स्वास्थ्य विभाग और अमृतधारा अस्पताल प्रबंधन के बीच खीचतान के कारण गई दो की जान

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 03 Jul 2020 01:39 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग और अमृतधारा माई अस्पताल प्रबंधन के बीच खींचतान के कारण वीरवार को दो कारोना पाजिटिव मरीजों की जान चली गई। इन दोनों मरीजों की कोरोना पाजिटिव रिपोर्ट बुधवार सुबह दस बजे आई थी, लेकिन आपसी खींचतान के बाद एक मरीज रात 12 बजे मुलाना मेडिकल कालेज भेजा गया। जिसमें से एक मरीज को डाक्टरों ने इलाज से पहले ही मृत घोषित कर दिया। जबकि एक महिला को रात आठ बजे मुलाना मेडिकल कालेज लाया गया, जिसकी कुछ घंटे तक इलाज के बाद वीरवार की सुबह दम तोड़ गई।
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नियमानुसार कोरोना मरीजों को लाने -ले जाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस न होने का हवाला देकर निजी अस्पताल में भर्ती दोनों मरीजों को मुलाना मेडिकल कालेज भेजने से हाथ खड़े कर दिये थे। निजी अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही एक दूसरे पर मरीजों को भेजने के लिए जिम्मेदारी डालते रहे। काफी खींचतान के बाद अमृतधारा अस्पताल ने एएलएस एंबुलेंस से मरीजों को मुलाना मेडिकल कालेज भेजा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
करनाल से मुलाना की दूरी 84 किलोमीटर है और यह डेढ़ घंटे में गाड़ी आराम से पहुंच सकती थी। लेकिन इस खींचतान की वजह से दोनों मरीजों को शिफ्ट करने में 10 से 16 घंटे लग गए। इस संबंध में सीएमओ डा. अश्वनी आहूजा का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को दिन में ही बता दिया था कि दोनों मरीजों को अपने ही अस्पताल की एंबुलेंस से शिफ्ट किया जाए, क्योंकि सिविल अस्पताल में एडवांस एंबुलेंस नहीं है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सिविल अस्पताल के फ्लीट मैनेजर गोपाल शर्मा का कहना है कि दोनों मरीजों को अमृतधारा अस्पताल की ओर से ही मुलाना भेजा गया है। सिविल अस्पताल के पास एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस नहीं है, जिसमें वेंटीलेटर होता है। मरीज देरी से क्यों पहुंचे, इसकी जानकारी अमृतधारा अस्पताल ही दे सकता है। वहीं, अमृतधारा माई हास्पिटल के संचालक डा. ध्रूव गुप्ता ने मामले में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। दूसरी ओर एमएम मेडिकल कालेज मुलाना के डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. एनएल गर्ग का कहना है कि उनके पास महिला बुधवार रात 8 बजे और बुजुर्ग व्यक्ति देर रात आये थे।
अंतिम संस्कार में भी हुई देरी
इनके इलाज में ही देरी नहीं हुई, बल्कि दोनों बुजुर्गों के अंतिम संस्कार में भी देरी हुई। रिकार्ड के अनुसार बुजुर्ग व्यक्ति की मौत बुधवार रात में ही हो गई थी और महिला ने सुबह दम तोड़ा। इन दोनों के शव को लेकर सिविल अस्पताल की एंबुलेंस शाम 6 बजे पहुंची। जिनका बलड़ी बाईपास स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। अगर प्रशासन चाहता तो शाम से पहले अंतिम संस्कार किया जा सकता था।
मेडिकल कालेज की एंबुलेंस कोविड के लिए नहीं
सिविल अस्पताल की 23 एंबुलेंस का कोविड के मरीजों को घर से अस्पताल और अस्पताल के घर लाने ले जाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन कल्पना चावला मेडिकल कालेज में खड़ी एएलएस एंबुलेंस कोविड के मरीजों के लिए इस्तेमाल नहीं हो रही है। यदि इस एंबुलेंस से मरीजों को भेज दिया जाता तो वे समय से मुलाना मेडिकल कालेज पहुंच सकते थे।
डीसी बोले, जांच होगी
डीसी निशांत कुमार यादव का कहना है कि अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जहां कहीं कमी रही है उसको आगे से दूर किया जाएगा। तालमेल को और बेहतर बनाया जाएगा। जांच में किसी की लापरवाही मिली तो उनके खिलाफ एक्शन लेंगे।
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