बॉलीवुड फिल्मों के ऐसे हिट डायलॉग्स, जिनसे सुपरहिट हुए एक्टर और फिल्में

विनोद अनुपम / फिल्म समीक्षक Updated Sun, 17 Dec 2017 01:39 PM IST
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आज खुश तो बहुत होगे तुम। देखो, जो आज तक तुम्हारे मंदिर की सीढियां नहीं चढ़ा। जिसने आज तक तुम्हारे सामने सिर नहीं झुकाया। जिसने आज तक कभी तुम्हारे सामने हाथ नहीं जोड़े, वो आज तुम्हारे सामने हाथ फैलाए खड़ा है। बहुत खुश होगे तुम। बहुत खुश होगे कि आज मैं हार गया, लेकिन तुम जानते हो कि जिस वक्त मैं यहां खड़ा हूं, वो औरत जिसके माथे से तुम्हारे चौखट का पत्थर घिस गया, वो औरत जिस पर जुल्म बढ़े, तो उसकी पूजा बढ़ी, वो औरत जो जिंदगी भर जलती रही, लेकिन तुम्हारे मंदिर में दीप जलाती रही, वो औरत। वो औरत, आज जिंदगी और मौत के सरहद पर खड़ी है। और ये तुम्हारी हार है।’ 1975 में आई ‘दीवार’ के इस संवाद पर हमने न जाने कितनी बार तालियां बजाईं होंगी, याद नहीं कर सकते। 
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यह जानते और मानते हुए भी इस तरह और इस शैली में वास्तविक जिंदगी में कोई बात नहीं करता, हम खुश होते थे कि कोई तो है, जो ईश्वर को चुनौती दे रहा है। हम मान कर चलते थे कि वह सिनेमा है। वहां ऐसा ही कुछ होना है। जिंदगी से बड़ी, जिंदगी से अलग। 2017 की शुरुआत में आई ‘रईस’ में शाहरुख खान जब बोलते हैं, ‘जो धंधे के लिए सही, वो सही, जो धंधे के लिए गलत, वो गलत, इससे ज्यादा कभी सोचना नहीं।’ 
वहीं ‘बादशाहो’ में इमरान बोलते हैं, ‘ये जो समय है न, ये सबकी लेता है, समय समय पर, सही समय पर, सही तरह से लेता है’, तब महसूस होता है, उस पात्र के लिए वही भाषा और वही संवाद सटीक है। वह अपने पात्र से इतर बड़ी बातें नहीं करता। 
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समय के साथ हिन्दी सिनेमा में हुए ढेर सारे बदलाव

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