इस महिला की कहानी जानकर नम हो जाएंगी आखें, आप भी करेंगे इनके जज्बे को 'सलाम'

फरीद सल्फी, सेमरहना (सिद्धार्थनगर)। Updated Mon, 05 Oct 2020 11:57 AM IST
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अपने बच्चे के साथ आभा।
अपने बच्चे के साथ आभा। - फोटो : अमर उजाला।

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उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के लोटन क्षेत्र की आभा पांडेय बचपन में दिव्यांग हुईं, विवाह के कुछ ही दिन बाद दिव्यांग पति को खोया। इसके बाद भी आभा ने साहस और धैर्य को नहीं खोया। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं। अब बच्चे के साथ जीविकोपार्जन करने में जुटी हैं। उनके जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है।
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बता दें कि लोटन क्षेत्र के करूआवल कला की रहने वाली आभा के जीवन में बचपन से ही मुसीबतों का दौर शुरू हो गया था। 25 सितंबर 1987 को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में रामविलास तिवारी के घर आभा पैदा हुईं। पांच साल की उम्र में ही आभा पोलियोग्रस्त हो गईं। पढ़ाई पूरी करने के बाद आभा की शादी लोटन के करूआवल कला के दिव्यांग रामकिशुन पांडेय से हुई।
रामकिशुन बहुत ज्यादा दिनों तक आभा का सहारा नहीं बन सके और उनका निधन हो गया। आभा का दुधमुंहा बच्चा और आभा बेसहारा हो गए। इसके बाद भी आभा ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने संघर्ष जारी रखा।
आर्थिक स्थिति बिगड़ती देखकर आभा स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह से 10 हजार सहायता राशि लेकर एक छोटा सा कॉस्मेटिक और जनरल स्टोर खोला। आर्थिक हालात सुधरे तो अपने जैसी परेशान महिलाओं को सबल बनाने में जुट गईं।

आभा ने क्षेत्र की महिलाओं को ब्यूटीशियन कोर्स कराया, कॉस्मेटिक उत्पादों के कारोबार की जानकारियां दीं। उनके कारण क्षेत्र की दस से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। आभा कहती हैं कि हालात से लड़ने की हिम्मत किताबें पढ़ने से मिली।
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