ताऊ बोल्या- यू कैसा प्रशासन, किसाना की बातै नी सुणदा....

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 12:12 AM IST
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former protest - फोटो : Kaithal

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ताऊ बोल्या-प्रशासन, प्रशासन, प्रशासन, यू किसा प्रशासन, किसानां की बात ए नी सुणदा...। घर के मुखिया(डीसी) को सुनणी चाहिए बात। कुछ इस तरह से किसानों ने एसडीएम संजय कुमार के सामने डीसी को ज्ञापन देने की बात पर अड़ते हुए कही। जब भारतीय किसान यूनियन द्वारा शहर में ट्रैक्टर रैली निकाल कर ज्ञापन देने के लिए लघु सचिवालय पहुंचे। जहां डीसी न मिलने पर एसडीएम को किसानों ने खूब खरी-खरी सुनाई।
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इससे पूर्व शहर में तीन कृषि कानूनों के विरोध में भाकियू ने शहर में ट्रैक्टरों पर काले झंडे लगाकर किसान ट्रैक्टर क्रांति यात्रा निकाली। इस दौरान किसानों ने छोटू राम चौक पर लगे भाजपा के झंडे व लड़ियां जलाकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
जवाहर पार्क में यूनियन के प्रदेश कोषाध्यक्ष सतपाल दिल्लोंवाली ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानून किसान विरोधी कानून है। इससे भविष्य में किसानों को नुकसान होगा, सभी मंडियां खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो कानून बनाए हैं, उनके साथ एक कानून और बनाया जाए कि एमएसपी से नीचे फसल खरीदने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी। यूनियन के प्रदेश महासचिव भूरा राम पबनावा ने कहा कि तीनों कानूनों लागू होने से किसानों के हित सुरक्षित नहीं है। उसके बाद कई किसानों ने अपने अपने विचार रखे और करीब साढे़ बारह बजे भारी संख्या में ट्रैक्टरों के काफिले के साथ सैकड़ों किसान पिहोवा चौक से हाते हुए छोटू राम चौक पर पहुंचे। चौक के चारों ओर लगे भाजपा के झंडे व लड़ियों को उखाड़ा और बीच सड़क पर डालकर आग लगा दी और सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। उसके बाद पानी से छोटू राम की प्रतिमा को धोया और फूल मालाएं पहनाकर वहां से वापस पिहोवा चौक से होते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे।
जहां पर पहले से पुलिस प्रशासन के साथ मौजूद सिविल एसएचओ गुरविंद्र सिंह ने ई दिशा केंद्र के पास सड़क पर ही किसानों को रोक लिया। किसानों ने एसएचओ से डीसी को बुलाकर ज्ञापन देने की अपील की। लेकिन डीसी बाहर होने के कारण तहसीलदार सुदेश मेहरा का ज्ञापन लेने के लिए बुलाया गया तो किसानों का गुस्सा बढ़ गया और एसएचओ के साथ काफी कहासुनी हुई। उसके बाद एसडीएम संजय कुमार आए और किसानों को समझाने लगे तो एक बुजुर्ग ने एसडीएम से बातचीत में कहा कि प्रशासन, प्रशासन, प्रशासन, यू कैसा प्रशासन, जो किसानां की बात नी सुणदा। डीसी लोगां की समस्या सुनण खातर ही बैठ्या रख्या है, फेर क्यू नहीं बात सुणदा किसानां की। डीसी ने एक दिन भी मंडी में जाकर क्यूं नी देख्या, मंडी में जांदा तो किसाना के हालातों का पता चाल्दा। उनकी समस्या का समाधान करवादां कुकरै। उसके बाद एसडीएम ने किसानों को समझा बुझाकर शांत किया और सरकार तक ज्ञापन पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस अवसर रामदिया, पाला, महावीर, सुरेश, रामफल सहित सैकडों किसान मौजूद थे।
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former protest- फोटो : Kaithal
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