तीन केंद्रीय मंत्री जनप्रतिनिधि नहीं, एक सोच के गुलाम: सुष्मिता देव

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Sun, 25 Oct 2020 07:23 AM IST
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Sushmita Dev, President, All India Mahila Congress
Sushmita Dev, President, All India Mahila Congress - फोटो : ANI

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पंजाब की घटना पर तीन केंद्रीय मंत्रियों के बार- बारी कांग्रेस सरकार, राहुल और प्रियंका गांधी पर हमले का जवाब महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रकाश जावेडकर और डा. हर्षवर्धन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये जनप्रतिनिधि नहीं, एक सोच के गुलाम हैं और गुलाम ही रहेंगे।
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सुष्मिता ने कहा कि मुझे दुख है कि भाजपा के तीन नेताओं निर्मला सीतारमण, प्रकाश जावेडकर और हर्षवर्धन जी ने 14 सितंबर से जबसे हाथरस की घटना हुई, पहली बार महिला सुरक्षा पर वो बोले हैं। उनके बोलने का एक ही कारण है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने हाथरस जाने का फैसला लिया उनको उस पर आपत्ति है। उनका मूल उद्देश्य बलात्कार की उस घटना के प्रति संवेदना नहीं है। पीड़िता के परिवार के साथ संवेदनशीलता दिखाने का नहीं है।



उन्होंने कहा कि 'निर्मला सीतारमण जी आपने फिर एक महिला का अपमान किया। वो नारी हाथरस की बेटी है। आज आपने फिर अनदेखी की है फिरोजाबाद की बेटी की जिसे अपराधियों ने घर में घुसकर गोली मार दी। 11 वहीं में पढ़ने वाली उस  बच्ची का अपराध था कि उसने अपने साथ छेड़छाड़ करने वालों का विरोध किया था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपना कर्तव्य पालन करती रहेगी। राहुल और प्रियंका गांधी भी अपना कर्तव्य पालन करते रहेंगे। बलात्कार एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें किसी भी प्रदेश में हो या कोई भी दल, उस प्रदेश में किसी की भी सरकार हो, सबको दुख होता है। वो निर्भया हो, चाहे वो उन्नाव हो, चाहे वो हाथरस की बेटी हो, चाहे वो देश में कहीं भी हो, राजस्थान हो, हरियाणा हो।

हाथरस की घटना के समय निर्मलाजी, जावेडकर जी कहां थे। उन्नाव की बेटी का बलात्कार हुआ कहां थे? आज आप अपनी जुबान एक बच्ची की हत्या पर इसलिए खोल रहे हैं, क्योंकि आप उसका राजनीतिकरण कर रहे हैं। बिहार में चुनाव है इसलिए बोल रहे हैं।

पंजाब सरकार ने 36 घंटों में दोषी को गिरफ्तार किया। आईपीसी और पॉक्सो की धाराओं को एफआईआर में लिखा गया। पंजाब के मुख्यमंत्री और डीजीपी ने खुद इस केस की निगरानी की। मुख्यमंत्री ने खुद सख्त सजा की मांग और वुमेन कमीशन व एससी कमीशन दोनों कमीशन की तरफ से एसएसपी के एक्सप्लॉनेशन को कॉल किया गया।

जबकि हाथरस में सरकार पीड़िता की शिकायत नहीं लिख रही थी। पीड़ित पक्ष को डराया धमकाया जा रहा था जबकि पंजाब में सरकार ने तत्काल कार्रवाई की और पीड़ित पक्ष के साथ खड़ी है। हाथरस के केस में सिर्फ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी नहीं, कई विरोधी दल तृणमूल कांग्रेस, आरएलडी नेता जयंत चौधरी, समाजवादी पार्टी के नेता भी पंहुचे। उसका कारण उत्तर प्रदेश की सरकार, पुलिस और हर अफसर पीड़िता के परिवार पर लगातार अन्याय करता है। निर्मला सीतारमन जी जिसे आप पिकनिक कह रहे हैं उसको हम अपना कर्तव्य मानते हैं।

अगर कोई सोचता है कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों का राजनीतिकरण कर रही है, तो मैं अगला और अंतिम कारण बोल दूं  कि इलाहाबाद की कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सरकार के प्रति जिस तरह का खंडन किया है हाथरस के केस को लेकर, शायद देश के सामने और किसी सबूत की जरुरत नहीं है कि हाथरस कांड में क्या हुआ और देश के किसी और बलात्कार में सरकार का क्या रोल रहा।

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