Exclusive: गोरखपुर में जीडी का चमत्कार, 168 साल से नहीं सोई थानों में तैनात पुलिस

शिवम सिंह, गोरखपुर Updated Sat, 18 Jan 2020 01:23 PM IST
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police - फोटो : file photo

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सुनने पर आश्चर्य होगा, मगर थाने की जनरल डायरी (रोजनामचा) के मुताबिक थाने की पुलिस 168 साल से नहीं सोई है। दरअसल, जीडी (जनरल डायरी) में थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की सभी गतिविधि मसलन रवानगी-आमद दर्ज होती है, उसके हिसाब से देखें तो वे थाने के काम से बाहर जाते हैं, और काम निपटा कर वापस आ जाते हैं। 168 साल से चौबीसों घंटे यही क्रम चल रहा है।
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घड़ी की सुईयों के हिसाब से संचालित यह जीडी यही कहती है कि थाने में तैनात पुलिस चौबीसों घंटे काम करती है, 1861 में पुलिस एक्ट लागू होने के बाद से वह कभी सोई नहीं। कभी भी घटना होने पर आना होता है, लिहाजा रात में ड्यूटी खत्म होने के बाद जब पुलिस वाले जाते हैं तो यही दर्ज करते हैं कि वे सरकारी काम से जा रहे हैं। इनका कोई साप्ताहिक अवकाश होता नहीं है।
1861 में पुलिस एक्ट लागू होने के बाद से ही यह परंपरा चली आ रही है, जिसमें बदलाव की जहमत कोई नहीं करता है। एक बार सपा सरकार में इसमें बदलाव की कोशिश की गई और साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था का आदेश हुआ था। उस दौरान जीडी में यह परंपरा टूट सकती थी, लेकिन ना तो उस आदेश पर अमल हुआ और ना ही परंपरा टूटी। अगर छुट्टी होती तो यह परंपरा टूटती।
गुडवर्क से शुरू करते हैं जीडी
किसी भी नए थाने की शुरूआत पर जीडी में सबसे पहले गुडवर्क अंकित होता है। किसी अभियुक्त को पकड़कर अरेस्ट करना या फिर कोई ऐसा कार्य दर्ज करना जिससे पुलिस का मान बढ़े। दूसरे नंबर पर सीआरपीसी के तहत केस दर्ज किए जाते हैं, तीसरे नंबर आईपीसी के मुकदमे लिखे जाते हैं। नए साल की शुरूआत में नई जीडी में सबसे पहले गुडवर्क दर्ज करने का टोटका आज भी सालों से बदस्तूर जारी है।
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