ट्राली को बनाया बसेरा, ताश खेलकर और हुक्का गुड़गुड़ाकर समय बीता रहे किसान

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Mon, 30 Nov 2020 10:24 PM IST
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कुंडली बॉर्डर के पास खाना बनाने के लिए प्याज काटते किसान।
कुंडली बॉर्डर के पास खाना बनाने के लिए प्याज काटते किसान। - फोटो : Sonipat

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सोनीपत। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का धरना और प्रदर्शन जारी है। किसान कुंडली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। ट्रैक्टर-ट्राली और ट्रक लेकर पहुंचे किसानों ने ट्राली का ही कमरा बनाकर उसमें हर सुविधा रखी हुई है। किसान सुबह नाश्ता करके धरने में शामिल हो जाते हैं। साथ ही खाली होने पर ताश खेलकर व हुक्का पीते हुए आंदोलन पर चर्चा कर अपना समय व्यतीत कर रहे हैं।
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कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए दिल्ली कूच के आह्वान के साथ 27 नवंबर से कुंडली बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं। किसानों ने अपने साथ लाई गई ट्रैक्टर-ट्रालियों को ही अपना घर बना लिया है। ट्रालियों को कमरे का रूप देकर किसानों ने उसके अंदर ही सभी सुविधा जुटा रखी है। खानपान का प्रबंध हो या रोशनी का सभी सुविधा ट्रालियों के अंदर ही जुटा रखी है।

किसानों की दिनचर्या की शुरुआत सुबह दैनिक कार्यों से होती है। उनसे निवृत्त होकर किसान स्वयं ही अपना नाश्ता तैयार करते हैं। नाश्ता करने के बाद धरनास्थल पर एकत्रित होते हैं। वहां धरना-प्रदर्शन के बाद जब समय मिलता है तो ताश खेलकर या हुक्का गुड़गुड़ाकर अपना समय व्यतीत करते हैं। इसके बाद लंच का समय होने पर स्वयं दोपहर का भोजन तैयार करते हैं। भोजन करने के बाद धरना स्थल पर नारेबाजी और नेताओं के विचार सुनने का दौर चलता है। बाद में संगीत बजाकर समय बिताते हैं। कई युवा तो नाचकर अपना मनोरंजन करते हैं और बुजुर्ग शब्दवाणी सुनकर समय बीता रहे हैं।
ट्रालियों को बना लिया है कमरा
किसानों ने अपनी ट्रालियों को ही कमरा बना लिया है। ट्रालियों के अंदर रजाइयां व अन्य गर्म कपड़े डाले गए हैं। ट्रालियों को पूरा कवर लिया जाता है। जिससे सर्द रातों में ठंड से बचा जा सके। ट्रालियों के अंदर आटा, चावल, दाल, सब्जी, प्याज, टमाटर व अन्य खानपान का सामान रखा हुआ है। एक ट्राली के अंदर ही 100 से 150 किलो तक आटा, 25 से 30 किलो तक चावल, 15 से 20 किलो दाल, मसाले, चाय, बिस्कुट, नमकीन व गैस सिलिंडर तक का प्रबंध है। साथ ही गर्म कपड़े लेकर आए हैं। किसानों का कहना है कि अगर सरकार छह माह तक भी उनकी बात नहीं मानेगी तो वह यहीं पर डटे रहेंगे। वह पूरी तैयारी कर आए हैं।
यह कहना है किसानों का
उम्र के अंतिम पड़ाव में अपना हक पाने के लिए यहां डटे हैं। ट्राली को ही घर बना लिया है। सुबह-शाम युवा साथियों की खाना बनाने में मदद करते हैं और दिन में धरना-प्रदर्शन करते हैं। राशन पानी की व्यवस्था के साथ यहां आए हैं। जब तक कोई हल नहीं निकलता तब तक यहीं रहेंगे। हुक्का व ढोलक साथ लेकर आए है। जब समय मिलता है हुक्का गुड़गुड़ा लेते हैं और शबद कीर्तन लगा लेते हैं। सरकार के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हैं।
- सरदार करनैल सिंह, पंजाब
जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होगी इस ट्राली को ही घर बनाकर रहेंगे। सुबह अपने व बुजुर्गों के लिए खाना बनाने में समय बीत जाता है। किसान अपना हक लेने आया है और हक लेकर ही जाएंगे। दिनभर धरना प्रदर्शन का दौर चलता है। किसान नेताओं की बात सुनते हैं। सरकार को चाहिए कि जल्द किसानों की मांग पूरी करें। वरना किसानों को यहां से हटाया नहीं जा सकता।
- अमृतपाल सिंह
किसान खाने-पीने का पूरा प्रबंध करके यहां आए हैं। सुबह के दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर धरना प्रदर्शन पर जाते हैं। दिनभर किसान नेताओं के बीच समय बीत रहा है। कुछ समय मिलता है तो गुरु के शबद कीर्तन करते हैं। युवा साथी ताश खेलकर समय बीताते हैं। सरकार को किसानों की मांग पूरी करनी होगी, नहीं तो वह यहीं पर डटे रहेंगे।
- कुलविंद्र सिंह
केंद्र सरकार को किसानों की बात माननी ही होगी। पंजाब से किसान दिल्ली के मुहाने पर आ गया है। खाने का सामान भरा हुआ है। अगर किसान को पांच साल रहना पड़ा तो भी यहीं रहेगा। अपना हक लेकर ही जाएगा। किसान यहां डट गया है। किसान खेतों में रहता है उसे यहां रहने में किसी तरह की दिक्कत नहीं है।
- सतनाम सिंह
कुंडली बॉर्डर के पास ताश खेलकर समय बिताते किसान।
कुंडली बॉर्डर के पास ताश खेलकर समय बिताते किसान।- फोटो : Sonipat
कुंडली बॉर्डर के पास हुक्का गुड़गुड़ाते किसान।
कुंडली बॉर्डर के पास हुक्का गुड़गुड़ाते किसान।- फोटो : Sonipat

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