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ऐसी बीमारी कभी ना देखी-ना सुनी, जिसमें पूरा देश बंद करने की आई हो नौबत

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 25 Mar 2020 10:30 PM IST
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यमुनानगर। कोरोना वायरस को लेकर छोटों से लेकर बड़ों व शहरों से लेकर गांवों तक हर कोई चिंतित दिखाई दे रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है जब देश में किसी बीमारी को लेकर कर्फ्यू तक लगाने का मामला सामने आया हो। शहर के बुजुर्गों ने बताया कि उनके जीवन काल में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी बीमारी के डर से लोगों को उनके घरों में कैद कर दिया गया हो। एक-दो दिन के लिए नहीं बल्कि 21 दिनों के लिए घरों में रहने की सरकारी आदेश जारी किए गए हों। उन्होंने कहा कि यह विषय चिंता का विषय है, कि देश के लोग 21 दिनों तक अपने घरों में कैद रहेंगे। सभी का स्वास्थ्य ठीक होना भी जरूरी है। ऐसे में उन्होंने सभी से कोरोना वायरस से एहतियात बरतने की सलाह दी।
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अब से पहले कभी ऐसा ना ही देखा और ना ही सुना था कि किसी बीमारी व वायरस से बचाव के लिए देश में कर्फ्यू लगाया गया हो। लोगों को घरों में लॉक डाउन करने के आदेश दिए गए हो। अब जब सरकार किसी बीमारी को गंभीरता से ले रही है तो सबका घरों में रहना ही बेहत्तर उपाय है।
-शिव चंद्र लाल, 90 वर्षीय
मैने कभी ऐसा नहीं देखा कि देश ही नहीं विश्व में किसी बीमारी का फैलना और उससे लड़ना चुनौती बन गया हो। किसी बीमारी और वायरस को हराने के लिए लोगों को घरों में कैद करना पड़ा हो। मेरे जीवन का यह पहला मामला है, इससे बचाव के लिए हमें सरकार का सहयोग करना चाहिए।
-इंद्र तलवार, 73 वर्षीय
कोरोना वायरस की वजह से होने वाली बीमारी खतरनाक है। ऐसी बीमारी मैने पहले अपने जीवनकाल में पहले कभी नहीं देखी। बीमारी से लड़ने के लिए सरकार व्यापक प्रबंध कर रही है। बस लोगों को उन नियमों की पालना करनी है जिन्हें सरकार लागू कर रही है।
-चन्द्र मोहन सचदेवा, 74 वर्षीय, हुडा सेक्टर-17
अपने जीवन के 81 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी बीमारी को फैलने से रोकने के लिए देश में कर्फ्यू लगाया गया हो। देशवासियों को बचाने के लिए सरकार अपना कर्त्तव्य बढ़िया से निभा रही है, ऐसे में देशवासियों को भी अपना कर्त्तव्य अच्छें से निभाना होगा।
-घनश्याम दास मनचंदा, 81 वर्षीय
देश में जो हालात इन दिनों किसी बीमारी के फैलने की डर की वजह से फैले हुए है, ऐसे हालात कभी किसी बीमारी के फैलने पर भी नहीं हुए थे। सरकार सभी देशवासियों को बचाने के लिए अग्रसर है, आगे हम सब का कर्त्तव्य बनता है कि अपने कर्त्तव्यों की पालना करें।
-श्याम सुंदर आनंद, 67 वर्षीय
जीवन के 73 सालों में मैने कभी ऐसा नहीं देखा कि किसी बीमारी के डर से देश को बंद रखा गया हो। लोगों को अपने सारे काम-धंधे छोड़कर घरों में रहने के सरकारी फरमान जारी किए गए हो। ऐसा भी पहली बार हुआ है बाहर के देशों से बीमारी लेकर आने वाले लोगों के साथ नम्रता और आमजन व मध्यमवर्गीय लोगों के साथ सख्ताई बरतीं जा रही हो।
-महेश कुमार ध्वन, 73 वर्षीय
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