना चाहिए।
  • शिक्षकों को बच्चों की गतिविधियां परख कर उनके अलग-अलग नोट्स बनाने चाहिए। कैसे कोई बच्चा समय व्यतीत कर रहा है, भाषा का किस तरह उपयोग कर रहा है, उसके स्वास्थ्य और पोषण की आदतें क्या हैं व अन्य बातों को परखा जाना चाहिए।
  • हर बच्चे का एक फोल्डर बनाया जाए, जिसमें उसकी पूरी जानकारी हो। वह फोल्डर बच्चे के अभिभावकों को भी दिखाया जाए। 
एनसीईआरटी ने इन दिशानिर्देशों में प्री-स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ की सैलरी, उनकी शिक्षा, प्रवेश प्रक्रिया समेत अन्य बातों का भी जिक्र किया गया है।
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