बीमा पॉलिसी में नॉमिनी के नाम का स्पष्ट तौर पर करें उल्लेख

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 03 Aug 2020 11:40 PM IST
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बीमा पॉलिसी में नॉमिनी के नाम का स्पष्ट तौर पर करें उल्लेख
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गोरखपुर। किसी भी बीमा पॉलिसी धारक को अपने नॉमिनी का नाम स्पष्ट तौर पर उल्लेख करना चाहिए। अन्यथा पॉलिसी धारक की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को परेेेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। बीमा दफ्तर ही नहीं, अदालत के चक्कर लगाने की नौबत तक आ सकती है।
नॉमिनेशन सामान्य रूप से स्पष्ट करता है कि पॉलिसी धारक की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो जाने की स्थिति में दावा राशि का भुगतान किसे किया जाना चाहिए। नॉमिनेशन नहीं होने की स्थिति में पॉलिसी धारक के परिवार के सदस्यों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। नॉमिनेशन न होने की स्थिति में आम तौर पर बीमा कंपनी द्वारा दावेदार से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगा जाता है। ये प्रमाणपत्र अदालत की ओर से जारी किए जाते हैं। अधिकतर मामलों में इन प्रमाणपत्रों को प्राप्त करना थकाऊ प्रक्रिया है। प्रस्तावना चरण के दौरान नॉमिनेशन का ख्याल रखकर इस झंझट से छुटकारा पाया जा सकता है।
नॉमिनी का कानूनी रूप से उत्तराधिकारी होना भी जरूरी
नॉमिनी को कानूनी रूप से उत्तराधिकारी होना चाहिए, अन्यथा नॉमिनेशन वैध नहीं होगा। कानून के मुताबिक, नॉमिनी में पॉलिसी धारक के माता-पिता, पति/पत्नी व बच्चे आते हैं। इसलिए नॉमिनेशन भरते समय आपको नॉमिनी के नाम व उसके साथ संबंध (पत्नी/पति, पुत्र/पुत्री, माता/पिता) का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए। नामिनी पत्नी है तो पत्नी लिखें, पति है तो पति लिखें। जीवनसाथी न लिखें। इसी तरह नॉमिनी माता हैं तो माता लिखें, पिता हैं तो पिता लिखें, इन्हें अभिभावक न लिखें। पुत्र या पुत्री के मामले भी ऐसा ही करना चाहिए, जिन्हें महज संतान लिखना सही नहीं होगा।
बीमा एडवाइजर अनिरुद्ध कुुमार गुप्ता के टिप्स
पॉलिसी और नॉमिनेशन के विषय में नॉमिनी या परिवार के किसी अन्य सदस्य को बताएं, ताकि आपकी अनुपस्थिति में वे बीमित राशि का सर्वश्रेष्ठ तरीके से उपयोग कर सकें।
-पॉलिसी की अवधि के दौरान नॉमिनी की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो जाने की स्थिति में नया नॉमिनी बनाना भी जरूरी है। ऐसी स्थिति में बीमा कंपनी को वैकल्पिक नॉमिनी के बारे में सूचित किया जाना चाहिए।
-एक से अधिक नॉमिनी रखना आम तौर पर जटिल होता है। इससे कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो सकता है। बीमा कंपनी अन्य नॉमिनी की सहमति पर एक नॉमिनी को ही बीमा राशि देना पसंद करती है। हालांकि विभिन्न नॉमिनी के बीच सहमति जताए जाने के बावजूद विवाद खड़ा हो सकता है।
-एक से अधिक उत्तराधिकारी होने की दशा में बीमा कंपनी की ओर से संयुक्त डिस्चार्ज स्टेटमेंट, कानूनी सबूत व इंडेम्निटी बांड मांगा जाएगा। ये दस्तावेज दावे के निपटान के समय किसी प्रकार की विवाद की स्थिति में बीमा कंपनी के हितों को सुरक्षित रखते हैं।
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