कोरोना वायरस: दुबक नहीं, सामने आ रहे हैं मेव, नूंह के 503 गांवों में 14 लाख की हुई जांच

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 16 Apr 2020 04:37 PM IST
विज्ञापन
तब्लीग जमात
तब्लीग जमात - फोटो : पीटीआई (सांकेतिक)

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें

सार

  • मेवात के बदले हुए मुसलमान अब खुद सामने आ रहे, टोह भी दे रहे
  • 48 केस पॉजिटिव, उनका इलाज चल रहा है, 1033 के सेंपल लिए गए
  • घर-घर जांच शुरु हुई तो बाहर के केस भी मालूम होने लगे
  • इलाज में जहर का इंजेक्शन देंगे, यह कहकर डरा दिया था

विस्तार

कोरोना वायरस को लेकर मेवात अभी चर्चा में है। यहां का जिला नूंह रेड जोन में है। सप्ताह भर पहले दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज से आए लोगों के कारण यहां पर कोरोना के पॉजिटिव केसों की संख्या बढ़ गई थी। अभी 48 पॉजिटिव मरीज हैं।
विज्ञापन

लेकिन मेवात के मेव तेजी से बदल रहे हैं, जांच में सहयोग कर रहे हैं और छिपने की कोशिश करने वालों को सामने लाने में प्रशासन की मदद कर रहे हैं। प्रशासन की मेहनत इसीलिए रंग लाई है और नूंह जिले के 503 गांवों करीब 14 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।
एक हफ्ते पहले तक प्रशासन के माथे पर जो चिंता की लकीरें थीं, वे अब कुछ छंटने लगी हैं। कोरोना महामारी को लेकर यहां सचेत हो रहे हैं। मेव प्रशासन को ऐसी टोह भी दे रहे हैं, जिससे कि आगे 'कोरोना' की चेन तोड़ने में मदद मिलेगी।

503 गांव के 14 लाख लोगों की जांच हुई संभव

नूंह जिले के सीएमओ डॉक्टर वीरेंद्र यादव भी ये बात मानते हैं कि जिला प्रशासन, धर्म गुरुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बदौलत कोरोना को लेकर अब यहां के मुसलमान अपनी सोच बदल रहे हैं। इसी वजह से जिला प्रशासन 503 गांवों में 14 लाख की आबादी की जांच करने के लिए आगे बढ़ सका।
बतौर डॉ. यादव, अब हमने अधिकांश गांव कवर कर लिए हैं और 1033 लोगों के सेंपल ले चुके हैं। इनमें आधे से ज्यादा लोग तो मरकज वाले हैं। इन सबकी ट्रेवल हिस्ट्री ले रहे हैं। अभी 48 केस पॉजिटिव हैं, उनका इलाज चल रहा है। कुछ केस कॉन्टेक्ट वाले भी हैं। इक्का-दुक्का ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें उन लोगों ने पहले जानकारी छिपा ली।

जैसे अभी एक केस सामने आया है, जिसमें पति-पत्नी मुंबई से मेवात तक पैदल आ गए। वे खुद सामने नहीं आए। प्रशासन ने उन्हें खोज निकाला। अब उनकी जांच हो रही है। हालांकि पहले के मुकाबले अब मेवात के लोग सहयोग कर रहे हैं।

वे दूसरों के बारे में भी बताने लगे हैं कि फलां घर में भी कोई बाहर से आया है। कई घरों के लोग जो ट्रक डाइवर हैं और वे विभिन्न राज्यों की सीमा पर फंसे हैं, जिला प्रशासन को यह जानकारी मिल रही है। प्रशासन के लिए ये टोह बहुत मददगार साबित होगी। जब वे लोग आएंगे तो समय रहते उनकी जांच पड़ताल हो जाएगी।

घर-घर जांच शुरू हुई तो बाहर के केस भी मालूम होने लगे

उजीना गांव के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिंदी की प्राध्यापिका अनीता भी इस बात को मानती हैं कि अब कुछ बदलाव आ रहा है। निजामुद्दीन मरकज से आए लोगों की पहचान अब आसान होती जा रही है। स्थानीय लोगों ने इसमें प्रशासन का पूरा सहयोग दिया है।

गांव में सभी लोगों से कहा गया है कि वे बिना छिपाए ऐसी जानकारी प्रशासन को जरूर दें। इसमें नुकसान हमारा ही है। मेव समुदाय के लोगों ने भी कई तरह की जानकारियां प्रशासन के साथ साझा की हैं। घर-घर जांच से ऐसे केसों की जानकारी मिली जो इस इलाके के नहीं थे। लोग भी अब कुछ छिपा नहीं रहे हैं।

इलाज में जहर का इंजेक्शन देने की अफवाह

मेवात क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता माजिद भी बताते हैं कि लोग अब खुलकर सामने आ रहे हैं। वे अपने उन रिश्तेदारों की जानकारी भी दे रहे हैं, जो किन्हीं कारणों से बाहर कहीं पर ठहरे हैं। गांवों की नाकेबंदी है। कोई रिश्तेदार आया है तो गांव के अंदर नहीं आएगा।

मोबाइल पर बात कराकर उसे वापस जाने के लिए कहा जाता है। माजिद कहते हैं कि मरकज से लौटे लोगों को किसी ने गुमराह कर दिया। उन्हें बताया गया कि कोरोना तो खतरनाक बीमारी है, इसके लिए जहर का इंजेक्शन दिया जाता है।

इस अफवाह की वजह से कुछ लोग दुबके रहे। देवला नंगली गांव में टीचर अलीशेर कहते हैं, मेवातियों ने अब बाहरी लोगों की एंट्री बंद कर दी है। अब कोई छिपने की बात ही नहीं हो रही। प्रशासन जब घर आकर टेस्ट कर रहा है तो लोग अपनी केस हिस्ट्री भी बता देते हैं।

लोगों में जिस तरह की जागरूकता आई है, वह आने वाले दिनों में बेहतरी का संकेत देता है।

मेवात के मेव कौन हैं, इतिहास भी जान लीजिए

मेवात में रहने वाले मुसलमानों को मेव बोला जाता है। दरअसल ये मेव 11वीं सदी के राजपूत वंश से निकले हैं। इनमें कुछ जाट, गुर्जर और मीणा समुदाय के लोग भी हैं। बहुत से लोग खुद को कन्हैया जी और रामचंद्र जी के वंशज बताते हैं।

मोईनुद्दीन चिश्ती के समय यहां धर्म परिवर्तन हुआ था। वेदों में यकीन रखने वाले अनेक लोगों ने जब कलमा पढ़ा, तो उन्हें मुस्लिम घोषित कर दिया गया। बाद में इन लोगों को कई तरह की परंपराओं का निर्वहन करने में दिक्कतें आईं।

मुस्लिम इन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। ऐसे में इनका एक अलग समुदाय बना दिया गया। ये मेव कहलाने लगे। रायसीना से लेकर खनवा तक करीब 12 सौ गांवों में सवा लाख मेव बसाए गए।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us