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मंगलवार को इन 4 राशिवालों की पलटेगी किस्मत, जेब में आएगा पैसा
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मंगलवार को इन 4 राशिवालों की पलटेगी किस्मत, जेब में आएगा पैसा

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शिमला: गुड़िया मामले में दोषी की सजा पर सुनवाई फिर टली

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में दोषी करार दिए गए नीलू की सजा पर सुनवाई फिर टल गई है। मंगलवार को शिमला की एक विशेष अदालत में दोषी को पेश किया गया, लेकिन कोरोना कर्फ्यू की बंदिशों के चलते सजा पर सुनवाई 18 जून तक टल गई है। 

गुड़िया दुष्कर्म व हत्याकांड में सीबीआई की ओर से पेश चालान में दोषी साबित हुए चरानी अनिल उर्फ नीलू को शिमला की विशेष अदालत ने 28 अप्रैल को दोषी करार दिया था। मंगलवार को सजा पर फैसला संभव था, लेकिन कोरोना की बंदिशों के चलते शिमला बार एसोसिएशन ने 30 जून सिर्फ जरूरी मामलों में पेश होने का निर्णय लिया है। ऐसे में सुनवाई अब 18 जून को होगी।

 बता दें जिला शिमला के कोटखाई की एक छात्रा 4 जुलाई, 2017 को  लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में पीड़िता का शव मिला। जांच में पाया गया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।
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गुड़िया मामले में दोषी नीलू को कोर्ट में पेश किया गया। गुड़िया मामले में दोषी नीलू को कोर्ट में पेश किया गया।

सरकारी नौकरी: हिमाचल के स्कूलों और कॉलेजों में भरे जाएंगे शिक्षकों के चार हजार पद

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में जल्द चार हजार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। शिक्षा विभाग ने वित्त महकमे से मंजूरी लेने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसके बाद प्रस्ताव मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सीधी भर्ती के अलावा कुछ पद बैचवाइज भी भरे जाएंगे। प्रारंभिक और उच्च शिक्षा विभाग में स्वीकृत रिक्त पद भरने के लिए शिक्षा विभाग ने चार हजार नए शिक्षक भर्ती करने का प्रस्ताव तैयार किया है। टीजीटी, जेबीटी, सीएंडवी, शास्त्री, भाषा अध्यापक, पैट, डीएम, तबला प्रशिक्षक और कॉलेज प्रवक्ताओं के पद भरे जाएंगे।

पीईटी, ड्राइंग शिक्षकों और तबला प्रशिक्षकों की काफी समय के बाद भर्ती की जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा के तहत टीजीटी, जेबीटी और सीएंडवी के करीब 2500 पद भरे जाएंगे। शेष पदों को उच्च शिक्षा के तहत भरा जाएगा।

मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के एक माह के भीतर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर और लोकसेवा आयोग शिमला के माध्यम से पद भरे जाएंगे। शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने बताया कि शिक्षकों की विभिन्न श्रेणियों के पद भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वित्त विभाग को इस बाबत प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

आयुर्वेद विभाग में चिकित्सकों के 935 पद खाली
उधर, आयुर्वेद विभाग में रोजगार के द्वार बंद पड़े हैं। प्रदेश के विभागों में विभिन्न श्रेणियों के पदों को भरा जा रहा है लेकिन आयुर्वेद में डाक्टरों और अन्य रिक्त पड़े पदों को नहीं भरा जा रहा है। इस विभाग में अभी भी 935 पद खाली चल रहे है। प्रदेश में कोरोना महामारी ने पांव पसार हैं। फील्ड में एमबीबीएस डॉक्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं।  प्रदेश में आयुर्वेद स्नातक बेरोजगार घूम रहे हैं लेकिन इनकी तैनाती नहीं की जा रही है। विधानसभा में भी इस बार इस मामले को उठाया गया है, बावजूद सरकार पद नहीं भर रहे हैं।

प्रदेश में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी चल रही है। आयुर्वेद में रिक्त पदों को भरे जाने से इनकी सेवाएं फील्ड मे ली जा सकती है।  बेरोजगार आयुर्वेद स्नातक ने रिक्त पदों को भरने के लिए राज्यपाल को भी ज्ञापन सौंपा है। बिलासपुर में डॉक्टरों समेत विभिन्न श्रेणियों के 26, चंबा 116, हमीपुर 20, कांगड़ा 130, किन्नौर 31, कुल्लू 64, लाहौल-स्पीति 40, मंडी 83, शिमला 158, सिरमौर 77, सोलन 30, ऊना 55 सहित अन्य आयुर्वेद चिकित्सा संस्थान में पद खाली है। 
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जुलाई में ही अंतिम के साथ स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षा करवाएगा एचपीयू शिमला

स्नातक डिग्री कोर्स के अंतिम वर्ष की परीक्षा करवाने के फैसले पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की परीक्षा विंग में 50 फीसदी स्टाफ बुलाकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। विवि एक जुलाई से फाइनल ईयर की परीक्षा शुरू कर देगा। इसके साथ ही 15 दिनों के अंतराल के बाद यूजी द्वितीय वर्ष की परीक्षा शुरू करने की प्लानिंग की गई है। अंतिम वर्ष का परीक्षा शेड्यूल लगभग तय कर दिया गया है, जिसे विवि मंगलवार को जारी कर देगा।

एक परीक्षाएं एक जुलाई से शुरू हो कर अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी रहेंगी। इसके समाप्त होते ही  प्रथम वर्ष की परीक्षा भी शुरू करने की योजना तैयार कर दी गई है। सरकार के आदेश के बाद अब यह तय है कि यूजी डिग्री कोर्स में प्रमोट कोई नहीं किया जाएगा। सोमवार को विश्वविद्यालय की परीक्षा विंग की विभिन्न शाखाओं में 50 फीसदी स्टाफ आने के साथ परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी गई है।

विश्वविद्यालय ने एक जुलाई से फाइनल ईयर की परीक्षा शुरू कर इसे अगस्त के पहले सप्ताह तक समाप्त करने की योजना बनाई है, जबकि  फाइनल ईयर की परीक्षा शुरू होने के पंद्रह दिन के अंतराल के बाद यूजी द्वितीय वर्ष की परीक्षा भी शुरू कर देगा। फाइनल की परीक्षा समाप्त होने पर प्रथम वर्ष की परीक्षा शुरू कर दी जाएगी। परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी ने बताया कि मंगलवार को फाइनल ईयर की परीक्षा की डेटशीट जारी कर दी जाएगी। यूजी द्वितीय और प्रथम वर्ष की परीक्षाओं को अंतराल के  साथ शुरू करने की योजना बनाई गई है। 
एमडी, एमएस और डीएम कार्डियोलॉजी की 30 जून से शुरू होगी परीक्षा  
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने एमडी, एमएस और डीएम कार्डियोलॉजी के आउटगोइंग बैच की वार्षिक परीक्षाओं का शेड्यूल जारी कर दिया है। इसे विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध करवा दिया गया है। परीक्षा तीस जून से शुरू होगी। 
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21 जून से सभी आयु वर्ग के लोगों को बिना स्लॉट बुकिंग लगेगा टीका

हिमाचल प्रदेश में 21 जून से हर आयु वर्ग के लोगों को अब बिना स्लॉट बुक करवाए कोरोना वैक्सीन लगेगी। अभी  तक युवाओं यानी 18 से 44 आयु वालों को वैक्सीन लगाने के लिए स्लॉट बुकिंग करवानी पड़ रही है। 21 जून से युवाओं के लिए भी स्लॉट बुकिंग करवाने का झंझट खत्म हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे वैक्सीनेशन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य के पास अभी भी 45 साल से ऊपर के लोगों के लिए 7 लाख से ज्यादा डोज उपलब्ध हैं।

ऐसे में 21 जून के बाद अब सभी एक ही श्रेणी में आ जाएंगे और यह 7 लाख डोज सभी आयु वर्ग को लगना शुरू हो जाएगी। युवाओं को स्लॉट बुक करवाने के लिए परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। कई लोगों की शिकायत है कि स्लॉट बुक नहीं हो रहे हैं और उनका वैक्सीन लगाने में नंबर आएगा या नहीं, ये सबसे बड़ी दुविधा है। स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि 21 जून के बाद सभी कैटागरी एक हो जाएगी और एक ही वैक्सीन की खेप 21 जून के बाद बिना स्लॉट बुकिंग के 18 से 44 साल के लोगों को भी वैक्सीन लगेगी। केंद्रों की संख्या को भी बढ़ाया जाएगा।
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शोध: सामान्य चीनी के अधिक सेवन से लीवर कैंसर का खतरा

कोविड वैक्सीन(फाइल)
ज्यादा मीठा खाने वाले सावधान हो जाएं। सामान्य चीनी (सुक्रोज) के अधिक सेवन से लीवर कैंसर का खतरा हो सकता है। मीठा अधिक खाने और लीवर (एनएएफएलडी) में अधिक चर्बी के बीच की आणविक प्रक्रिया को आईआईटी मंडी के स्कूल आफ बेसिक साइंसेज के शोधार्थियों ने खोज निकाला है। इसमें पाया गया है कि अधिक चर्बी केवल घी तेल जैसी अधिक वसा वाली चीजों से ही नहीं, सामान्य चीनी से भी हो सकती है। ऐसे में लीवर कैंसर और फैटी लीवर के इलाज को अधिक समझने में चिकित्सक जगत को मदद मिलेगी। 

शोध के परिणाम जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित किए गए हैं। आईआईटी मंडी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रोसेनजीत मंडल शोध पत्र के सह लेखक हैं। इसमें शोधार्थी  सुरभि डोगरा, प्रिया रावत, अभिनव चौबे, जामिया हमदर्द संस्थान, नई दिल्ली के डॉ. मोहन कामथन और आयशा सिद्दीक खान और एसजीपीजीआई लखनऊ के संगम रजक की मदद ली गई है। डॉ. प्रोसेनजीत मंडल ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में फैटी लीवर को नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) कहते हैं।

यह लीवर में बहुत ज्यादा चर्बी जमा होने की चिकित्सकीय समस्या है। शुरू में दो दशक तक लक्षण न दिखने से बीमारी पता नहीं चलती। उपचार न करने पर चर्बी लीवर की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकती है। लीवर जख्मी (सिरोसिस) होकर लीवर कैंसर का रूप धारण कर सकता है। एनएएफएलडी के अधिक गंभीर होने पर उपचार कठिन हो जाता है। केंद्र ने हाल ही में राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग एवं स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम में एनएएफएलडी को भी शामिल किया है।

 देश की लगभग 9 से 32 फीसदी आबादी को एनएएफएलडी लीवर की समस्या
आईआईटी मंडी के शोधार्थी डॉ. विनीत डैनियल ने बताया कि देश की लगभग 9 से 32 प्रतिशत आबादी को एनएएफएलडी लीवर की समस्या है। केरल में 49 प्रतिशत आबादी इससे ग्रस्त है। स्कूली बच्चों में भी जो मोटे हैं, उनमें 60 प्रतिशत में यह समस्या है। एनएएफएलडी के विभिन्न कारणों में एक ज्यादा मीठा खाना है। सामान्य चीनी (सुक्रोज) और कार्बोहाइड्रेट के अन्य रूप में चीनी दोनों इसकी वजह है। ज्यादा मीठा और अधिक कार्बोहाइड्रेट खाने पर लीवर उन्हें चर्बी में बदल देता है। इस प्रक्रिया को हेपेटिक डी नोवो लाइपोजेनेसिस या डीएनएल कहते हैं।
 
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लाहौल के सस्ते राशन के डिपुओं में बिक रहा एक्सपायरी डेट का आटा

 हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में खुलेआम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। यह मामला सोमवार को फेसबुक और सोशल मीडिया में छाया रहा। जनजातीय आबादी के साथ इस तरह के मजाक का लोगों ने कड़ा विरोध किया है। एलपीएस के उपाध्यक्ष मंगल चंद ठाकुर ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि आटा के उपयोग करने की वैधता जनवरी 2021 में खत्म हो गई है।

ऐसे में क्या लाहौल निवासी उपयोग तिथि समाप्त होने के बाद का आटा खाएंगे या फिर सरकार इस पर कोई ध्यान देगी। उन्होंने अपनी पोस्ट में सस्ता आटा समझकर इसे न खाने की लोगों से अपील भी की है। उन्होंने खाद्य आपूर्ति नियंत्रक से अनुरोध किया है कि कारगा गोदाम में जाकर निरीक्षण करें। जिस सामान की वैधता समाप्त हो गई है, उसे लोगों के बीच वितरित करने से रोकें। लाहौल के लोगों ने भी मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है। 

लाहौल घाटी में पीडीएस के अंतर्गत वैधता समाप्त आटा वितरित करने का आरोप लगा है। वितरित किया जा रहा आटा नवंबर 2020 का बना है। आटा की बोरी में उपयोग की तिथि महज 60 दिन अंकित की गई है, जबकि इसे अब 13 और 14 जून से वितरित किया जा रहा है। लाहौल घाटी में यह मामला तब सामने आया, जब चंद्रावैली के डिपो में इस वैधता समाप्त आटा की खेप भेजी गई। जानकारी के मुताबिक 118 क्विंटल के करीब एक रोलर फ्लोर मिल से इसकी खेप आई है। इस मामले को लेकर एसडीएम केलांग राजेश भंडारी ने कहा कि अगर वैधता समाप्त आटा लोगों को वितरित किया जा रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। 
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साहसिक गतिविधियां: पैराग्लाइडिंग से रोक हटी, बीड़ में 12 पायलटों ने भरी उड़ान

एमआईएस से होगी पीएम केयर्स से भेजे गए कंसंट्रेटरों की निगरानी

कोविड-19 के खिलाफ जंग में हिमाचल प्रदेश के राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) के नाम एक और उपलब्धि हो गई है। कोविड टेस्ट की केंद्रीयकृत निगरानी के लिए पोर्टल व मोबाइल एप बनाने के बाद हिमाचल एनआईसी ने एक मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम (एमआईएस) और मोबाइल एप तैयार किया है। इसकी मदद से पीएम केयर्स के जरिये देशभर के सभी राज्यों को मिलने वाले एक लाख ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों की मूवमेंट की निगरानी की जाएगी। एनआईसी हिमाचल के प्रमुख अजय सिंह चहल की एक टीम पंद्रह दिन से यह एप और सिस्टम तैयार करने में जुटी थी। 

 कोरोना की तीसरी लहर से खासकर ग्रामीण इलाकों के हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर तैयार करने के लिए यह कवायद की गई है। जानकारी के अनुसार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दिल्ली से जिस राज्य के जिले के लिए भेजे जाएंगे, उनके वहां प्राप्त होने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर कंसंट्रेटर की पैकिंग में लगे विशेष बार कोड को स्कैन कर फोटो के साथ जानकारी एप पर अपलोड करेंगे। इससे सुनिश्चित होगा कि जिस जगह के लिए जितने कंसंट्रेटर भेजे गए हैं, वहां उतने ही पहुंचे हैं। पीएम केयर्स के पैसे से खरीदे गए वेंटिलेटरों को भेजने के दौरान हुई परेशानी को देखते हुए इस बार सूचना प्रौद्योगिकी की मदद ली जा रही है।

हिमाचल को आज मिलेंगे 773 कंसंट्रेटर
शुरूआती दौर में हिमाचल को ओएनजीसी के जरिये 773 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजे गए हैं। ये मंगलवार तक सूबे के स्वास्थ्य अधिकारियों को मिल जाएंगे। एनएचएम के एमडी डॉ. निपुण जिंदल ने इसकी पुष्टि की है। कंसंट्रेटर पीएम केयर्स के निर्देश पर ओएनजीसी अपने गोदाम से संबंधित जिलों के सीएमओ को भेजेगा और सीएमओ अपने जिले के अंतर्गत आने वाले प्रदेश के कुल 773 ग्रामीण क्षेत्रों के हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों पर इन्हें स्थापित कराएंगे। स्थापित होने के बाद अगले चौदह दिन उनके सुचारु रूप से चलने की जानकारी भी इसी एप में दर्ज की जाएगी। तकनीकी दिक्कत होने पर एप के माध्यम से ही सीधे कंसंट्रेटर बनाने वाली कंपनी तक शिकायत की जा सकेगी। 
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