Vinay Shukla Long Interview: साहिर लुधियानवी ने मुझसे कहा, खड़े हो जाओ और फिर एकदम से गले लगा लिया..

Pankaj Shuklaपंकज शुक्ल Updated Sat, 31 Oct 2020 09:25 PM IST
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विनय शुक्ल
विनय शुक्ल - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

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राजस्थानी रियासत के दीवान के बेटे विनय शुक्ल की लिखी पहली ही फिल्म ‘परिणय’ ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। फिर, निर्देशक बने तो फिल्म ‘गॉडमदर’ ने छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत लिए। सिनेमा से उनकी दोस्ती बचपन की है। रेडियो, रंगमंच और सिनेमा का सफर तय करते करते विनय अब डिजिटल दौर में आ चुके हैं। नए सिनेगीरों को वह सिनेमा लिखना और बनाना सिखाते हैं। विनय शुक्ल से ‘अमर उजाला’ के लिए ये लंबी बातचीत की पंकज शुक्ल ने।
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सिनेमा के शुरूआती आकर्षण की आपकी यादें क्या हैं?
मैं बचपन में चाइल्ड रेडियो आर्टिस्ट था। स्कूल वगैरह पास करने के बाद जब मैं कॉलेज में आया तो मैं अभिनेता बनना चाह रहा था। हर आदमी की तरह मुझे भी अभिनय का ग्लैमर था। पिताजी राम नारायण शुक्ल रियासत के जमाने में किशनगढ़ के दीवान थे। बाद में वह राजस्थान की प्रशासनिक सेवा में आ गए। मैं कोई 17 -18  साल का था। खूब थिएटर करता था। अभिनय की तारीफ होती थी। मैं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय या पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट जाने की तैयारी में था पर पिताजी मेरे फैसले से खुश नहीं थे। लेकिन, उन्होंने मुझे रोका नहीं।
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