धोखेबाज चीन : लोहे की रॉड में कील और बेंत में लगे नुकीले तारों से हुआ सैनिकों पर हमला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 18 Jun 2020 03:47 PM IST
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चीन के सैनिकों ने कुछ इस तरह के कंटीली रॉड से भारतीय जवानों पर हमला किया था (प्रतीकात्मक तस्वीर)
चीन के सैनिकों ने कुछ इस तरह के कंटीली रॉड से भारतीय जवानों पर हमला किया था (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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भारत और चीन के बीच गलवां घाटी में बिना हथियार के हुई लड़ाई में चीन की सेना ने क्रूरता के साथ भारतीय सेना पर हमला किया था। जानकारी के अनुसार चीन की सेना ने धोखेबाजी कर बड़ी ही बबर्रता से भारतीय सेना के जवानों पर कील लगी लोहे की रॉड और बेंत में लगे नुकीले तारों से हमला किया।
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यही कारण है कि बिना गोली चले भी बीस जवान शहीद हो गए। जानकारों का कहना है कि इन चीनी रॉड्स से भारतीय सैनिकों को गंभीर चोटें आईं। लोहे की रॉड और बेंत पर कील और तार से जवानों पर तेज वार किए।
लोहे की कील और कांटे के कारण अधिक खून बहने, भीतर तक गंभीर चोट लगने के कारण बिना हथियार के ही इतने जवानों की जान चली गई। अचानक हुए हमले को लेकर भारतीय सैनिक जब तक कुछ समझ पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
यह भी पढ़ें-भारत-चीन: तनाव कम करने को मेजर जनरल स्तर की वार्ता शुरू, बुधवार को भी हुई थी बात


पीठ में खंजर घोंपा
ट्विटर पर चीन की सेना द्वारा बर्बर हथियारों के इस्तेमाल की तस्वीरें वायरल होने के बाद लोग उसकी भर्त्सना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि चीन ने पीठ पर खंजर घोंपने का काम किया है। लोगों का कहना है कि भारतीय सेना पर बर्बरतापूर्ण हमले ने साबित कर दिया है कि चीन कितना क्रूर है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पर जिस तरह से चीन ने निहत्थे भारतीय सैनिकों पर हमला किया है, वो कायरता है और मानवता के खिलाफ है।

आखिर क्यों नहीं चली गोली
भारत-चीन में समझौतों के अनुसार एलएसी के दो किलोमीटर के दायरे में बंदूक और विस्फोटक का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। दोनों देशों में सहमति है कि आर्थिक व नागरिक संबंध बेहतर और परिपक्व होने पर सीमाओं के मसले सुलझाए जाएंगे। यह भी तय किया हुआ है कि कैसे भी मतभेद हों, सीमा पर उनका प्रभाव नहीं हो। अब तक इसे माना भी गया।

इसलिए, चीन के साथ करीब 3500 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कितना भी बड़ा तनाव हो, हाथापाई होकर रह जाती है। सीमा पर अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों के पास हथियार नहीं होते हैं, अफसरों के हथियारों का मुंह नीचे की तरफ रहता है। एलएसी पर तैनात दोनों तरफ के सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जाता है कि हथियार का इस्तेमाल नहीं होगा।
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