कम तापमान के कारण जहरीली गैसें ऊपर नहीं उठेंगी, सांस की बीमारियां बढ़ेंगी

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2020 12:42 AM IST
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शहर में छाया हुआ धुआं।
शहर में छाया हुआ धुआं। - फोटो : Hisar

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संदीप बिश्नोई
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हिसार। लगातार नीचे गिरते तापमान और प्रदूषण के बीच पटाखों का प्रदूषण भी वातावरण को खराब करता है। इससे निकलने वाली गैसें सांस की ऐसी बीमारियां पैदा करती हैं, जो जीवन भर के लिए साथ बंध जाती हैं।
ऐसे में इस बार कोरोना संकट के बीच पटाखे जलाने से परहेज करना होगा। लगातार हुए जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच इस मौसम में पटाखे और पराली जलाने के कारण होने वाला धुआं व प्रदूषण ऊपर नहीं उठ पाता। ऐसे में धरती पर रहने वाले हर इंसान व जीव के लिए यह वायु प्रदूषण घातक सिद्ध होता है। पटाखों कार्बन डाईऑक्साइड के अलावा नाइट्रोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि गैसें व पर्टिकुलेट मेटर (वातावरण में भारी कण) निकलते हैं, जो सीधे श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।
पिछले वर्ष एक सप्ताह तक 500 पार रहा था एक्यूआई
पिछले वर्ष पटाखे जलाने, पराली व अन्य कारणों से हवा बेहद खराब हो गई थी। नवंबर के पहले सप्ताह में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था और लगातार 500 से अधिक दर्ज किया गया था। इससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हालात यह थे कि चिकित्सकों को बुजुर्ग और बच्चों को घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील करनी पड़ी थी। इस बार कोरोना संकट के बीच वायु प्रदूषण मुश्किलें बढ़ा सकता है।
2019 में इन दिनों का एक्यूआई
तिथि एक्यूआई
26 अक्तूबर 335
27 अक्तूबर 388
28 अक्तूबर 365
29 अक्तूबर 346
30 अक्तूबर 325
31 अक्तूबर - 340
01 नवंबर 474
02 नवंबर 499
03 नवंबर 430
04 नवंबर 376
2020 में अब तक एक्यूआई
24 अक्तूबर 328
25 अक्तूबर 336
26 अक्तूबर 344
27 अक्तूबर 291
28 अक्तूबर 315
29 अक्तूबर 392
पटाखों की गैसों और वायु प्रदूषण से होने वाली खतरनाक बीमारियां
- वायु प्रदूषण के कारण फेफड़े सीधे और सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। बुजुर्गों और बच्चों पर इसका सबसे अधिक नकारात्मक असर पड़ता है। वायु प्रदूषण से फेफड़ों की होने वाली बीमारी में अस्थमा और फेफड़ों से संबंधित अन्य बीमारियां हैं।
- प्रदूषण से वायु में रेस्पिरेबल सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर की अधिकता से कई श्वसन रोग हो जाते हैं।
- वायु प्रदूषण से फेफड़ों में होने वाले कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसी कारण फेफड़ों में होने वाले कैंसर का लोग शिकार हो रहे हैं। फेफड़े के कैंसर, ट्यूमर, टीबी और सभी श्वसन रोगों के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है।
- प्रदूषित वायु में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड के कारण लोगों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
- वायु प्रदूषण के कारण छाती में दर्द, कफ, सांस लेने में दिक्कत, सांस लेते वक्त आवाज निकलना और गले का दर्द जैसी बीमारियां बढ़ती हैं।
- कमजोर दिल वाले लोगों में वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर होता है। प्रदूषित वायु में लंबे समय तक सांस लेने से हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
एक दिन में 18 किलो ऑक्सीजन लेता है इंसान, यह दूषित हो तो....
- एक स्वस्थ व्यक्ति एक दिन में 18 किलोग्राम ऑक्सीजन लेता है। अगर यह ऑक्सीजन शुद्ध नहीं है तो अंदाजा लगा सकते हैं कि यह फेफड़ों को कितना नुकसान पहुंचा सकती है। लगातार प्रदूषित वातावरण बने रहने के कारण लोगों को अस्थमा, टीबी, एलर्जी, आंखों में जलन जैसी भयंकर बीमारियां होती हैं। प्रदूषण के कारण अप्रत्यक्ष रूप से भी शरीर में गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं। आतिशबाजी इस प्रदूषण को और अधिक बढ़ाती है।
-प्रो. नरसी राम बिश्नोई, पर्यावरण विभाग, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार।
आतिशबाजी बढ़ाएगी प्रदूषण
वर्तमान में जो वायु प्रदूषण चल रहा है, वह लोगों की सेहत खासकर फेफड़ों पर बेहद नकारात्मक असर डाल रहा है। ऐसे में आतिशबाजी का प्रदूषण इसे और बढ़ाएगा। इससे दमा और सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ेगी। सामान्य लोगों में भी एलर्जी, आंखों में जलन और सांस लेने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
- डॉ. अजय चुघ, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल हिसार।
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