लॉकडाउन के फायदों को खोना नहीं चाहती सरकार, कुछ ढील के साथ आगे भी जारी रहेगा, कई सीएम भी पक्ष में

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Apr 2020 06:07 PM IST
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modi interacting with chief ministers
modi interacting with chief ministers - फोटो : ANI
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सार

  • 13 अप्रैल को लॉकडाउन पर निर्णय की पूरी उम्मीद
  • कई राज्यों के मुख्यमंत्री थोड़ी राहत के साथ लॉकडाउन के जारी रखने के पक्ष में
  • देश के हॉटस्पॉट क्षेत्र में जारी रहेगी धारा 144, कर्फ्यू
  • रैंडम सैंपलिंग के मॉडल को अपनाएगी सरकार

विस्तार

कई राज्यों के मुख्यमंत्री लॉकडाउन से मिले संक्रमण के फैलाव के सीमित होने के फायदे को खोना नहीं चाहते। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी इसके पक्ष में हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सचिवालय भी कुछ छूट के साथ लॉकडाउन के साथ जारी रहने के पक्ष में है।
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मध्यप्रदेश के सचिवालय के सूत्र ने भी लॉकडाउन के फायदे गिनाए हैं। 13 अप्रैल को इस पर अंतिम निर्णय होने के आसार हैं। केंद्रीय मंत्रियों के समूह की बैठक में भी मंगलवार को लॉकडाउन को लेकर चर्चा हुई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्र ने बताया कि देश में कुछ राज्य और 100 के करीब क्षेत्र संवेदनशील बने हैं। विशेष सतर्कता की आवश्यकता 62-65 स्थानों पर महसूस की जा रही है। ऐसे में कुछ सहूलियत देकर लॉकडाउन को आगे जारी रखने का निर्णय होने के आसार हैं।

15 अप्रैल के बाद बदलेगा नक्शा

नीति आयोग के सदस्य और कोविड-19 से जंग के लिए बनी समिति के अध्यक्ष डा. विनोद पॉल ने अमर उजाला से बातचीत में भरोसा दिलाया है कि 15 अप्रैल के बाद संक्रमण से लड़ने में देश का नक्शा बदलेगा। इसकी पड़ताल करने पर सूत्र बताते हैं कि 15 अप्रैल तक हर राज्य के पास मास्क, चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए किट, आइसोलेशन के लिए बेड, वार्ड आदि उपलब्ध हो जाएंगे।

हर राज्य के पास जांच के लिए पूरे संसाधन हो जाएंगे और बड़े पैमाने पर जांच की जा सकेगी। इसलिए अब राज्य सरकारें, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश, जरूरत के हिसाब से बड़े पैमाने पर जांच को आगे बढ़ाने में सक्षम हो जाएंगी।

ऐसे में कोविड-19 से जंग के शीर्ष रणनीतिकार इसके पक्ष में हैं कि हॉटस्पॉट वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रैंडम सैंपलिंग, टेस्टिंग की जाए। जहां अधिक संक्रमित हैं, उस क्षेत्र को क्वारंटीन किया जाए। संक्रमितों का परीक्षण करके उनका इलाज हो, ताकि कोविड-19 पर विजय पाई जा सके।

लॉकडाउन बढ़ाने के पक्ष में कई मुख्यमंत्री 

कई राज्यों के मुख्यमंत्री लॉकडाउन को 14 अप्रैल के बाद भी जारी रखने के पक्ष में हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत छह सीएम अब तक लॉकडाउन बढ़ाने का समर्थन कर चुके हैं। 

एक दिन पहले तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव लॉकडाउन को दो हफ्ते बढ़ाने की सिफारिश कर चुके हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, केरल के सीएम पिनराई विजयन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी हालात सुधरने तक लॉकडाउन बढ़ाने के पक्ष में हैं।

राजस्थान, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों ने पहले से अपनाई है नीति

राजस्थान में अभी भी 40 स्थानों पर कर्फ्यू है। राज्य सरकार के रणनीतिकारों ने भीलवाड़ा क्षेत्र को पूरी तरह से क्वारंटीन में बदलकर रैंडम टेस्टिंग का सहारा, इलाज करके क्षेत्र में संक्रमण को काबू में किया। तीन हजार टीमों ने छह लाख घरों तक पहुंचकर 30 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की। हालांकि जयपुर का रामगंज एरिया हॉट स्पॉट बना है। अब इसी मॉडल पर महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों ने भी इसे अपनाने का मन बनाया है।

हरियाणा ने भी, जहां संक्रमित मिले यही किया। पंजाब भी यही कर रहा है। दिल्ली सरकार भी इसी तरह के मॉडल अपनाने जा रही है। निजामुद्दीन, दिलशाद गार्डेन समेत कई इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने जा रही है।

दिल्ली सरकार ने 24 हजार पीपीई किट का आर्डर दिया था, मुख्यमंत्री केजरीवाल के अनुसार बुधवार तक यह मिल जाएंगे। इसी तरह से शुक्रवार तक एक लाख टेस्टिंग किट आ जाएंगी। इसके बाद दिल्ली सरकार जांच के काम और इलाज की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएगी।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत अन्य राज्य सरकारें भी व्यवस्था करके इसी तरह के मॉडल पर आगे बढ़ रही हैं। सब केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों से तालमेल करते हुए आगे बढ़ रही हैं।  

लॉकडाउन में सूझबूझ से रियायत जरूरी

केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के अधिकारी या राज्य सरकारो के अफसर हों, सबकी समस्या एक है। इस समय किसानों की रबी की फसल तैयार है। इसी समय खरीद होती है। न हुई तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बैठने का जहां खतरा पैदा हो जाएगा, वहीं सरकार के गोदाम भी अनाज से खाली रहेंगे।

कई राज्यों में मड़ाई आदि का काम हारवेस्टर समेत अन्य विधि से होता है। इसी तरह से चिकित्सा समेत अन्य क्षेत्र में संसाधनों के लिए इंडस्ट्री को भी कुछ रियायतें नहीं मिल पाईं तो कच्चे माल का स्थानांतरण समेत तमाम समस्याएं आएगी। सूत्र बताते हैं कि पर्यटन के लिए गए हजारों लोग भी जगह-जगह फंसे पड़े हैं।

इसलिए केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ आपसी सहमित से लॉकडाउन के उपायों पर ठोस रणनीति बनाकर निर्णय ले सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है। निश्चित रूप से लॉकडाउन से फायदा हुआ है।

सोशल डिस्टेंसिंग के कारण संक्रमण फैल नहीं पाया। अभी भी इसका दायरा अन्य देशों के मुकाबले सीमित है। इसलिए हमें इसे खोना नहीं चाहिए। लोगों के बीच में सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखते हुए 14 अप्रैल के बाद का निर्णय लेना चाहिए। अशोक गहलोत से मिलती जुलती राय ही केंद्र सरकार के रणनीतिकारों की भी है।

लेकिन लॉकडाउन पूरी तरह नहीं खोल सकते

केंद्र सरकार के रणनीतिकार लॉकडाउन के बाद अब तक आए नतीजे से काफी उत्साहित हैं। एक शीर्ष अधिकारी के कहते हैं, सच कहें तो इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में अभी कोविड-19 का संक्रमण काबू में है। कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें तो कहीं से भी कोई घबराने वाली सूचना नहीं है।

हमें भरोसा है कि 15 अप्रैल के बाद इन स्थानों पर सरकार तेजी से काबू पा लेगी। प्रधानमंत्री के सलाहकारों में शामिल सूत्र कहना है कि हम जांच का दायरा बढ़ाने जा रहे हैं। इसके कारण अप्रैल के तीसरे सप्ताह से कोविड-19 के संक्रिमितों की संख्या बढ़ेगी, मरने वालों की संख्या कुछ बढ़ेगी, लेकिन संक्रमण काबू में आना शुरू हो जाएगा।
 
माना जा रहा है कि जहां से अभी संक्रमितों के अधिक संख्या में मामले हैं, उस क्षेत्र में कर्फ्यू जैसे हालात, धारा 144, सोशल डिस्टेसिंग के पालन जैसी शर्त सख्ती के साथ रह सकती है। जहां इससे कम मामले होंगे, वहां के लिए थोड़ी ढील के साथ सरकार आगे बढ़ेगी।

सूत्र का कहना है कि अपने देश की स्थिति और दुनिया के देशों के अपनाए उपायों पर गौर करके भारत पूरे तालमेल वाली रणनीति बनाकर संक्रमण रोक रहा है। हम इसमें सफल होंगे।

प्रधानमंत्री को है जंग जीतने का भरोसा

प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके भी कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ जंग जीतना है। प्रधानमंत्री ने इसके लिए अलग-अलग स्तर पर सुझाव, प्रयास और कोविड-19 से जंग के लिए कमेटियां बनाई है। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद पहल कर रहे हैं।

मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष राजनाथ सिंह हर रोज बैठक करके प्रधानमंत्री को अवगत कराते हैं। केंद्रीय सचिव राजीव गौबा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्ष वर्धन, स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन खुद रिपोर्ट लेकर प्रधानमंत्री को हर रोज अवगत कराते हैं।

इस सिलसिले में 11 उच्च स्तरीय समितियों की रिपोर्ट अहम होगी। डा. विनोद पॉल की अध्यक्षता में बनी समिति के सुझाव तथा राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सलाह पर गौर करके ही प्रधानमंत्री देश हित में निर्णय ले रहे हैं।
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