आर्थिक पैकेज में गरीबों, किसानों और प्रवासी मजदूरों की अनदेखी : चिदंबरम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 18 May 2020 02:18 PM IST
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पी चिदंबरम (फाइल फोटो)
पी चिदंबरम (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

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सार

  • पी चिदंबरम ने प्रोत्साहन पैकेज पर सवाल उठाए
  • चिदंबरम ने कहा, इसने समाज के कई वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं किया है
  • प्रोत्साहन पैकेज जीडीपी का 10 फीसदी होना चाहिए: चिदंबरम

विस्तार

कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार द्वारा जारी किए गए प्रोत्साहन पैकेज पर सवाल उठाए हैं। चिदंबरम ने कहा है कि यह पैकेज निराश करने वाला है और इसने समाज के कई वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं किया है। इसमें आबादी के निचले तबके में शामिल 13 करोड़ परिवार, प्रवासी मजदूर और किसान शामिल हैं।
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चिदंबरम ने सरकार की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में गरीबों, किसानों और मजदूरों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए और 10 लाख करोड़ रुपये के व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि हम इस पैकेज को लेकर निराशा व्यक्त करते हैं और सरकार से गुजारिश करते हैं कि वह इस प्रोत्साहन पैकेज पर पुनर्विचार करें। उन्होंने कहा कि सरकार कम से कम 10 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करें, जो जीडीपी के 10 फीसदी के हिस्से के बराबर हो।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि 1,86,650 करोड़ रुपये का राजकोषीय प्रोत्साहन, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मुश्किल से 0.91% हिस्सा है। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक संकट और गंभीर स्थिति को देखते हुए यह पैकेज पूरी तरह अपर्याप्त होगा।

चिदंबरम ने कहा कि अधिकांश विश्लेषकों, रेटिंग एजेंसियों और बैंकों ने राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज की राशि को 0.8 से 1.5% के बीच रखा है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने और कांग्रेस ने ध्यान से पांचों खंडों की सामग्री का विश्लेषण किया है और अर्थशास्त्रियों, विशेषज्ञों, एजेंसियों और बैंकों द्वारा लगाए गए विश्लेषणों पर ध्यान दिया है। हमारा यह मानना है कि इसमें सिर्फ 1,86,650 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज है। 

कांग्रेस नेता ने विस्तार से बताया कि हमने नोट किया कि राजकोषीय पैकेज ने कई वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं किया है, जिसमें आबादी का निचला हिस्सा (13 करोड़ परिवार), प्रवासी मजदूर, किसान, भूमिहीन किसान, दैनिक मजदूरी करने वाले गैर-कृषि मजदूर और सामान्य मजदूर शामिल हैं।

चिदंबरम के मुताबिक आर्थिक पैकेज की कई घोषणाएं बजट का हिस्सा हैं और कई घोषणाएं कर्ज देने की व्यवस्था का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया था कि अतिरिक्त व्यय को अतिरिक्त उधार द्वारा वित्तपोषित किया जाना चाहिए।

जिस मनरेगा का मजाक उड़ाया आज वह संजीवनी का काम कर रही
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री के पांच दिनों के धारावाहिक से देश के गरीबों, मजदूरों, किसानों और मध्य वर्ग के लोगों को सिर्फ निराशा हाथ लगी है।

उन्होंने कहा कि यह जुमला पैकेज है। वित्त मंत्री ने जो पांच दिनों तक धारावाहिक दिखाया है उससे साबित होता है कि इस सरकार को गरीबों की कोई चिंता नहीं है। लोगों की दर्द की अनदेखी की गई है। सुप्रिया ने कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद के पटल पर मनरेगा का मजाक बनाया था। आज वही मनरेगा ग्रामीण भारत में संजीवनी का काम कर रही है। 

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