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हिमाचल की इन नगर परिषदों को मिले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, कई जगह नहीं पहुंचे सदस्य

हिमाचल प्रदेश की कुल्लू नगर परिषद में सोमवार को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुन लिए गए हैं। गोपाल कृष्ण महंत फिर से कुल्लू नगर परिषद के अध्यक्ष बने हैं। वहीं निर्दलीय आशा महंत उपाध्यक्ष बनी हैं। शपथ ग्रहण में कुल 11 में से आठ पार्षद ही शामिल हुए। भाजपा के तीनों पार्षद नदारद रहे। सभी पांचों निर्दलीय पार्षदों ने कांग्रेस का साथ दिया। वहीं, जितेंद्र शर्मा को निर्विरोध सुंदरनगर नगर परिषद का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। शपथ समारोह के दौरान एसडीएम कार्यालय नेरचौक में हंगामा हो गया।

जानकारी के अनुसार चार भाजपा समर्थित पार्षदों के देरी से पहुंचने पर हंगामा हुआ। पुलिस के पहरे में चार पार्षदों की शपथ हुए। उधर, पांवटा नगर परिषद के पार्षदों की शपथ नहीं हो सकी। सोमवार को कोई भी पार्षद नहीं पहुंचा। एसडीएम ने कहा कि अब 22 जनवरी को शपथ होगी। नगर परिषद मनाली में सभी सदस्यों ने शपथ ग्रहण की। यहां चमन कपूर अध्यक्ष और मनोज लार्जे उपाध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं, वीरेंद्र बिंदु नगर पंचायत गगरेट के अध्यक्ष और कुसुम लता उपाध्यक्ष चुनी गई हैं। नगर परिषद चंबा से नीलम नैयर अध्यक्ष और सीमा कश्यप उपाध्यक्ष बनीं। 

वहीं,  हमीरपुर में भी नगर परिषद और नगर निकाय में नवनिर्वाचित पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ।  निर्दलीय चुनाव जीते संदीप भारद्वाज को हमीरपुर नगर परिषद का उपाध्यक्ष और भाजपा समर्थित मनोज मिन्हास को अध्यक्ष बनाने का सर्व सहमति से निर्णय लिया। 11 वार्डों में भाजपा के पांच वार्डों में पार्टी समर्थित पार्षद थे। बहुमत के लिए एक अन्य का समर्थन जरूरी था । इसको देखते हुए वार्ड नंबर चार से निर्दलीय जीते संदीप भारद्वाज को उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा ने समर्थन जुटाया। 

बिलासपुर की तीनों नगर परिषदों में कोरम पूरा न होने से चलने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका।  बिलासपुर, श्री नयना देवी जी और घुमारवीं नप में शपथ समारोह के बाद पार्षद तुरंत घर निकले।  तीनों नप में अब अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का फैसला 20 जनवरी को होगा। वहीं, नगर पंचायत तलाई में भाजपा समर्थित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गए हैं। यहां वंदना कुमारी को अध्यक्ष और नंद लाल को उपाध्यक्ष चुना गया है। नगर पंचायत बंजार में भाजपा से अध्यक्ष आशा शर्मा और उपाध्यक्ष प्रकाश वशिष्ठ चुने गए। नाहन नगर परिषद में कोरम पूरा नहीं होने के चलते अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव टल गया है। यहां अब 19 जनवरी को चुनाव होंगे। 
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हिमाचल में नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गए। हिमाचल में नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गए।

कबाड़ के स्कूटर से बना दिया खेतों को जोतने वाला हल, इंजीनियर ने पेश की मिसाल

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में  भंगरोटू के साठ वर्षीय सेवानिवृत्त यांत्रिकी अभियंता  ने कबाड़ स्कूटर के इंजन से अनूठा उपकरण तैयार किया है, जो खेतों को जोत सकेगा। वहीं नालियां बनाने के अलावा, कीचन गार्डन और सिंचाई के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकेगा। इस अविष्कार को कल्टीवेटर का नाम दिया गया है। शिमला में लोनिवि विभाग से रिटायर ईं. ओम प्रकाश वर्मा ने बताया कि यह कल्टीवेटर एक लीटर पेट्रोल से डेढ़ घंटे तक काम कर सकेगा। जिन लोगों के पास 30 से 50 बीघा जमीन है, वह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस मिनी कल्टीवेटर की खासियत यह है कि उन्होंने इसके ऊपर वेक्यूम कार्बोरेटर का इस्तेमाल किया हुआ है। जिससे प्रदूषण नहीं होगा। इसमें ट्रैक्टर के लिए इस्तेमाल होने वाले टायर के रबड़ इस्तेमाल किए गए हैं। इस अविष्कार को यू ट्यूब में डाला है, जिसे पूरे भारतवर्ष में रिस्पांस मिल रहा है। उपकरण का कीमत तीस हजार के करीब आई है। उन्होंने आह्वान किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद बेकार न बैठकर वृद्ध काम में लगे रहें और अपनी विधा से जुड़े प्रयोग करते रहें। उन्होंने कहा कि लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया का नारा अपनाएं और उम्र को बाधा न मानकर नव विचारों के साथ क्रिएटिविटी से जुड़े रहें।
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बड़ी चूक: हमीरपुर की रोपा और जंगलरोपा पंचायत के आपस में बदल गए मतपत्र

हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर की सटी पंचायतों रोपा और जंगल रोपा के मतपत्र गलती से एक दूसरी जगह पहुंच गए। मतदान के शुरुआती दौर में जब मतदाताओं ने शिकायत की कि मतपत्रों में उनकी पंचायत के प्रत्याशियों के नाम नहीं हैं तो जांच में पाया गया मतपत्र बदल गए हैं। इसके बाद चुनाव आयोग को सूचित किया गया और मतदान कुछ देर रुकवाकर मतपत्रों को बदला गया।

इसके बाद पहले डाले मतपत्रों को सील किया गया और जिन लोगों ने गलत मतपत्र पर वोट दे दिया था उन्हें बुलाकर दोबारा मतदान कराया गया। कुछ देर रुकने के बाद मतदान सुचारु हुआ। चुनाव अधिकारी संजीव महाजन ने बताया कि डाले गए मतपत्रों के नंबर नोट कराकर सील करने को कह दिया है। दोनों पंचायतों के नाम एक जैसे होने से गड़बड़ी हुई। कुछ लोगों से दोबारा सही मतपत्रों पर वोट डाले गए। 
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हिमाचल के इस गांव में शराब खरीदने और बेचने पर लगा प्रतिबंध, उल्लंघन पर 1000 जुर्माना

हिमाचल प्रदेश की शीत मरुस्थल स्पीति घाटी के खुरिक गांव की महिलाओं ने अनोखी मिसाल पेश की हैै। यहां के महिला मंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर गांव में देशी शराब बनाने, खरीदने और बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अगर कोई ग्रामीण इस प्रस्ताव का उल्लंघन करता है तो उसे 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही नहीं, 48 परिवारों की आबादी वाले इस गांव में अंग्रेजी शराब की कोई दुकान भी न खुलने देने का फैसला लिया गया। पंचायत में नशाबंदी के बोर्ड भी लगा दिए हैं। इसके अलावा जिन परिवारों में दो से तीन बच्चे हैं, उनमें एक बच्चे को गांव के सरकारी स्कूल में दाखिल करवाना भी अनिवार्य कर दिया है, ताकि सरकारी स्कूल बंद न हों। गांव के लोग इस फैसले की सराहना कर रहे हैं।

क्षेत्र में युवा वर्ग के शराब के सेवन की गिरफ्त में आने के बाद महिला मंडल ने यह कदम उठाया है। महिला मंडल की ओर से लोकल शराब बेचने और खरीदने की रोक का पंचायत ने भी साथ दिया और इस फैसले को सराहा है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि महिलाएं अकसर रोजगार के साधन न होने के कारण देशी शराब बेचकर कुछ पैसे कमाती थीं। अब ऐसी महिलाओं को पंचायत मनरेगा में ज्यादा से ज्यादा रोजगार देकर उनकी मदद करेगी। पंचायत के पूर्व उपप्रधान कलजग ने बताया कि गांव के महिला मंडल की ओर से लोकल शराब खरीदने व बेचने पर प्रतिबंध के बाद अब पंचायत महिलाओं को मनरेगा में प्राथमिकता देगी। महिला मंडल प्रधान दोरजे डोलमा, उपप्रधान लुसंग डोलकर, सदस्य छेरिंग लामो ने बताया कि पूर्व में उनके गांव में लोकल शराब के प्रचलन ने युवाओं को नशे की ओर धकेल दिया था। गांव के 70 फीसदी से अधिक युवा नशे की चपेट में आ गए थे। गांव में अब शराब ठेका भी नहीं खुलने दिया जाएगा। उधर, एसडीएम काजा जीवन नेगी ने कहा कि महिलाओं की यह पहल सराहनीय है। नशा मुक्ति अभियान के लिए उठाए कदम के जल्द बेहतर परिणाम आएंगे। 
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शिमला बाजार में 20, मंडी जिले में दो रुपये किलो बिक रही गोभी

स्पीति घाटी का खुरिक गांव
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में फूलगोभी के दाम लुढ़क गए हैं। शिमला में 20 से 25 रुपये बिकने वाली गोभी मंडी में दो रुपये किलो बिक रही है। पंचायत चुनावों के शोर के बीच मंडी जिले का किसान गोभी की कीमतें गिरने से किसान बेहाल है। बंपर पैदावार के चलते सब्जी मंडी में किसानों से गोभी की खरीद दो रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। आलम यह है कि पैदावार खेतों में ही सड़कर तबाह हो रही है। किसानों का कहना है कि कमर तोड़ मेहनत के बाद पनीरी के दाम भी पूरे नहीं हो सके हैं।

बल्ह, सुंदरनगर और मंडी में सर्वाधिक गोभी की पैदावार होती है। 250 हेक्टेयर में पांच हजार से अधिक परिवार गोभी की खेती से जुड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक इस बार करीब सात लाख टन के करीब गोभी की पैदावार हुई है। ऐसे में किसानों ने गोभी का समर्थन मूल्य सरकार से तय करने की मांग की है। कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलदीप वर्मा का कहना है कि गोभी की इस बार बंपर पैदावार हुई है।
किसान राकेश ठाकुर, गंगाराम, किशोरी लाल, राम चंद्र, शरणदास, शकील अहमद ने बताया कि फसल की सुरक्षा के लिए रात दिन खेतों में पहरा दिया है। कीटनाशक, पनीरी का खर्चा भी नहीं निकला है। अमूमन गोभी सात से दस रुपये किलो तक बिकती थी, लेकिन गोभी की कीमत दो रुपये किलो तक पहुंच गई है। 

सुधरेंगे हालत: नंद लाल
 सब्जी मंडी नेरचौक के थोक विक्रेता नंदलाल सैणी का कहना है कि इस बार घाटी में गोभी की बंपर पैदावार हुई है। अभी दो रुपये किलो मुश्किल से मिल रहे हैं। शीघ्र ही गोभी के दाम बढ़ने के आसार है। जिससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिलेगा।
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हिमाचल में चार विधायकों से ही मिलीं प्राथमिकताएं

हिमाचल प्रदेश में केवल चार विधायकों से ही प्राथमिकताएं मिल पाई हैं। राज्य के योजना विभाग ने इन्हें सभी 68 विधायकों से मांगा है। विधायकों को दो-दो प्राथमिकताएं ही सरकार को देनी होंगी। सरकार को पीने के पानी, सिंचाई और सड़कों-पुलों की प्राथमिकताएं मांगे डेढ़ हफ्ता हो गया है। ये पिछली बार भी कई विधायकों से नहीं मिलीं। इससे बजट बुक के कई कॉलम खाली छोड़ने पड़े। नए वित्तीय वर्ष के बजट अनुमानों के आकलन से पहले विधायकों से उनकी प्राथमिकताएं मांगी जाती हैं। इन्हें बजट बुक में शामिल किया जाता है। इस बार भी इन्हें मांगा गया है।

दो-दो  न्यू स्कीमें बजट बुक में शामिल की जाती हैं, जबकि दो-दो ऑनगोइंग योजनाएं भी इसमें शुमार की जाती हैं। ऐसे में हर विधायक छह रियली न्यू स्कीमें और छह ऑनगोइंग स्कीमें इनमें शुमार कर सकते हैं। पर इस बार भी इन योजनाओं को बजट बुक में छपने के लिए भेजने की रफ्तार पिछले साल की तरह ही कमजोर है। हालांकि, इस संबंध में राज्य सरकार के योजना विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि विधायक इन योजनाओं को आगामी दस दिनों के अंदर भेज सकते हैं। 28 और 29 सितंबर को विधायकों की वार्षिक बजट के लिए बैठक है। इसमें भी इन योजनाओं को शुमार किया जा सकता है।

एक अनार सौ बीमार की स्थिति से बचना चाहते हैं विधायक
- कई विधायक जान-बूझकर भी इन योजनाओं को अपनी प्राथमिकताओं में शुमार नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि इससे एक अनार सौ बीमार की स्थिति पैदा हो जाती है। यानी बहुत से क्षेत्रों के लोग अपने लिए बजट में विभिन्न योजनाओं को डालना चाहते हैं, पर इससे जिन लोगों की योजनाएं बजट में नहीं पड़ती है, वे रूठ जाते हैं। इसलिए भी कॉलम खाली छोड़ देते हैं। बाद में चुपचाप योजनाओं की विधायक प्राथमिकता के तहत डीपीआर बनाकर इन्हें आगे नाबार्ड को भेजा जाता है।
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