नीति में बदलाव, गलवां घाटी में शहीद हुए अविवाहित तीन जवानों के विवाहित भाइयों को मिलेगी नौकरी

Panchkula Bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 19 Nov 2020 02:32 AM IST
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार की शहीदों को ‘सम्मान और आभार स्वरूप नौकरी’ देने की नीति में बदलाव करने को राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को मंजूरी दे दी। यह गलवां घाटी में शहीद हुए अविवाहित तीन शहीदों के विवाहित भाइयों को नौकरियां देने के लिए किया गया। यह फैसला सिपाही गुरतेज सिंह, सिपाही गुरबिंदर सिंह और लांस नायक सलीम खान के बलिदान को सम्मान देते हुए किया गया।
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मौजूदा नियमों के मुताबिक, जंगी शहीदों के निर्भर पारिवारिक सदस्यों या अगले वारिसों को ही नौकरी के लिए योग्य माना जाता है। लेकिन तीनों सैनिकों के मामले में उनका कोई भी पारिवारिक सदस्य निर्भर नहीं है। इस कारण इनके विवाहित भाइयों को नौकरियां देने के लिए नियमों में छूट देने का फैसला किया गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि सिपाही गुरतेज सिंह के भाई गुरप्रीत सिंह, सिपाही गुरबिंदर सिंह के भाई गुरप्रीत सिंह और लांस नायक सलीम खान के भाई नियामत अली ने ‘जंगी नायकों के निर्भर सदस्यों’ की परिभाषा के दायरे में न आने के बावजूद प्रांतीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।
पंजाब के पांच फौजी हुए थे शहीद : चीन की सेना की तरफ से किए हमले के दौरान जून, 2020 में लद्दाख सेक्टर में शहीद हुए पांच फौजी पंजाब के थे। इन पांचों में से तीन अविवाहित थे।
सूबे में शुरू होगी ‘पंजाब दिव्यांगजन शक्तिकरण’ योजना : दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘पंजाब दिव्यांगजन शक्तिकरण योजना’ (पीडीएसवाई) को राज्य में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मंजूरी दे दी। इस योजना के पहले चरण में मौजूदा कार्यक्रमों को मजबूती दी जाएगी। वहीं, दूसरे चरण में ऐसे व्यक्तियों के सशक्तीकरण के लिए 13 अन्य नई योजनाएं बनाने का प्रस्ताव है। यह फैसला बुधवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल कैबिनेट मीटिंग में लिया गया।
सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से बनाई इस योजना का उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक इमारतों, परिवहन और वेबसाइटों तक पहुंच बनाकर दिव्यांगों को रुकावट रहित माहौल मुहैया करवाना है। इसके साथ ही पीडीएसवाई का लक्ष्य सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के पदों के बैकलॉग को भरना है। रोजगार सृजन विभाग अगले छह महीनों के दौरान दिव्यांगों के रिक्त पदों को भरने पर और ज्यादा जोर देगा। इसके अलावा एक सलाहकार समूह के गठन का प्रस्ताव है। सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग एक संगठित वार्षिक योजना भी तैयार करेगा, जिसकी समीक्षा प्रमुख सचिव के नेतृत्व वाली योजना और निगरानी कमेटी (पीएमसी) करेगी। ब्यूरो

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