भारत सरकार की कूटनीतिक जीत, कनाडा सरकार ने खालिस्तान जनमत संग्रह की मांग को नकारा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Jul 2020 07:35 PM IST
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Canadian PM Justin Trudeau
Canadian PM Justin Trudeau - फोटो : ANI

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भारत में अलग खालिस्तान राज्य की मांग को लेकर 'पंजाब 2020 जनमत संग्रह' को कनाडा की सरकार ने खारिज कर दिया है। कनाडा की ट्रूडो सरकार ने साफतौर पर कहा है कि वह ऐसे किसी भी जनमत संग्रह को कोई महत्व या पहचान नहीं देगा जो भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ हो। 
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कनाडा की सरकार द्वारा अमेरिका स्थित सिखों के एक अलगाववादी समूह की पंजाब 2020 के नाम से खालिस्तान राज्य के लिए जनमत संग्रह करवाने की मांग को रद्द करने पर सिखों के नेता और विशेषज्ञों ने इसे भारत सरकार की कूटनीतिक जीत करार दिया है। इस जनमत संग्रह को लेकर कनाडाई सरकार के रुख को लेकर समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा पूछे गए सवाल पर कनाडा के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कनाडा भारत की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है, ऐसे में कनाडा की सरकार जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देगी।
उधर पंजाब के पूर्व डीजीपी शशिकांत ने कहा, 'मैं इसे जनमत संग्रह नहीं मानता क्योंकि जनमत संग्रह किसी देश की सीमा के अंदर होता है। हम अपने देश में बैठकर अमेरिका, यूके या किसी अन्य देश की संप्रभुता के लिए जनमत संग्रह नहीं कर सकते हैं। यह सही नहीं है।' पूर्व डीजीपी शशिकांत ने आगे कहा, 'कनाडा सरकार का इस कथित जनमत संग्रह को महत्व ना देने का फैसला भारत सरकार की विदेश नीति की बड़ी जीत है। दूसरे देश अब भारत की संप्रभुता का सम्मान कर रहे हैं। कनाडा सरकार हमेशा से धार्मिक और नस्लीय समूहों के मामलों में दखल देने से बचती रही है। हालिया बयान उसकी बढ़िया विदेश नीति का एक हिस्सा है।'
पाकिस्तान की आईएसआई चला रही एजेंडा 
ऑल इंडिया ऐंटी टेररिस्ट फ्रंट के चेयरमैन मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने कहा, 'जनमत संग्रह 2020 पाकिस्तान की आईएसआई का एक एजेंडा भर है। आईएसआई ही इसके लिए फंडिंग भी कर रही है। दूसरे देशों में बसे सिख अपने धर्म के काफी करीब हैं और उन्होंने दूसरे देशों में भी धर्म का प्रचार किया है। अगर कुछ लोग खालिस्तान के समर्थन में बोलते भी हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा सिख समुदाय खालिस्तान का समर्थक है।'

बिट्टा ने आगे कहा, 'यह अच्छा है कि कनाडा ने ऐसा बयान दिया है, इसके लिए मैं कनाडा सरकार को धन्यवाद देता हूं। कुछ दिन इंतजार कीजिए, ऐसे ही बयान अमेरिका और यूके की ओर से भी जारी होंगे। अगर सभी देश खालिस्तान समर्थकों पर बैन लगा दें तो यह मांग खत्म ही हो जाएगी। हम चाहते हैं कि ऐसे भारत विरोधी लोगों को दूसरे देश भी भारत के हवाले कर दें, जिससे उनपर कार्रवाई हो सके।' उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे तत्वों से निपटने में कोई समझौता नहीं कर रहे हैं। वह सिख समुदाय के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। चाहे वह करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हो या फिर ब्लैक लिस्ट से सिखों के नाम हटाने की बात हो।

पंजाब में ऐसा कोई आंदोलन नहीं
वहीं, पंजाब के खराड़ से विधायक कंवर संधू ने इस बारे में कहा, 'जहां तक भारत के संविधान की बात है तो ऐसे किसी जनमत संग्रह का प्रावधान नहीं है। ऐसा कोई भी प्रयास सिर्फ प्रोपगेंडा है और कनाडा सरकार ने जो भी कहा है, एकदम सही कहा है। मेरा यही मानना है कि कोई भी चुनी हुई सरकार ऐसे किसी जनमत संग्रह को कभी महत्व नहीं देगी। मेरा मानना है कि पंजाब में ऐसा कोई आंदोलन नहीं है। विदेश में ऐसा करने वाले लोग सिर्फ सिख समुदाय और पंजाबियत को बदनाम कर रहे हैं। कुछ ऐसे युवा, जो इसका मतलब भी नहीं जानते शायद वे भी इसका समर्थन कर रहे हैं लेकिन उनके खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई हो रही है।'
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