प्रतिभा के सहारे नीरज को मिला राष्ट्रपति पुरस्कार, अब नारी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कर रही काम

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Mon, 26 Oct 2020 12:32 AM IST
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सोनीपत। प्रतिभावान को किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती, बल्कि वह खुद आगे बढ़कर मुकाम हासिल कर लेते हैं। शहर के सेक्टर की रहने वाली नीरज शर्मा ने शिक्षा को अपने जीवन का आधार बनाया। शिक्षक बनकर सदैव उत्कृष्ट कार्य किया और प्रतिभा के बलबूते राष्ट्रपति पुरस्कार तक प्राप्त किया। वह अपने छात्रों को महज शिक्षा नहीं देतीं, बल्कि शिक्षा के साथ ही नैतिक गुणों का पाठ भी पढ़ाती हैं। यहीं कारण है कि जब उनका कोई विद्यार्थी स्कूल से निकलता है तो वह पूरी तरह से संस्कारवान बनकर निकलता है।
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राष्ट्रपति की तरफ से राष्ट्रीय शिक्षक अवॉर्ड से सम्मानित नीरज शर्मा नरेला स्थित निगम उत्कृष्ठ बालिका विद्यालय में बतौर प्राचार्य सेवारत है। उनका बेहतर व्यवहार एक मिसाल बन चुका है। वह शिक्षा देने के साथ ही सामाजिक कार्यों में भी बढ़चढ़ कर भाग लेती हैं। वह सामाजिक संगठनों से जुड़कर समाजसेवा में लगी हैं। वह कन्या भ्रूण हत्या रोकने के प्रति महिलाओं में अलख जगा रही हैं और विद्यार्थियों को खेलों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
परिवार का विरोध करके छात्रा को दिलवाई शिक्षा
नीरज शर्मा बताती हैं कि उनके विद्यालय में तीसरी कक्षा में चंचल शर्मा नाम की छात्रा पढ़ती थी। तीसरी कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद चंचल के परिजनों ने उनका दाखिला चौथी कक्षा में कराने से मना कर दिया था। जिसकी जानकारी जब उन्हें मिली तो वह उसके परिजनों से मिली। उन्हें काफी समझाया और उनका विरोध भी किया। आखिरकार चंचल का दाखिला चौथी कक्षा में करवाया। चंचल ने आगे चलकर महिला कुश्ती में अपना नाम किया।
पिता की प्रेरणा को बनाया आगे बढ़ने का हथियार
नीरज शर्मा ने बताया कि उन्हें पिता के रास्ते पर चलकर ही जीवन में सफलता मिली। उनके पिता सत्यनारायण स्वयं शिक्षक थे और उन्हें हमेशा अपना काम ईमानदारी से करने के लिए प्रेरित करते थे। उनके पिता सीख देते थे कि दूसरों से कभी अपनी तुलना मत करो। हमेशा अपने लिए नए रास्ते बनाओ। वह भी अपनी शिष्याओं को इसी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
अब्दुल कलाम के दिखाए मार्ग पर चलने को करती हैं प्रेरित
नीरज शर्मा भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती हैं। डॉ. अब्दुल कलाम की सभी किताबें उन्होंने पढ़ी हैं। नीरज बताती है कि अब्दुल कलाम के जीवन से हमें सीख मिलती है। छोटे से छोटा व्यक्ति भी महान विचारों के साथ बड़ा बन सकता है। जीवन में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। वह अपने विद्यार्थियों को भी इसी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
कन्या भ्रूण हत्या रोकने को जागरूक करने में जुटी
कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कार्यक्रम आयोजित करती हैं। वह लोगों को बताती हैं कि आज के समय में बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। उनकी खुद की दो बेटियां मानसी व रूपिका है जो उनका नाम रोशन कर रही है। साथ ही वह कैरियर काउंसलिंग भी करती है। वह महिलाओं को समझाती है कि वह अपनी क्षमता का प्रयोग किस प्रकार कर सकती है।
कई पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित
नीरज को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें वर्ष 2009 में निगम पुरस्कार, वर्ष 2010 में राधाकृष्ण पुरस्कार, वर्ष 2011 में भागीरथी पुरस्कार, वर्ष 2012 में राज्य शिक्षक पुरस्कार, वर्ष -2013 में इंदिरा गांधी समरसता पुरस्कार, वर्ष 2014 में नारी शक्ति शिरोमणी पुरस्कार, वर्ष 2014 में शिक्षक रतन पुरस्कार, वर्ष 2015 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, वर्ष 2019 में बेस्ट प्राचार्य पुरस्कार व वर्ष 2020 हिंदी गौरव सम्मान मिला है।
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