महाराष्ट्र सरकार के निर्देश से बॉलीवुड में खलबली, इफ्टडा की बुजुर्ग कलाकारों को अनुमति देने की मांग

अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Updated Tue, 02 Jun 2020 04:11 PM IST
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शूटिंग - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

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हिंदी फिल्म और टेलीविजन धारावाहिकों के निर्देशकों की यूनियन ने महाराष्ट्र सरकार से उस निर्देश में बदलाव की मांग की है जिसमें कहा गया है कि कोरोना से बचाव के लिए 65 साल से ऊपर के तकनीशियनों व कलाकारों को शूटिंग स्थल से दूर रखा जाए। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने ये निर्देश फिल्म इंडस्ट्री के कामगारों की फेडरेशेन की सलाह पर ही जारी किए हैं।
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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि इसके कामगारों की फेडरेशन और इसकी दूसरी यूनियनें कभी एक सुर में बात नहीं कर पातीं। फेडरेशन महीने भर से शोर मचा रही है कि कोरोना काल में दोबारा शूटिंग जब शुरू हो तो 65 साल से ऊपर के कलाकारों को कम से कम तीन महीने तक शूटिंग स्थलों से दूर रखा जाए। महाराष्ट्र सरकार ने उनकी ये बात मान ली तो अब निर्देशकों की यूनियन परेशान है कि ऐसा होने से तो उसके तमाम सदस्य शूटिंग ही नहीं शुरू कर पाएंगे। यही नहीं अमिताभ बच्चन समेत इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज कलाकार भी 65 से ऊपर के ही हैं।
मुंबई और आसपास के इलाकों में बनने वाली फिल्मों में काम करने वालों की अलग अलग यूनियनों की एक फेडरेशन है। इस फेडरेशन के मुख्य सलाहकार हैं फिल्म निर्देशक अशोक पंडित। अशोक पंडित ही भारतीय फिल्म एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन (इफ्टडा) के भी अध्यक्ष हैं। फेडरेशन ने फिल्मों व टीवी की शूटिंग दोबारा शुरू करने के लिए जो जरूरी शर्तें बनाईं, उनमें एक शर्त ये भी शामिल है कि 65 साल से ऊपर के कलाकारों को कम से कम तीन महीने तक शूटिंग स्थलों से दूर रखा जाए।
उधर, इफ्टडा ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे अपने पत्र में कहा है कि अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, परेश रावल, अन्नू कपूर, नसीरुद्दीन शाह, धर्मेंद्र, शक्ति कपूर, मिथुन चक्रवर्ती, पंकज कपूर, जैकी श्रॉफ, डैनी, दलीप ताहिल, टीनू आनंद आदि तमाम कलाकार 65 साल से ऊपर हैं। यहीं नहीं 65 साल से ऊपर के निर्देशकों के नाम भी इफ्टडा ने इस पत्र में अनिल शर्मा, डेविड धवन, सुभाष घई, श्याम बेनेगल, मणि रत्नम और प्रकाश झा आदि के रूप में गिनाए हैं।

इन सबको शूटिंग शुरू होने के दिन से काम करने की अनुमति मांगने के अलावा इफ्टडा ने हर लोकेशन पर डॉक्टर और नर्स की तैनाती को भी अव्यवहारिक बताया है। एसोसिएशन के मुताबिक मुंबई में वैसे ही स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है, ऐसे में बजाय हर लोकेशन पर इनकी तैनाती के इनकी उपलब्धता इलाकों के हिसाब से रखी जानी चाहिए।

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