प्री मैच्योर बच्ची को मरने के लिए बास्केट में डालने की जांच लटकाने में लगा स्वास्थ्य विभाग

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Fri, 29 May 2020 08:12 PM IST
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सोनीपत। शहर के एक निजी अस्पताल में जिंदा बच्ची का वजन कम बताते हुए बास्केट में डालने और उसके बाद में उसकी मौत होने के मामले में डीसी ने भले ही कड़ा रुख अपनाया हो। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच को लटका दिया है और इसकी जांच को लटकाने के लिए नए-नए तर्क दिए जा रहे हैं। एसडीएम ने 24 घंटे की जगह 48 घंटे होने के बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं मिलने पर सीएमओ को फोन करके रिपोर्ट मांगी तो स्वास्थ्य विभाग ने नया तर्क देना शुरू कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल संचालक व शिकायतकर्ता को आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब करने के बाद रिपोर्ट देने की बात कह दी। इस तरह से साफ है कि इसको जांच के नाम पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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शहर के एक निजी अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने का मामला सामने आया था। यहां एक प्रसूता ने दो बच्चों को जन्म दिया था। इनमें पहला बच्चा मृत था तो इसे दफना दिया गया। वहीं दूसरी बच्ची को जन्म लेने के बाद मरने के लिए बास्केट में डाल दिया गया था। इस मामले में एक युवक रवि दहिया ने पुलिस में शिकायत दी और अस्पताल में पुलिस को अपने साथ लेकर पहुंचा था। वहां पुलिस के सामने डाक्टर ने तर्क दिया था कि बच्ची प्री मैच्योर है और उसका वजन भी काफी कम है। इसलिए उसे नर्सरी या जीवनरक्षक उपकरणों पर नहीं रखा गया है। हालांकि उसके बाद रवि ने पुलिस की मदद से बच्ची को नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया था और वहां उसकी मौत हो गई थी। इस शर्मसार करने वाली घटना के सामने आने पर डीसी श्यामलाल पूनिया के निर्देश पर एसडीएम आशुतोष राजन ने सीएमओ को जांच के लिए पत्र लिखा था। डीसी ने खुद भी माना था कि यह मेडिकल नियमों के खिलाफ है और ऐसे बच्चे को बास्केट में नहीं डाल सकते है। इसकी जांच रिपोर्ट सीएमओ को 24 घंटे में देने के लिए कहा गया था, लेकिन इसमें 48 घंटे बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं दी गई और इसको जांच के नाम पर लटकाया जा रहा है। एसडीएम आशुतोष राजन ने जब रिपोर्ट के लिए सीएमओ को फोन किया तो उन्होंने रिपोर्ट जल्द भिजवाने के लिए कह दिया। लेकिन उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामला खींचने के लिए नया तर्क किया कि अस्पताल संचालक व शिकायत कर्ता को आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए जाएंगे, उसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें कई दिन लग सकते है और उसके बाद ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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