बिना ई-वे बिल के सामान ढो रही सात गाड़ियां पकड़ी, काटा चालान

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Tue, 27 Oct 2020 11:12 PM IST
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आबकारी व कराधान विभाग कार्यालय में खड़े गए किए जब्त वाहन।
आबकारी व कराधान विभाग कार्यालय में खड़े गए किए जब्त वाहन। - फोटो : Bahadurgarh

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बहादुरगढ़। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने आबकारी एवं कराधान (बिक्री कर) विभाग की टीम के साथ मंगलवार तड़के करीब 3 बजे बिना ई-वे बिल के सामान ढो रहे 7 वाहनों को रोहद टोल के नजदीक से पकड़ा। टीम की ओर से टैक्स चोरी को लेकर जुर्माना किए जाने की कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई से क्षेत्र के ट्रांसपोर्टरों में हड़कंप मचा हुआ है। पकड़े गए वाहनों को आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र स्थित आबकारी एवं कराधान विभाग के कार्यालय में खड़ा किया गया है। वाहनों में जूते, कपड़े समेत परचून का सामान ले जाया जा रहा था। बता दें कि अक्तूबर के 26 दिनों में टीम ने अब तक साढ़े 48 लाख रुपये का जुर्माना वसूला कर लिया है।
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जानकारी के अनुसार मंगलवार तड़के करीब 3 बजे मुख्यमंत्री उड़नदस्ते और आबकारी एवं कराधान (बिक्री कर) की संयुक्त टीम ने केएमपी स्थित रोहद टोल टैक्स बैरियर के पास से दिल्ली से रोहतक की ओर जा रही एक के बाद एक सात वाहनों की जांच की। अधिकारियों की मानें तो इस दौरान किसी भी वाहन में ई-वे बिल नहीं मिला। ऐसे में इन सभी गाड़ियों को जब्त कर लिया गया। बाद में इन्हें आबकारी एवं कराधान के कार्यालय में खड़ा करा दिया है। विभाग की ओर से इन पर जुर्माना लगाया जाएगा। पकड़े गए वाहनों में जिस तरह का सामान ढोया जा रहा था उस पर जीएसटी और साथ में 100 से 200 गुना तक जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। सीएम फ्लाइंग स्क्वाड द्वारा कुछ और गाड़ियां पकड़ी जा सकती हैं। बता दें कि पिछले सप्ताह सीएम फ्लाइंग स्क्वाड ने बहादुरगढ़ में प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग और बिक्री को लेकर कार्रवाई की थी। लगातार दो दिनों तक छापेमारी की गई। पहले दिन 6 क्विंटल और अगले दिन सवा 8 क्विंटल पॉलिथीन बरामद की गई थी। अब जीएसटी की चोरी के मामले को लेकर कार्रवाई की गई है।
सीएम फ्लाइंग और आबकारी एवं कराधान की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की है। रोहद टोल टैक्स बैरियर पर दिल्ली से रोहतक की ओर जा रही 7 गाड़ियां जब्त की गई हैं। जिनके पास ई-वे बिल नहीं मिला। जुर्माने के लिए ऑनलाइन चालान बना दिए गए है। जिन्हें भरने के लिए दिन का समय दिया गया है।
-के एस मलिक, डीईटीसी, झज्जर।
यह होता है ई-वे बिल
ई-वे बिल एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक बिल होता है। यह आपके सामान्य जीएसटी बिल का डिजिटल रूप होता है। इस बिल का उपयोग किसी वस्तु या सामान को एक राज्य से दूसरे राज्य में अथवा उस ही राज्य में ट्रांसपोर्ट करने (ट्रांसपोटर कंपनियों द्वारा भेजने) के लिए किया जाता है। ट्रांसपोर्ट किए गए सामान की पूरी जानकारी सरकार तक पहुंचाने का कार्य यह बिल ही करता है। जीएसटी ई-वे बिल नियम को सरकार ने 1 अप्रैल 2018 से लागू किया था। इस बिल को ऑनलाइन ही जनरेट किया जाता है, यह बिल पर एक बिल नंबर (सीपिन नंबर) होता है, जो की हर बिल का अलग-अलग होता है। बिल को हासिल करने की जरूरत उन लोगों को होती है, जो 50 हजार रुपये से ज्यादा की कीमत का सामान व वस्तु को ट्रांसपोर्टर के जरिये सप्लाई कर करते हैं।
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