पति को नई जिंदगी देने के लिए इस पत्नी ने खतरे में डाली अपनी जान, इनके जज्बे को सलाम

अमर उजाला, करनाल Updated Thu, 30 Jan 2020 01:12 PM IST
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वसंत यानी देवी सरस्वती की पूजा या फूलों की बहार। ये दोनों की बातें हरियाणा के करनाल जिले के अरडाना गांव के एक घर में साकार हुई। यहां संजय की पत्नी ने पति को अपनी किडनी दे दी, जिससे पति और परिवार के जीवन में फिर से बहार आ गई। सहीं मायने में तो इनके ही जीवन में वसंत आया है। अब वसंत को परिवार हर्षोल्लास से मना रहा है। विदित हो कि हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी गंभीर समस्या आती है। ऐसी स्थिति से बाहर निकालने वाला किसी भगवान या देवी से कम नहीं होता। संजय के जीवन में आई विकट परिस्थिति को उसके जीवन साथी ने दूर किया।
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अरडाना गांव निवासी 40 वर्षीय संजय पांचाल ने बताया, ‘उसको लंबे समय से पथरी थी। पथरी के प्रभाव से करीब 10 साल पहले एक किडनी खराब हो गई। इसके बाद एक किडनी के सहारे सफर चल रहा था। इसके बाद बीपी की समस्या रहने लगी पर समस्या लगातार होने लगी। ज्यादा तबीयत खराब हो गई। परिणाम ये हुआ की दूसरी किडनी भी खराब हो गई। ऐसे में परिवार के सामने गंभीर स्थिति थी। किडनी कौन देगा, इस विषय पर जब परिवार के सदस्य चर्चा कर रहे थे तो सबसे पहले पत्नी ने हामी भरी। इसके बाद चिकित्सकों से बातचीत कर प्रत्यारोपण कराया गया।
संजय-इंदू पर है दो बच्चों की जिम्मेदारी
अप्रैल 2005 में संजय पांचाल की इंदू के साथ शादी हुई थी। 40 वर्षीय संजय एमए, बीएड, जेबीटी किए हुए हैं। मौजूदा समय में गांव मूंड में जेबीटी पद पर टीचिंग कर रहे हैं। 35 वर्षीय इंदू आठवीं पास है और हाउस वाइफ है। दो बच्चे हैं। 13 वर्षीय लड़का आठवीं कक्षा में और 10 वर्षीय बेटी चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रही है।

महिलाओं में सबसे ज्यादा त्याग
समाज में भले ही पुरुषों को प्रधान माना जाता है, लेकिन बात जब त्याग और बलिदान की होती है तो महिलाएं की आगे नजर आती हैं। मां, बहन, पत्नी और बेटी के रूप में वह हर समय त्याग के लिए तैयार रहती हैं। तभी तो संजय की जब दोनों किडनी खराब हो गयी तो अपनी जान दांव पर लगाकर पत्नी ने उसे जीवनदान दिया। संजय का कहना है कि मुझ पर जो कर्ज मेरी माता का है, वही कर्ज अब मेरी पत्नी का हो गया है। क्योंकि उसने भी उस मोड़ पर बलिदान दिया, जब जीवन का अंतिम दौर था।

नारी हर कार्य करने में सक्षम
नारी कुछ भी कर सकती है। मेरे सामने भी कुछ करने की परिस्थिति आई तो मेरे कदम नहीं डगमगाए, क्योंकि एक पत्नी के लिए पति से बड़ा कोई त्योहार नहीं होगा। मैं ज्यादा पढ़ी लिखी तो नहीं हूं पर मुझे इतनी समझ है कि पति, बच्चों और सास-सुसर के लिए कब क्या करना है। मेरे साथ मेरा पति है तो आज मेरा वसंत है।
- इंदू, गृहणी
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