वेबिनार कार्यक्रम ः क्लास रूम का विकल्प नहीं, कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई बनी सहारा

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Tue, 07 Jul 2020 02:00 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
महामारी के संक्रमण के डर से शिक्षण संस्थानों पर पिछले करीब चार महीने से ताले लगे हैं। ऐसे माहौल में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसलिए ऑनलाइन एजुकेशन बेहतर विकल्प है। इस विकल्प ने शिक्षकों व विद्यार्थियों को तकनीक से भी रूबरू कराने का काम किया है। इससे व्यक्ति के निजी जीवन में भी बदलाव आया है। सोमवार को अमर उजाला के ऑनलाइन एजुकेशन वेबिनार में जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य, शिक्षक व अभिभावकों ने अपने विचार रखे।
विज्ञापन

विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए चुनौती बना संक्रमण
महामारी का दौर आए यह किसी ने सोचा नहीं था। शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए कोरोना एक चुनौती बन कर आया है। इसलिए ऑनलाइन एजुकेश का फैसला लिया। संसाधन कम हैं, मगर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। मोबाइल के अलावा एजुसेट, टीवी प्रोग्राम, फ्री चैनल के जरिये बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। ऑनलाइन एजुकेशन क्लास रूम का विकल्प नहीं है, लेकिन कोरोनाकाल में सहारा बना है।
- डॉ. विजय लक्ष्मी, जिला शिक्षा अधिकारी।
महामारी ने सभी को ऑनलाइन एजुकेशन की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है। शहरी क्षेत्र को छोड़ दें तो ग्रामीण क्षेत्र में समस्याएं ज्यादा हैं। ऑनलाइन एजुकेशन के लिए सुविधा जरूरी हैं। स्कूल में पढ़ाई के अलावा खेल गतिविधियां भी ऑनलाइन बेहतर ढंग से चल रही हैं। बच्चों को एप के जरिये घर बैठे पढ़ाया जा रहा है।
- जनकराज, खेल प्रभारी, एमडीएन स्कूल।
स्कूल में ऑनलाइन पढ़ाई सुचारु ढंग से चल रही है। बच्चों को होमवर्क ऑनलाइन ही दिया जा रहा है। शिक्षक ऑनलाइन ही होमवर्क जांच रहे हैं। बच्चों का टेस्ट लेने के अलावा उनका परीक्षा परिणाम भी ऑनलाइन मुहैया कराया गया। नई तकनीक ने घर रहकर पढ़ाई जारी रखना आसान बना दिया है।
- डॉ. मधु जुनेजा, एकेडमिक डायरेक्टर, एमडीएन स्कूल।
सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन एजुकेशन बेहद मुश्किल दौर में है। ज्यादातर विद्यार्थियों के पास स्मार्ट मोबाइल फोन ही नहीं हैं। शिक्षक भी अपने संसाधनों से ही पढ़ा रहे हैं। मोबाइल, लैपटॉप ही नहीं, डाटा खर्च भी जेब से चुका रहे हैं। सरकार को दिल्ली की तर्ज पर शिक्षकों को टैब या लैपटॉप दिए जाने चाहिए, ताकि शिक्षण कार्य बेहतर ढंग से हो सके।
- दिलबाग सिंह अहलावत, वरिष्ठ उपप्रधान, हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ।
स्कूल में ऑनलाइन एजुकेशन दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों को संसाधनों के बावजूद शिक्षा मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे बच्चों को राशन की तरह सब्सिडी पर मोबाइल दिलाए जाएं। महामारी को देखते हुए साल भी की योजना बनाने की जरूरत है। सिलेबस भी सीमित हो। बच्चे के मेडिटेशन पर भी ध्यान देना चाहिए।
- संदीप नैन, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, इस्माइला।
पहले मुझे लगता था कि ऑनलाइन क्लासेज का बच्चों को क्या ही फायदा होगा। इससे बच्चों के साथ-साथ हमें भी हर दिन नया सीखने का मौका मिलता है। मेरे बच्चे एलकेजी में हैं बच्चों को एल्फाबेट्स की साउंड सिखाई जाती है। हमारे समय में इसका पैटर्न दूसरा था, अब दूसरा पैटर्न है। बच्चों को ब्रिटिश साउंड में सिखाया जा रहा है। अब क्लासेज सामने हैं तो हमें पता है कि बच्चे क्या सीख रहे हैं। हम ऑनलाइन क्लासेज से संतुष्ट हैं, ऐसे माहौल में यदि स्कूल खुल भी जाएं, तब भी हम दिसंबर तक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाएंगे।
-प्रीति चुघ, अभिभावक
आज के समय में ऑनलाइन पढ़ाई ने नई सोच को आयाम दिए हैं। विकलांग बच्चे जो विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सकते, उनके लिए ऑनलाइन स्टडी ने नई संभावनाएं पैदा की हैं। साथ ही हमारी जो सोच थी कि युवा पीढ़ी ही ऑनलाइन टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना जानती है, इसे हालात ने गलत साबित करते हुए प्रौढ़ अवस्था के लोगों में भी नया जोश पैदा किया है। क्रिएटिविटी और इनोवेशन को जोड़ते हुए बच्चों के साथ वह भी नित नया सीख रहे हैं।
- ममता भोला, प्रधानाचार्या, शिक्षा भारती स्कूल
मैं ऑनलाइन स्टडी से संतुष्ट हूं, क्योंकि इस समय बच्चे सुरक्षित रहें वह सबसे जरूरी है। मेरे बच्चे स्वामी नित्यानंद स्कूल में पढ़ते हैं और ऑनलाइन क्लासेज हमें यह सुविधा देती हैं, जिसमें बच्चे सेफ रह सकें। इसमें टीचर्स और बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी हर दिन नया पाठ सीख रहे हैं। फिलहाल यही सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि कुछ न होने से बेहतर है कुछ होना।
- एडवोकेट मोनिका सिंह
ऑनलाइन स्टडी को लेकर जो बेहतर है वह स्कूल की तरफ से करवा रहे हैं। फिलहाल कोई और विकल्प नहीं है। शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावक भी पूरी मेहनत कर रहे हैं। अगर ऑनलाइन स्टडी नहीं होती तो बच्चे बिल्कुल लीक से हट जाते। इससे बच्चों को अभिभावकों के साथ जुड़ने का मौका मिल रहा है। सभी टीचर्स ऑनलाइन स्टडी में पूरी मेहनत करते हैं। कोरोना काल ने हमें एकदम से 15 साल आगे भेज दिया है, वरना हम आने वाले 15 साल भी ऑनलाइन स्टडी को विकल्प के रूप में नहीं अपनाते।
- डॉ. अरुणा तनेजा, प्रधानाचार्या, मॉडल स्कूल
हम ऑनलाइन स्टडी से वैसे तो संतुष्ट हैं, लेकिन कई बार कनेक्टिविटी की समस्या आती है। अभिभावकों के साथ-साथ टीचर्स भी पूरी मेहनत कर रहे हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन स्टडी ही बेहतर विकल्प है। क्योंकि पढ़ाई से ज्यादा जरूरी बच्चों की सुरक्षा है। ऐसे में बच्चे लीक से न हटें इसके लिए ऑनलाइन स्टडी एक बेहतरीन ऑप्शन के रूप में सामने आया है। इसके लिए टीचर्स के साथ-साथ अभिभावक भी पूरी कोशिश कर रहे हैं।
- पूनम दांगी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us