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हिमाचल में अब निजी स्कूल वसूल सकेंगे पूरी फीस

हिमाचल प्रदेश के लाखों अभिभावकों की जेब ढीली होने वाली है। हिमाचल सरकार ने निजी स्कूलों को पूरी फीस वसूलने की मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक में सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली की शर्त हटा दी है। सनावर स्कूल मामले में हाईकोर्ट से आए फैसले का तर्क देते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। कोरोना के चलते सरकार ने लॉकडाउन के समय निजी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के निर्देश दिए थे। बीते दिनों निजी स्कूलों का पूरी फीस लेने का दबाव बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए कैबिनेट से मांग की थी।

मंगलवार को सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले का पालन करने की बात कहते हुए पूरी फीस वसूली को मंजूरी दे दी है। हाईकोर्ट ने कुछ माह पहले जिला सोलन के निजी स्कूल मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि निजी स्कूलों को सरकार कोई आर्थिक मदद नहीं देती। निजी स्कूलों को भी अपने खर्चे पूरे करने हैं। ऐसे में सरकार फीस नहीं लेने के लिए स्कूलों को बाध्य नहीं कर सकती है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि निजी स्कूल पूरी फीस कब से ले सकेंगे? क्या बीते महीनों की फीस भी पूरी ली जाएगी? इसको लेकर एक-दो दिन के भीतर लिखित आदेश जारी कर उच्च शिक्षा निदेशालय स्थिति स्पष्ट करेगा।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

ऑनलाइन पढ़ाई ने कमजोर कर दिए बच्चों के आंख-कान, सर्वे में हुआ खुलासा

कोरोना संकट के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई विद्यार्थियों का सहारा तो बनी लेकिन, इसके नुकसान भी बहुुत हुए हैं। बच्चों को मोबाइल की लत लग गई है। इसका खुलासा 120 अभिभावकों से ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे और नुकसान के बारे में जानकारी हासिल करने के दौरान हुआ है। मोबाइल पर वर्चुअल कक्षाओं ने बच्चों के आंख-कान कमजोर कर दिए हैं।

कइयों की सुनने की शक्ति कमजोर हुई तो कइयों की आंखें। बच्चे मोबाइल एडिक्शन डिसआर्डर के शिकार हो रहे हैं। इनमें चिड़चिड़ापन आ गया तथा वह अकेले में रहना पसंद करने लगे हैं। पढ़ाई की जगह बच्चों का रुझान सोशल मीडिया और गेम खेलने की तरफ बढ़ गया।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मोगीनंद में साइंस कांग्रेस के लिए हुए सर्वे में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। मोगीनंद स्कूल ने पांच नवंबर के बाद होने वाले साइंस कांग्रेस के लिए एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की है।

शिक्षक संजीव अत्री की देखरेख में पांच विद्यार्थियों सलौनी सिंह, गुंजन, रूपल, हिमांशु और रितिका ने कुल 120 अभिभावकों से ऑनलाइन पढ़ाई के संदर्भ में नफा-नुकसान के बारे में जानकारी ली। सर्वे के बाद जो परिणाम सामने आए वह चौंकाने वाले थे।

सर्वे में सामने आया कि सात विद्यार्थियों की आंखें कमजोर हुईं तो तीन विद्यार्थियों की सुनने की शक्ति में दिक्कत आई है। 11 विद्यार्थियों में आंखों में जलन, नौ में सिरदर्द, 11 को अनिंद्रा की शिकायत हुई। इतना ही नहीं मोबाइल की लत लगने से बच्चों को भूख प्यास का भी ध्यान नहीं है। 12 ऐसे बच्चों की भूख कम हुई। सर्वे में सबसे अधिक 41 बच्चे अनवांटेड एक्टिविटी जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसी सोशल साइटों और गेम खेलने के आदी पाए गए। 82 फीसदी अभिभावक यह तक नहीं जानते कि बच्चे मोबाइल पर क्या करते हैं।

स्कूल के शिक्षक संजीव अत्री ने बताया कि कोरोना संकट के दौरान बच्चों को मोबाइल की लत लग गई है। यह चिंताजनक है। सर्वे में यह खुलासा हुआ है। इसका तोड़ निकालने के लिए स्कूल अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहा है। इसके लिए विशेष मॉडल तैयार किया जाएगा। साइंस कांग्रेस में इस सर्वे की प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश कर सबके समक्ष यह मामला रखा जाएगा। 
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हिमाचल के कालाअंब में लगेगा दूसरा ईटीपी, 100 उद्योगों का गंदा पानी करेगा साफ

हिमाचल के सिरमौर जिला के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में प्रदेश का दूसरा एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) स्थापित होगा। मंत्रिमंडल ने कालाअंब ईटीपी को मंगलवार को मंजूरी दे दी है। वर्तमान में कालाअंब में करीब 100 उद्योग स्थापित हैं। इन उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी और सीवरेज ट्रीटमेंट की कोई व्यवस्था नहीं थी। कालाअंब में लंबे समय से ईटीपी स्थापित करने की जरूरत महसूस की जा रही थी। 

कालाअंब में सामान्य प्रवाह युक्त उपचार संयंत्र स्थापित करने के लिए मैसर्ज कालाअंब इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कंपनी को 19 बीघा भूमि विशेष प्रयोजन वाहन के लिए 95 वर्षों के लिए एक रुपये प्रतिवर्ष प्रति वर्ग मीटर की दर से पट्टे पर देने का निर्णय लिया गया है। निदेशक उद्योग हंसराज शर्मा ने कहा कि 9 करोड़ की लागत से 19 बीघा जमीन में ईटीपी स्थापित किया जा रहा है। प्लांट की क्षमता ढाई एमएलडी है और कालाअंब का प्रदूषण काफी हद तक दूर होगा। अभी तक औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में पहला ईटीपी स्थापित है। 
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हिमाचल में 1439 पद भरने की मंजूरी, शिक्षकों-विद्यार्थियों के लिए राहत, जानें कैबिनेट के बड़े फैसले

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित हुई हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। कैबिनेट ने विभिन्न विभागों में विभिन्न श्रेणियों के करीब 1439 पद भरने की मंजूरी दी। कैबिनेट ने मंडी, सोलन और पालमपुर नगर परिषदों को नगर निगम बनाने का फैसला लिया। इसके अलावा कंडाघाट, अंब, आनी, निरमंड, नेरवा और चिड़गांव को नगर पंचायत बनाने को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। हालांकि इन सबकी अधिसूचना होनी बाकी है। कुल्लू और शिमला जिले से 2-2, सोलन और ऊना जिले से 1-1 नगर पंचायत बनी है। पंचायत चुनाव के साथ ही नए नगर निगमों और नगर पंचायतों के चुनाव जनवरी 2021 में होंगे। वहीं चुनाव खर्च कम करने को धर्मशाला नगर निगम के चुनाव भी साथ होंगे, जबकि शिमला नगर निगम के चुनाव वर्ष 2022 में होंगे।
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हिमाचल में कैबिनेट का फैसला: दो नवंबर से खुलेंगे स्कूल-कॉलेज, इन विद्यार्थियों की लगेंगी नियमित कक्षाएं

हिमाचल कैबिनेट बैठक
हिमाचल में करीब साढ़े सात माह बाद दो नवंबर से स्कूल और कॉलेजों में नियमित कक्षाएं लगाने की प्रदेश कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। नौवीं से 12वीं कक्षा और कॉलेजों में प्रथम, द्वितीय और अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को अभिभावकों के सहमति पत्र पर नियमित कक्षाएं लगाने के लिए प्रवेश मिलेगा। शिक्षण संस्थानों में आने की विद्यार्थियों पर न अनिवार्यता होगी, न हाजिरी लगेगी। ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रहेगी। पहली से आठवीं कक्षा के स्कूल अभी भी बंद रहेंगे। प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में  प्रथम और द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाले करीब 60 हजार विद्यार्थियों को सरकार ने बिना परीक्षा लिए ही अगली कक्षाओं में प्रमोट करने का फैसला लिया है।

कैबिनेट बैठक में सरकार ने केंद्र के एसओपी को लागू किया है। कैबिनेट बैठक की जानकारी देते हुए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि बीते दिनों हुई ई-पीटीएम में अधिकांश अभिभावकों और विद्यार्थियों ने नियमित कक्षाएं शुरू करने की पैरवी की थी। माइक्रो प्लान भी तैयार किए हैं। इन सभी पर विचार के बाद सरकार ने दो नवंबर से स्कूल खोलने का फैसला लिया है।  कोरोना की चपेट में न आने की जिम्मेवारी कोई नहीं ले सकता है, इसके चलते ही अभिभावकों के सहमति पत्र की शर्त रखी है। 



विद्यार्थियों को प्रमोट करने का तरीका
उधर प्रमोट विद्यार्थियों की बीते साल की परीक्षा के 50 फीसदी अंकों, वर्तमान सत्र की आंतरिक परीक्षा के 30 फीसदी और शिक्षकों की असेसमेंट के 20 फीसदी अंकों के आधार पर कुल अंक दिए जाएंगे। अगर कोई विद्यार्थी इन अंकों से नाखुश रहता है तो वह अगले साल पुरानी कक्षा की परीक्षाएं देकर अपने अंक सुधार कर सकता है।

शहीद की बहन को जेओए की नौकरी
3 अगस्त 2017 को आतंकी मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए लाहौल स्पीति निवासी तंजिन छुलटिम की बहन तंजिन डोलकर को डीएफओ लाहौल स्पीति के कार्यालय में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी)  के पद पर नियुक्ति प्रदान करने की मंजूरी भी दी गई है।
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अब कनिष्ठ कार्यालय सहायक के भरे जाएंगे 1756 पद, हिमाचल सरकार ने दी मंजूरी

CoronaVirus in Himachal: छह संक्रमितों की मौत, प्रदेशभर में 243 नए मामले

हिमाचल में तीन नए नगर निगम और छह नगर पंचायत बनाने को कैबिनेट ने दी मंजूरी, जनवरी में होंगे चुनाव

हिमाचल कैबिनेट ने मंगलवार को मंडी, सोलन और पालमपुर नगर परिषदों को नगर निगम बनाने का फैसला लिया। इसके अलावा कंडाघाट, अंब, आनी, निरमंड, नेरवा और चिड़गांव को नगर पंचायत बनाने को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। हालांकि इन सबकी अधिसूचना होनी बाकी है। कुल्लू और शिमला जिले से 2-2, सोलन और ऊना जिले से 1-1 नगर पंचायत बनी है। पंचायत चुनाव के साथ ही नए नगर निगमों और नगर पंचायतों के चुनाव जनवरी 2021 में होंगे। वहीं चुनाव खर्च कम करने को धर्मशाला नगर निगम के चुनाव भी साथ होंगे, जबकि शिमला नगर निगम के चुनाव वर्ष 2022 में होंगे।

  कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि नए नगर निकायों में शामिल क्षेत्रों के लोगों को तीन साल तक कोई भी सामान्य कर नहीं देना होगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में कुछ शहरी स्थानीय निकायों के पुनर्गठन को भी स्वीकृति दी, जिनमें कुछ क्षेत्रों को शामिल किया है, जबकि कुछ बाहर निकालकर जिला मंडी की करसोग, नेरचौक और जिला कांगड़ा में नगर पंचायत जवाली में शामिल किया है। 

8 नवंबर से शुरू होंगे जनमंच 
 सूबे में 8 नवंबर से जनमंच कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। प्रदेश सरकार इसके लिए एसओपी तैयार करेगी। पहले जिला या फिर विधानसभा क्षेत्र में जनमंच कार्यक्रम होते थे, अब गांव में इस कार्यक्रम को किया जाएगा। जनमंच में लोगों की कम भीड़ जुटे, इसके चलते ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 
मंगलवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। हिमाचल में 23 मार्च, 2020 को लॉकडाउन लगा था। इससे पहले विधानसभा बजट सत्र था। ऐसे में हिमाचल में जनमंच कार्यक्रम नहीं हो पाए थे। सरकार का मानना है कि लोगों को अपनी समस्याओं के लिए सचिवालय या फिर विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जनमंच में मौके पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान हो जाता था। ऐसे में सरकार ने फिर से जनमंच कार्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया है। 
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