केरल के डॉक्टरों ने किया खुलासा, वायरस ने पहली मरीज की श्वेत रक्त कोशिकाओं को बनाया था शिकार

परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Updated Sat, 06 Jun 2020 05:26 PM IST
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Coronaindia, Coronavirus Test
Coronaindia, Coronavirus Test - फोटो : Social Media

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भारत में कोरोना वायरस के चार महीने पूरे हो चुके हैं। 30 जनवरी को देश का जो पहला मरीज कोरोना से संक्रमित मिला था, उसमें 17 दिन तक वायरस सक्रिय रहा था। यह 20 वर्षीय छात्रा 23 जनवरी को वहां से लौट कर आई थी और तीन दिन बाद ही लक्षण सामने आने लगे थे। पैदल के डॉक्टरों ने देश के पहले कोविड-19 की केस स्टडी का खुलासा करते हुए बताया कि इस छात्रा के शरीर में कोरोना वायरस ने सबसे पहले श्वेत रक्त कोशिकाओं को निशाना बनाया था। 23 दिन तक चिकित्सीय निगरानी में रहते हुए 10 से 12 बार छात्रा की कोरोना वायरस की जांच भी कराई गई। लेकिन शुरुआती 17 दिन (नौ बार) में उसके गले से सैंपल लेकर जांच करने में वायरस सक्रिय मिला।
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इंडियन जर्नल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईजीएमआर) विकसित इस केस स्टडी को त्रिचूर सरकारी मेडिकल कॉलेज के छह विभागों ने मिलकर तैयार किया है। इसमें छात्रा की क्लीनिकल लेबोरेटरी स्टडी भी साझा की गई है। जिसमें वायरस की पुष्टि होने के ठीक एक दिन बाद उसके शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या 5,300 थी रक्त में पाई जाने वाली श्वेत और लाल रक्त कणिका में शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि इनकी कमी होती है तो शरीर में कई जानलेवा बीमारियां घर कर जाती है। श्वेत रक्त कोशिकाएं संक्रामक रोगों और बाह्य पदार्थों से शरीर की रक्षा करने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं हैं।
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