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चंद्र ग्रहण पर कराएं मंत्रों का जाप , होती है करियर सम्बंधित परेशानियां दूर
Chandra Grahan Special

चंद्र ग्रहण पर कराएं मंत्रों का जाप , होती है करियर सम्बंधित परेशानियां दूर

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बुजुर्गों के मनोरंजन को विकसित होंगे 100 उद्यान एवं पंचवटी पार्क : वीरेंद्र

सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के सभी 78 खंडों में बुजुर्गों के लिए मनोरंजक स्थान बनाने को 100 पंचवटी पार्क और उद्यान स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्रामीण विकास विभाग के अधिसूचित पंचवटी योजना का शुभारंभ हाल ही में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने किया था। पंचायतीराज और ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर के अनुसार इन पार्कों पर प्रारंभिक कार्य कुछ जगह शुरू किया गया है।

इन सभी खंडों में पार्कों पर निर्माण कार्य चालू वित्त वर्ष में पूरा किया जाएगा। शेष 80 पार्क और उद्यान दिसंबर 2021 तक चरणबद्ध तरीके से विकसित किए जाएंगे। हर पार्क में अत्याधुनिक व्यायाम और मनोरंजन के उपकरण, एक मीटर चौड़ा और 150 मीटर लंबा जॉगिंग ट्रैक, पैदल चलने का ट्रैक, योग और ध्यान की कक्षाओं के लिए एक विशेष स्थान, महिलाओं और पुरुषों के लिए शौचालय और सोलर लाइटें होंगी। 

कहा कि पार्क और उद्यान विकसित करने पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और 14वें वित्त आयोग के बजट प्रावधान के साथ राज्य में ऐसे 100 पार्कों के निर्माण पर 10 करोड़ खर्चे जाएंगे। प्रत्येक पार्क में आयुर्वेदिक और औषधीय पौधे जैसे आंवला, नीम, तुलसी और एलोवेरा होंगे।

इन पार्कों का उपयोग स्वयं सहायता समूहों के स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने को भी किया जाएगा। ये पार्क राज्य के सभी 78 खंडों में ग्रामीण विकास विभागों के विशेषज्ञ एक बीघा से दो बीघा भूमि पर स्थापित किए जाएंगे। इनका रख-रखाव और प्रबंधन स्थानीय पंचायतीराज संस्थान करेंगे। 

पहले चरण में इन स्थानों में बनेंगे पार्क
पहले चरण में जिला मंडी के विकास खंड गोहर में पार्कों के निर्माण को भूमि चिन्हित की गई है। जिला ऊना में बंगाणा, कुल्लू में बंजार और नग्गर, लाहौल-स्पीति में काजा, कांगड़ा में नगरोटा बगवां और सुलह, सिरमौर में पांवटा साहिब, चंबा में तीसा और भटियात, किन्नौर में कल्पा, सोलन में कंडाघाट, शिमला में रोहड़ू और हमीरपुर जिले के नादौन में भूमि का चयन किया गया है।
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हिमाचल में नई पंचायतों का नहीं होगा गठन, पिछले आरक्षण पर होंगे चुनाव

हिमाचल में चुनाव से पहले नई पंचायतों के गठन का मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया है। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में पिछली बार की तरह वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही आरक्षण मिलेगा। नवंबर के दूसरे हफ्ते तक पंचायतों में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करने का समय दिया है, जबकि जनवरी के पहले हफ्ते में चुनाव होने हैं।

कोरोना के चलते प्रक्रिया अटक गई है।  पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि लॉकडाउन के कारण नई पंचायतें बनाने का मामला ठंडा पड़ गया है। सरकार के पास इस बार करीब 450 नई पंचायतों बनाने के प्रस्ताव पहुंचे हैं। अब सरकार ने नई पंचायतों के गठन का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वर्तमान में प्रदेश में 3226 पंचायतें हैं, पिछली बार नए नगर निगम बनने से पंचायतें घटीं थीं। 

पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर आधार पर होगा। अगर पंचायत में किसी वर्ग की जनसंख्या 5 फीसदी से कम है तो उन पंचायतों में आरक्षण नहीं मिलेगा। किसी पंचायत में आरक्षित वर्ग की छह सीटें हैं तो वहां पर 50 फीसदी महिला और 50 फीसदी पुरुषों के लिए सीटें आरक्षित रहेंगी। 
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हिमाचल: सीमा पर पहुंचते ही जांची जाएगी पर्यटकों की कोरोना रिपोर्ट और ऑनलाइन बुकिंग

हिमाचल में सैलानियों को आने की सरकार से मंजूरी मिलते ही पर्यटन विभाग ने इसको लेकर मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) जारी कर दिया है। प्रदेश में आने से 72 घंटे पहले आईसीएमआर से पंजीकृत लैब से कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट वालों को प्रदेश में आने दिया जाएगा। सूबे के बॉर्डर पर पहुंचते ही इन सैलानियों की स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट और प्रदेश के होटल में कम से कम पांच दिन के लिए करवाई गई ऑनलाइन बुकिंग को जांचा जाएगा।

जिला प्रशासन बॉर्डर से संबंधित होटल में बुकिंग को लेकर पूछताछ करेगा। सैलानियों के होटल पहुंचने पर इसकी जानकारी बॉर्डर से पूछताछ करने वाले अधिकारियों को होटल प्रबंधन द्वारा देनी होगी। आरोग्य सेतु ऐप का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। होटल में पहुंचते ही सैलानियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। पर्यटन विभाग ने पैराग्लाइडिंग, साइट सीन, वाटर स्पोर्ट्स, होम स्टे, बीएंडबी, रेस्टोरेंट और शादी समारोह को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। 
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पतलीकूहल में पकड़ी चार किलो चरस, युवक गिरफ्तार

जिला कुल्लू पुलिस कोरोना काल मे भी नशे के खिलाफ सतर्क है। इसके किए नाकाबंदी और गश्त का दौर लगातार जारी है। ताजा मामला पतलीकूहल थाने में सामने आया है। जहां पुलिस ने एक युवक को चार किलो 100 ग्राम चरस के साथ धर दबोचा है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार शनिवार रात को पुलिस की एक टीम रूटीन गश्त पर थी। तभी फोजल रोड पर एक व्यक्ति फोजल से डोभी की ओर पैदल आ रहा था और उसकी पीठ पर एक पिट्ठू बैग था। इस दौरान जब उसने पुलिस वाहन को डोभी की तरफ से आते देखा,तो युवक ने अपने पिट्ठू बैग को पहाड़ी की ओर फेंक दिया।  

जबकि उसे इस बारे में पुलिस ने पूछताछ की पता चला कि बैग में चरस की खेप है। पुलिस ने बैग की बरामद किया है। पुलिस ने 29 वर्षीय विनय कुमार निवासी नाहीं गुशैणी बंजार को गिरफ्तार कर दिया है। पुलिस अधीक्षक कुल्लू गौरव सिंह ने कहा कि युवक ने चरस की खेप कहां से लाई है,इस बारे पूछताछ की जा रही है।
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निजी होटल मालिकों को 11 फीसदी ब्याज पर चार साल के लिए मिलेगा ऋण

आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रदेश के निजी होटल कारोबारियों को सरकार 11 फीसदी ब्याज पर चार साल के लिए ऋण देगी। पहले दो साल प्रदेश सरकार 50 फीसदी ब्याज चुकाएगी। कारोबारी 31 मार्च 2021 तक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।  राज्य सरकार ने राजपत्र में कम ब्याज पर ऋण देने की योजना को अधिसूचित कर दिया है।

ऋण लेने के लिए जिला पर्यटन अधिकारी के पास आवेदन करने होंगे। कोविड 19 महामारी के कारण प्रभावित हुए पर्यटन उद्योग को दोबारा पटरी पर लाने के लिए बीते दिनों ही मंत्रिमंडल ने इस योजना को मंजूर किया है। इसके तहत 31 मार्च 2020 तक एक करोड़ रुपये का जीएसटी चुकाने वाली पर्यटन इकाइयां 50 लाख रुपये तक के अधिकतम ऋण के लिए पात्र होंगी।

इस अवधि तक कम से कम एक वर्ष तक एक करोड़ रुपये से तीन करोड़ रुपये तक जीएसटी चुकाने वाली पर्यटन इकाइयां 75 लाख रुपये तक ऋण लेने और तीन करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी देने वाली पर्यटन इकाइयां एक करोड़ रुपये तक ऋण लेने तक पात्र होंगी। छोटी पंजीकृत पर्यटन इकाइयां 15 लाख रुपये तक के ऋण के लिए पात्र होंगी।

ऋण अवधि चार वर्षों के लिए होगी जिसमें पहले दो वर्षों तक ब्याज में हर वर्ष 50 प्रतिशत छूट होगी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत इकाइयों को ही ऋण मिलेगा। राज्य सहकारी बैंक, कांगड़ा सहकारी बैंक, जोगिंद्रा सहकारी बैंक और व्यवसायिक बैंकों के माध्यम से ऋण दिए जाएंगे। 
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हिमाचल: मनाली में 2000 होटलों को खोलने के पक्ष में नहीं मालिक

हिमाचल सरकार ने सूबे में बिना पास पर्यटकों के आने के लिए सीमाएं खोल दी हैं। लेकिन कुल्लू-मनाली के होटल मालिक अभी इसके पक्ष में नहीं हैं। प्रदेश की सबसे बड़ी होटल एसोसिएशन भी अभी होटल व होम स्टे को खोलना नहीं चाहती। जिला के बंजार की जिभी और तीर्थन घाटी होटल संगठनों ने 15 अगस्त तक पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। मणिकर्ण होटल एसोसिएशन ने होटल मालिकों पर फैसला छोड़ दिया है।

उल्लेखनीय है कि पर्यटन के लिए विख्यात कुल्लू जिला में पिछले तीन माह से भी अधिक समय से कोरोना के चलते सन्नाटा पसरा है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने अब हर किसी के लिए हिमाचल के द्वार खोल दिए हैं। कुछ शर्तों के साथ अब सैलानी भी बिना ई-पास के प्रदेश की वादियों का सैर सपाटा कर सकेंगे। होटल एसोसिएशनों ने भले ही सरकार के फैसले का स्वागत किया है लेकिन कोरोना से सहमे होटल मालिक किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। 

मनाली में ही करीब दो हजार होटल व होम स्टे शामिल हैं। मगर अभी इनको खोलने के लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि कुछ बड़े होटल खुल सकते हैं, जिनकी संख्या मात्र दो से तीन फीसदी है। होटल एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अनूप ठाकुर ने कहा कि मनाली में 90 फीसदी होटल ग्रामीण इलाकों में हैं। शनिवार को उन्होंने आठ से 10 पंचायतों के प्रधानों से इस बारे में बात की, लेकिन सबने एक मत में मना किया है।

उन्होंने कहा कि मनाली में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर नहीं है। ऐसे में अपने स्वार्थ के लिए कोरोना काल में होटलों को खोलना उचित नहीं है। ठाकुर ने कहा कि दो-तीन दिन में बैठक होगी, जिसमें आगामी फैसला लिया जाएगा। जिभी व तीर्थन वेली टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन की बैठक बंजार के नागिनी में हुई। इसमें 15 अगस्त तक बंजार घाटी में किसी भी तरह की पर्यटन गतिविधियों को शुरू नहीं करने का निर्णय लिया गया है।

प्रधान ललित कुमार तथा वरुण भारती ने बताया कि कोरोना में पर्यटन गतिविधियों को शुरू करना ठीक नहीं है। मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर ने कहा कि उन्होंने पहले लगाई पाबंदी को हटा दिया है और अब होटल मालिक इस पर खुद निर्णय ले सकेंगे कि होटलों को खोलना है या नहीं। 
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सेब सीजन के लिए नेपाल से मजदूर लाने की प्रक्रिया शुरू

हिमाचल के भरमौर में मिला विलुप्त प्रजाति का कस्तूरी बिलाव

हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र भरमौर में विलुप्त प्रजाति के कस्तूरी बिलाव (मस्क सीवेट) का बच्चा मिला है। चंबा जिला में इससे पहले यह प्रजाति कभी नहीं देखी गई। खड़ामुख के पास घायल अवस्था में मिले कस्तूरी बिलाव के बच्चे को गाड़ी चालक ने वन विभाग को सौंपा है। इसका उपचार किया जा रहा है और बाद में इसे जंगल में छोड़ा जाएगा। 

वन्य प्राणी विभाग अब इस कस्तूरी बिलाव के संरक्षण को लेकर विशेष योजना बना रहा है ताकि जंगलों में इस प्रजाति के वन्य जीवों का एक आंकड़ा जुटाया जा सके। इसे लेकर विभागीय टीम जंगलों में ट्रैप कैमरे भी लगा सकती है। पिछले साल चंबा में कई विलुप्त प्रजाति के वन्य जीव देखने को मिले हैं। इनमें बर्फानी तेंदुए से लेकर कस्तूरी मृग सहित भूरे भालू शामिल हैं। चंबा जिला रियासत काल में वन्य जीवों को लेकर काफी धनवान था।

लेकिन जंगलों में अवैध शिकार से कई जानवर विलुप्त हो गए। इसके बाद वन्य प्राणी विभाग ने शिकारियों से जंगली जानवरों को बचाने के लिए शिकंजा कसना शुरू किया। साथ ही विलुप्त प्रजाति के जानवरों के चंबा में प्रमाण ढूंढने के लिए सर्च अभियान चलाए। ट्रैप कैमरों की भी मदद ली गई। इन्हीं ट्रैप कैमरों के जरिये पांगी व भरमौर के जंगलों में बर्फानी तेंदुआ, भूरा भालू व कस्तूरी मृग देखे गए। डीएफओ राजीव कुमार ने बताया कि खड़ामुख में घायल अवस्था में कस्तूरी बिलाव का बच्चा मिला है। यह विलुप्त प्रजाति का बताया जा रहा है। इसको लेकर पूरी जांच की जा रही है। 
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