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28 मार्च 2020

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गोरखपुर

रविवार, 29 मार्च 2020

यहां शव का पोस्टमार्टम करने से डॉक्टर ने किया इनकार, वजह जानकर आपको भी लग जाएगा डर

कोरोना की दहशत का असर ऐसा है कि संदिग्ध शवों के पोस्टमार्टम से भी डॉक्टर डर रहे हैं। शुक्रवार को ऐसा ही मामला मेडिकल कॉलेज में सामने आया है।

पिपराइच क्षेत्र के हेमधापुर गांव निवासी रघुनाथ चौहान 23 मार्च को मुंबई से घर आया था। बृहस्पतिवार को अचानक खून की उल्टी होने के बाद मौत हो गई। गांव के लोगों ने कोरोना वायरस के संक्रमण होने की आशंका जताते हुए पिपराइच सीएचसी पर अधीक्षक डॉ नंदलाल कुशवाहा को सूचना दी।

डॉ नंदलाल कुशवाहा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही मौत की वजह बताने की बात बताई। शुक्रवार को युवक का पोस्टमार्टम कराने जब परिजन आए तो डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम करने में आनाकानी शुरू कर दी। डॉक्टरों को डर था कि युवक मुंबई से आया था। ऐसे में कही वह कोरोना वायरस से संक्रमित तो नहीं था।

इसके बाद परिजनों ने इसकी जानकारी आलाधिकारियों को दिए। आलाधिकारियों के वार्ता करके डॉक्टरों ने दो घंटे बाद पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह टीबी बताई गई। इस पर डॉक्टरों ने राहत की सांस ली है।
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Coronavirus: नौकरी तो नहीं मिली, बेरोजगारी में पुलिस ने कोरोना संदिग्ध समझकर भेजवाया अस्पताल

उत्तर प्रदेश के मऊ का रहने वाला एक युवक शहर में नौकरी के लिए आया था। युवक को नौकरी तो नहीं मिली लेकिन कोरोना का संदिग्ध बताकर उसे पुलिस ने अस्पताल जरूर भिजवा दिया।

पुलिस के डर की वजह से युवक बिना कुछ कहे एंबुलेंस से इलाज के लिए अस्पताल भी आ गया। जांच के दौरान पूरी तरह से स्वस्थ्य निकला। जानकारी पर सीएमओ ने युवक को रैन बसेरे में रहने के लिए भिजवाया है।  मऊ का रहने वाला एक युवक 21 मार्च को गोरखपुर के एक होटल में नौकरी के लिए आया था। उस दिन बात नहीं बनी अगले दिन जनता कर्फ्यू हो गया।

इसके बाद 23 मार्च से लॉकडाउन में युवक फंस गया और उसके पास जाने के रुपये तक नहीं। शुक्रवार को वह शहर में घूम रहा था। पुलिस की नजर पड़ी तो पूछताछ शुरू किया। जैसे ही युवक ने मऊ का जिक्र किया तो पुलिसकर्मियों ने 108 नंबर एंबुलेंस पर फोन करके यह सूचना दी कि कोरोना का मरीज घूम रहा है।

सूचना पर आनन-फानन पर एंबुलेंस कर्मी पीपीई किट पहनकर पहुंचे और जांच के लिए जिला अस्पताल लेकर गए। जहां पर जांच के दौरान युवक को कोई भी बीमारी नहीं मिली। इस पर लोगों ने राहत की सांस ली और इसकी सूचना सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी को दी।

सीएमओ ने युवक के रहने और खाने की व्यवस्था कराते हुए उसे रैन बसेरे में भेजवाया। युवक ने बताया कि बिना बात के पुलिस ने जांच के लिए एंबुलेंस से भेजवा दिया। पुलिस की डर की वजह से मजबूरन आना पड़ा।
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महराजगंज: लॉकडाउन के दौरान नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लाया गया सोनौली

भारत नेपाल सीमा सोनौली बॉर्डर के नेपाली सीमा में फंसे सौ भारतीय नागरिकों को वापस लाया गया। यह सभी भारतीय नागरिक बीते चार दिनों से नेपाल के सीमा में फंसे हुए थे। इस दौरान उन्हें खाने, पीने, रहने सहित कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। भारतीय नागरिकों के फंसने की जानकारी जनपद महराजगंज जिला प्रशासन को हुई तो उच्चाधिकारियों से वार्ता कर एसडीएम नौतनवा और क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में सभी को नेपाल से लाकर भारतीय सीमा सोनौली के एक गेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया है। साथ ही प्रशासन ने उनके रहने खाने की पूरी व्यवस्था की।

बीते 22 मार्च से भारत नेपाल की सीमा सील होने के बाद सभी यात्री नेपाल में फंस गए थे। इस दौरान में भी कोरोना वायरस को लेकर नेपाल सरकार ने भी लॉकडाउन लागू कर दिया। शुक्रवार रात करीब 12 बजे एसडीएम नौतनवा जसधीर सिंह यादव और क्षेत्राधिकारी नौतनवा राजू कुमार साव और एसएसबी सहायक सेनानायक संजय प्रसाद के नेतृत्व में नेपाल में फंसे करीब एक सौ भारतीय नागरिकों को नेपाल से निकाल कर अपने वतन लाया गया।

जिसमें महिला पुरुष और बच्चे भी शामिल हैं। यह सभी लोग भारत और नेपाल में लॉकडाउन के बाद से परेशान थे। खाने पीने और रहने में  समस्या हो रही थी l जिन्हें सोनौली बॉर्डर के एक गेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी ने बताया कि सभी भारतीय यात्रियों को नेपाल से लाकर भारतीय सीमा में सोनौली के गेस्ट हाउस मे शिफ्ट कर दिया गया है। यहां इनके रहने खाने पीने की सभी व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने बताया कि चेन्नई, गोरखपुर, बस्ती सहित कई प्रदेश के भारतीय नागरिक हैं। जिनकी जांच के बाद इन्हें रहने की सुविधा दी गई है l
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Gorakhpur LockDown: सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं लोग, छूट मिलते ही सड़क पर उमड़े, तस्वीरों में देखें पल-पल की अपडेट

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कोरोना: 94 बंदी आठ हफ्ते के पैरोल पर मंडलीय कारागार से किए गए रिहा

कोरोना के बढ़ते प्रकोप की वजह से मंडलीय कारागार में बंद 94 बंदियों को शनिवार की देर रात आठ हफ्ते के पैरोल पर रिहा कर दिया। सरकार से आदेश आने के बाद जेल प्रशासन ने देर शाम कोर्ट से अंतरिम जमानत लिया। जिसके बाद जेल प्रशासन ने जिला प्रशासन से गाड़ी मंगाकर देर रात दस बजे पुलिस सुरक्षा में इन्हें इनके घर के लिए रवाना किया।

प्रदेश की सभी जेलों में इस समय क्षमता से दोगुने बंदी और कैदी हैं। मंडलीय कारागार में भी क्षमता करीब 850 की है जबकि वर्तमान समय में करीब सत्रह सौ बंदी हैं। जिससे बंदियों में कोरोना फैलने का खतरा था। 

जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के साथ ही प्रदेश के सभी जेलों से सात साल से कम सजा वाले कैंदियों, बंदियों और आदर्श बंदियों को पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद डीजी जेल ने सभी जेलों से ऐसे बंदियों और कैदियों की सूची मांगी थी।

गोरखपुर जेल प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व सात साल की सजा पा चुके 27 सजायाफ्ता कैदियों, सात साल से कम सजा के अपराध वाले आरोप में बंद 167 विचाराधीन बंदियों और हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे तीन आदर्श कैदियों (जिनकी उम्र साठ वर्ष से ज्यादा हो चुकी है) सुदामा, वंशबहादुर और शेषनाथ की सूची भेजी थी। 

जिसके बाद शनिवार की दोपहर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के ग्यारह हजार बंदियों की घोषणा की थी। जिसमें गोरखपुर के 141 बंदियों को छोड़ने की अनुमति मिली। आदेश मिलने के बाद जेल प्रशासन ने कोर्ट से आठ सप्ताह के लिए इन बंदियों की अंतरिम जमानत मांगी। 

देर शाम सात साल से कम सजा वाले अपराध के आरोप में बंद 93 विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत मिल सकी। जिसके बाद जेल प्रशासन ने इन बंदियों को उनके घर पहुंचाने के लिए प्रशासन से गाड़ियां मांगी। 

प्रशासन से गाड़ियां मिलने के बाद देर रात दस बजे इन्हें जेल से रिहाकर घरों के लिए पुलिस सुरक्षा में रवाना किया गया। सोमवार को एक बार फिर कोर्ट के बैठने पर अन्य बंदियों व सजायाफ्ता कैदियों की रिहाई होने की संभावना है।
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छींकने खांसने से ही नहीं तेज हंसने से भी फैल सकता है कोरोना वायरस, ऐसे करें खुद का बचाव

कोरोना वायरस से संक्रमित के हाथ मिलाने, संपर्क में आने, छींकने से ही नहीं, उसके जोर-जोर हंसने से भी आसपास मौजूद लोगों में संक्रमण फैल सकता है।  भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक हालिया शोध में यह नया तथ्य सामने आया है।

अगर संक्रमित व्यक्ति ने मास्क नहीं लगाया और कहीं हंसा तो भी उसके एक मीटर के दायरे में सैनिटाइजेशन आवश्यक है। इसलिए डॉक्टर संक्रमित और स्वस्थ दोनों के मास्क लगाने पर जोर दे रहे हैं।

रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर गोरखपुर (आरएमआरसी ) के निदेशक डॉ रजनीकांत ने बताया कि भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद  (आईसीएमआर) के शोध में यह बात सामने आई है कि अगर कोरोना से संक्रमित व्यक्ति जोर से हंसता है तो वायरस फैलाने का खतरा ज्यादा है।
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कुशीनगर: बाहर से आ रहे लोगों को लेकर गांववालों ने लिया ये खास फैसला, आप भी कहेंगे- 'सही है'

लॉकडाउन के चलते विदेश व देश के दूसरे शहरों से अपने गांव लौट रहे लोगों की सूची सार्वजनिक होगी। ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव इनके नाम की सूची गांव में ही सार्वजनिक जगह पर चस्पा करेंगे। इन लोगों की मेडिकल टीम जांच करेगी। इसके अलावा प्रत्येक गांव को सैनिटाइज भी किया जाएगा। इसके लिए ब्लीचिंग पाउडर अथवा सोडियम हाइड्रो क्लोराइड का छिड़काव कराया जाएगा।

कुशीनगर जिले से बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में देश व दुनिया के दूसरे हिस्सों में हुए थे। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण व लॉक डाउन के चलते अब वे लोग या तो अपने घर वापस आ चुके हैं अथवा आ रहे हैं। ऐसे लोगों से स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलने का खतरा सर्वाधिक है। इसको देखते हुए प्रशासन जगह-जगह इनकी जांच करा रहे हैं।

इसके अलावा अब गांवों में भी इनकी सूची बनाई जा रही है, जिससे कि ऐसा एक भी व्यक्ति न छूटे। डीपीआरओ राघवेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इसके लिए सभी ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देशित किया गया है। गांव में बनी इस सूची को सार्वजनिक स्थान पर ही चस्पा किया जाएगा, जिससे कि गांव के सभी लोगों को इनके विषय में जानकारी हो।
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देवरिया: बेटी से छेड़खानी का पिता ने किया विरोध, नाराज मनबढ़ ने दी ऐसी सजा

coronavirus
पहले मनबढ़ युवक ने किशोरी संग छेड़खानी किया फिर उलाहना देने गए किशोरी के पिता की पिटाई कर दिया। मामला गौरीबाजार थानाक्षेत्र के एक गांव का है। घायल पिता का जिला अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। पीड़ित ने गौरीबाजार पुलिस को सूचना दे दी है, लेकिन कोई भी आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा है।

गौरीबाजार थानाक्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 14 साल की किशोरी शुक्रवार को किसी काम से गांव के बाहर गई थी। किशोरी को अकेले देखकर गांव के ही मनबढ़ युवक ने छेड़खानी कर दिया। किसी तरह उनके चंगुल से बचकर घर पहुंची किशोरी ने परिवारवालों को आपबीती बताई।

इसके बाद किशोरी के परिवार के लोग युवक के परिवारवालों से उलाहना देने पहुंचे। वहां दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। गांववालों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। शुक्रवार की देर शाम किशोरी के पिता गांव के समीप के चौराहे से लौट रहे थे। उसी दौरान मनबढ़ युवक ने अपने साथियों संग गोलबंद होकर किशोरी के पिता पर हमला बोल दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

 सूचना मिलने पर परिवारवाले उन्हें सीएचसी ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। यहां उसका उपचार चल रहा है। इस बाबत गौरीबाजार थाना प्रभारी विजय सिंह गौर ने बताया कि जानकारी मिली है। पीड़ित का उपचार कराया जा रहा है। मामले में केस दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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लॉकडाउन: केरल में फंसे है गोरखपुर जिले के कई लोग, लगा रहे हैं मदद की गुहार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के जंगल कौड़िया ब्लाक के उतरा शोध गांव के 50 से अधिक मजदूर रोजी रोटी की तलाश में घर बार छोड़कर केरल गए थे। कोरोना वायरस के कारण किए गए लॉकडाउन में ये लोग फंस गए हैं। ऐसे में वे मदद की गुहार लगा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह सभी मजदूर पेंट पॉलिश का काम करते हैं। लॉकडाउन होने के बाद जो कुछ भी पैसा था वह 2-3 दिन में ही खत्म हो गया है। इन लोगों ने अपना एक वीडियो अपने परिजनों को भेजा है, जिसमें उन्होंने सीएम योगी से मदद की गुहार लगाई है।

इस बात की जानकारी जब परिजनों को हुई तो हर कोई परेशान हो उठा गया। घर के लोग नेताओं से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है।

 
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Gorakhpur LockDown: मनौती पूरा होने पर पहुंचे थे बुढ़िया माता मंदिर, लॉकडाउन के बाद अब ऐसे बीता रहे दिन

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के खोराबार के वनटांगिया आमबाग नर्सरी निवासी असीम के घर पर संतकबीरनगर व बस्ती के 15 लोग लॉकडाउन की वजह से फंसे हुए हैं। बीते 21 मार्च को ये सभी असीम की पौत्री के जन्म की मनौती पूरी होने पर बुढ़िया माता मंदिर पर आयोजित घंटा बांधने के कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। लेकिन जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन की वजह से घर वापस नहीं जा पाए।

फिलहाल ये सभी असीम के इंदिरा आवास में ही रहने को मजबूर हैं। असीम के घर में पहले से उनके सात सदस्य हैं। उपर से ये पंद्रह लोग, लिहाजा सभी के सामने खाने का संकट आ गया। असीम ने ग्राम प्रधान मुन्ना सिंह से गुहार लगाई तो उन्होंने चालीस किलो अनाज और कुछ आर्थिक मदद की, लेकिन वो भी नाकाफी है।

उधर प्रधान ने इसकी सूचना डीएम को भी दी है। डीएम के निर्देश के बाद लेखपाल सहित अन्य कर्मचारी असीम के घर पहुंचे और जानकारी जुटाई। प्रधान ने शनिवार को दुबारा डीएम से फोन पर बात की तो उन्होंने पास की अनुमति के लिए लिखित पत्र देने को कहा है।

जानकारी के अनुसार आमबाग निवासी असीम मजदूरी करते हैं। उसके घर में सात सदस्य हैं। उन्होंने पौत्री के लिए बुढिया माता मंदिर में मन्नत मांगी थी। बीस फरवरी को पौत्री का जन्म हुआ। जिसके बाद उन्होंने मन्नत पूरा होने की खुशी में बुढ़िया माता मंदिर में घंटा बांधने का कार्यक्रम रखा था।

उसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बीते 21 मार्च को संतकबीरनगर व बस्ती के 15 रिश्तेदार आए थे। रिश्तेदारों में अधिकांश महिला और बच्चे हैं। इस दौरान जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन की वजह से सभी लोग वापस नहीं जा पाए। ये सभी असीम के इंदिरा आवास के छोटे से मकान में रहने को मजबूर है। मजदूरी बंद होने से असीम के लिए अपने परिवार के सदस्यों और सभी रिश्तेदारों का पेट भरना मुश्किल हो गया।है।

 
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महराजगंज: सप्ताह भर में विदेश से आए 182 लोग, शहर में हड़कंप

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सभी बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में तैनात कर्मियों से विदेश से आने वाले लोगों की सूचना भी एकत्र कराई जा रही है। सूचना के मुताबिक सप्ताह भर में कुल 182 लोग विदेश से जिले में लौटे हैं, इनमें से सर्वाधिक 119 लोग सऊदी अरब से आए हुए हैं।

विदेशों से जिले में लौटे लोगों के बारे में सूचना एकत्र कराई गई तो 20 से 24 मार्च के बीच कुल 182 लोगों के विदेश से आने की सूचना मिली। इनमें से सर्वाधिक 119 लोग सऊदी अरब से, 22 लोग दुबई से, 19 लोग नेपाल से, चार-चार लोग कतर व मलेशिया से, तीन-तीन लोग ओमान व अन्य देश से तथा दो-दो लोग इराक, कुवैत, श्रीलंका व दक्षिण अफ्रीका से आए हैं।

आने वाले लोगों के नाम व पता सहित सूची जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी कृष्ण बहादुर वर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायतों द्वारा प्राप्त हो रही सूचना से प्रशासन को अवगत भी कराया जा रहा है जिससे कि बाहर से आए लोगों की जांच आदि भी सुनिश्चित हो सके।

परतावल ब्लॉक में आए सर्वाधिक 28 लोग
सप्ताह भर की अवधि मे विदेश से जो 182 लोग जिले में आए हैं उनमें सर्वाधिक 29 लोग परतावल ब्लॉक के, 28 लोग सदर ब्लॉक के, 27 लोग फरेंदा ब्लॉक के, 26 लोग सिसवां ब्लॉक के, 24 लोग निचलौल ब्लॉक के, 14 लोग पनियरा ब्लॉक के, 17 लोग मिठौरा ब्लॉक के, पांच लोग नौतनवां ब्लॉक के, चार लोग लक्ष्मीपुर ब्लॉक के, तीन-तीन लोग घुघली व बृजमनगंज ब्लॉक के तथा दो लोग धानी ब्लॉक के हैं।
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सीएम योगी के अस्पताल में भी होगा कोरोना का इलाज, जानें कितने बेड का है खास इंतजाम

कोरोना वायरस की चुनौतियों से निपटने के लिए गोरखपुर में लॉकडाउन के दौरान उत्तर के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धर्मस्थल गोरखनाथ मंदिर द्वारा बनाए गए, गोरखनाथ चिकित्सालय में को कोरोना वायरस के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही कोरोना से लड़ने के लिए मां पटेश्वरी शक्तिपीठ मंदिर में भी हॉस्पिटल तैयार किया गया है।  

गौरतलब है कि कोरोना वायरस की चुनौतियों से निपटने के लिए गोरखपुर में लॉकडाउन के दौरान गोरखनाथ मंदिर और बलरामपुर देवीपाटन, तुलसीपुर की मां पटेश्वरी शक्तिपीठ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद कर दी गई है।

ऐसे में महामारी के चलते लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में जिन लोगों का रोजगार छीन गया है, उनके लिए प्रशासन भोजन, दवा आदि की व्यवस्था कर रही है। वहीं गोरखनाथ मंदिर व मां पटेश्वरी शक्तिपीठ मंदिर के न्यास भी मजबूर लोगों को भोजन का पैकेट उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

साथ ही गोरखनाथ मंदिर न्यास की ओर से संचालित गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय में तीन सौ बेड व दस आईसीयू वेंटिलेटर के साथ उपलब्ध है। वहीं देवीपाटन मंदिर न्यास के पास भी पचास बेड का हॉस्पिटल तैयार है। इन दोनों चिकित्सालयों को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
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