'जय संतोषी मां' देखने जूते-चप्पल उतारकर जाते थे दर्शकः उषा मंगेशकर

चंडीगढ़/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 22 Feb 2013 10:58 AM IST
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स्वर कोकिला लता मंगेशकर की बहन और प्रसिद्ध गायिका उषा मंगेशकर का कहना है कि लोगों को भक्ति संगीत अभी भी उतना ही पसंद है जितना पहले। उन्होंने बताया कि उनके जय संतोषी मां के गीतों को इतना पसंद किया गया था कि लोग जब फिल्म देखने जाते थे तो अपने जूते-चप्पल बाहर निकाल देते थे। उषा ने उम्मीद जताई कि आने वाला समय गीत और संगीत के साथ गायकों के लिए भी पहले जैसा ही सुरीला होगा।
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वे लीजेंडरी मुकेश म्यूजिकल आर्ट्स एंड कल्चरल सोसायटी (लेमेक्स) द्वारा अमर उजाला के सहयोग से शुक्रवार शाम आयोजित होने वाले ‘ओल्ड मेलोडीज’ कार्यक्रम के लिए चंडीगढ़ पहुंचीं।


मीडिया से बातचीत में उषा मंगेशकर ने कहा कि फिलहाल आइटम सांग का जमाना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गीत और संगीत का पुराना सुनहरा दौर खत्म हो गया है। म्यूजिक इंडस्ट्री और गायकों के लिए आने वाला समय स्वर्णिम होगा, एकबार फिर से क्लासिकल और कर्णप्रिय संगीत का जमाना लौटेगा।

उन्होंने कहा कि इस समय के गायकों में शान, केके के साथ श्रेया घोषाल की आवाज में जादू है। ये तीनों ही म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब फिल्मों में गीत होते ही कहां हैं, जो गीत हैं भी वह आइटम नंबर से प्रेरित हैं। पांच साल पहले की बात याद करते हुए उन्होंने कहा कि सलिल चौधरी, मदन मोहन और नौशाद जी के संग काम करना उनको सबसे ज्यादा अच्छा लगा।

अपलम चपलम में डरी थीं दीदी
अपने कैरियर का पहला गीत अपलम चपलम की याद करते हुए उन्होंने कहा कि अपलम चपलम के दौरान वह तो नहीं डरीं थीं, हां दीदी लता मंगेशकर जरूर थोड़ा परेशान थीं कि वह कैसा गाएंगी। फिर गीत जब हिट हुआ तो सबने पसंद किया।

क्लासिकल की ट्रेनिंग है जरूरी
उषा मंगेशकर ने कहा कि गायकी की आधारशिला क्लासिकल ही है। बच्चों के लिए शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग सबसे ज्यादा आवश्यक है। नए गायक आ रहे हैं और उनको नाम और प्रसिद्ध की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। ऐसे में रियलिटी शो एक अच्छा प्लेटफार्म है। उन्होंने बताया कि लता मंगेशकर ने भी एलएम म्यूजिक के नाम से कंपनी खोली है जिसके अंतर्गत कई रिकार्ड्स लांच किए जा चुके हैं। इसमें शिव तांडव, महामृत्युंजय, हनुमान चालीसा आदि प्रमुख हैँ। उनकी कंपनी रियलिटी शो की प्लानिंग कर रही है, जिसके जरिए वह युवा टैलेंट को सामने लाने की प्लानिंग कर रहे हैं।

गायिका न होती तो पेंटिंग करती
उषा मंगेशकर ने कहा कि अगर वह गायिका न होतीं तो पेंटिंग करतीं। उनकी पेंटिंग की थीम पोट्रेट रहती है क्योंकि मुंबई में लैंडस्केप का स्कोप ही नहीं है। उन्होंने अपनी पेंटिंग प्रदर्शनी कई बार मुंबई में लगाई है। उसको अच्छा रिस्पांस मिला है।

ठंडा पानी, इमली से कीजिए परहेज
उषा मंगेशकर ने कहा कि उनको ठंडा पानी और इमली से परहेज है। यह परहेज हरेक गायक को करना चाहिए। फिर गला हमेशा सुरीला रहेगा।

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