जज्बे को सलामः पत्नी का अंगदान कराकर पति ने पेश की मिसाल, एक शख्स को मिली नई जिंदगी

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 18 Mar 2020 01:02 PM IST
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मेरी पत्नी तो अब दुनिया में नहीं रही, लेकिन उसके अंगदान से किसी जरूरतमंद को नई जिंदगी मिल सकती है। उसका अंगदान कराना उसके लिए मेरा सबसे बड़ा तोहफा होगा, क्योंकि जीते जी उसने हमेशा दूसरों की खुशी चाही है। यह कहना है मनीमाजरा निवासी धर्मपाल का, जिनकी पत्नी रेखा (50) की पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उसके बाद अंगदान कराना गया। रेखा से मिली किडनी एक मरीज को ट्रांसप्लांट की गई है।
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और हंसती-खेलती जिंदगी हो गई तबाह
धर्मपाल अपनी पत्नी रेखा के साथ 11 मार्च की सुबह बाइक से कहीं जा रहे थे। उस दौरान एक तेज कार से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। इसमें धर्मपाल को तो मामूली चोट आई, लेकिन रेखा गंभीर रूप से घायल हो गईं। रेखा को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां स्थिति बिगड़ने पर 12 मार्च को पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में कार्डियक अरेस्ट से 14 मार्च को रेखा की मौत हो गई। धर्मपाल ने रेखा के अंगदान की इच्छा जाहिर की, जिसे पीजीआई के डॉक्टरों की टीम ने पूरा कर दिया।
‘कार्डियक अरेस्ट में मृतक का अंगदान कराना बहुत कठिन’
पीजीआई रोटो के ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर नवदीप बंसल ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट के मामले में मृतक का अंगदान कराना बहुत कठिन होता है। इसमें धीरे-धीरे अंग खराब होने लगते हैं। लेकिन धर्मपाल की इच्छा का सम्मान करते हुए अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। सिर्फ किडनी का ही अंगदान हो पाया।

उसमें से भी एक किडनी ही उपयोग योग्य पाई गई, जिसे एक रीनल फैल्योर के मरीज में ट्रांसप्लांट किया गया है। रीनल फैल्योर डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट के मामले में अंगदान का यह पीजीआई में 15वां मामला है। आमतौर पर ऐसे मामले में हम अंगदान कराने से मना कर देते हैं, लेकिन मृतका के पति के जज्बे को देखकर हमने रिस्क लिया और एक किडनी का दान कराने में सफल हुए।

रिश्तेदारों से मिली सीख : धर्मपाल
धर्मपाल ने बताया कि उसके रिश्तेदार अंगदान को लेकर काफी जागरूक हैं। उनसे मिली सीख से ही मैंने अपनी पत्नी का अंगदान कराने का निर्णय लिया है। मेरा मानना है कि जाने वाले के दु:ख में सब कुछ भूलने से बेहतर है कि उसकी याद में कुछ ऐसा किया जाए जिसे लोग हमेशा याद रखें।
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