भारतीय मछुआरों की हत्या : इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ मामला बंद कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Jul 2020 09:21 PM IST
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साल 2012 में इटली के नौसैनिकों द्वारा दो भारतीय मछुआरों को गोली मारने के मामले को भारत सरकार ने बंद करने का फैसला किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह इस मामले में ट्रिब्यूनल के फैसले को स्वीकार करती है और इस पर विराम लगाने के लिए तैयार है। केंद्र ने यह कदम नीदरलैंड के हेग में मध्यस्थता अदालत के उस फैसले के बाद लिया है जिसमें कहा गया था कि यह मुकदमा भारत नहीं बल्कि इटली में ही चलेगा। 
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केंद्र ने कहा है कि ट्रिब्यूनल के उस फैसले को उसने स्वीकार कर लिया है जिसमें कहा गया कि भारत इस मामले में मुआवजे का हकदार है। लेकिन वह इन सैनिकों को प्राप्त शासकीय छूट की वजह से उन पर मुकदमा नहीं चला सकता। बता दें कि इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने इस मामले में भारत के छतिपूर्ति के दावे को भी स्वीकार किया था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मछुआरों की मौत के लिए भारत को मुआवजा मिलना चाहिए। मुआवजे की राशि को लेकर भारत इटली से बात कर सकता है। 

केरल के मुख्यमंत्री बोले- हम फैसले के पक्ष में नहीं

केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य इटली के दो नौसैनिकों के खिलाफ दायर मामले को उच्चतम न्यायालय से वापस लेने के पक्ष में नहीं था। विजयन ने कहा, ' यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में मुकदमा नहीं चलाया जा रहा है। कुछ मीडिया खबरों से पता चलता है कि हम न्यायाधिकरण के समक्ष बेहतर तरीके से अपनी दलीलें पेश करने में असमर्थ थे। हालांकि, मुआवजा सुनिश्चित करने को लेकर हमारे देश को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।' उन्होंने कहा कि अगर केंद्र मामले को वापस लेने की योजना बना रहा है, केरल इसके पक्ष में नहीं है और केंद्र को इस बारे में सूचित करेगा।

इटली के नौसैनिकों पर है भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप

बता दें कि इटली के दौ नौसैनिकों मैसिमिलियानो लातोरे और सलवातोरे गिरोने पर 15 फरवरी 2012 को दो भारतीय मछुआरों की हत्या करने का आरोप है। ये दोनों नौसैनिक एनरिका लेक्सी नामक जहाज पर सवार थे। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में इटली ने कहा था कि जहाज के चालक दल के सदस्यों ने भारतीय मछुआरों पर गोली इसलिए चलाई थी क्योंकि उन्हें लगा था कि वे समुद्री लुटेरे हैं।

न्याय क्षेत्र का मुद्दा बना था बड़ा विषय

इस मामले के न्याय क्षेत्र का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक बड़ा विषय बन गया था। इस संबंध में भारत का कहना था कि यह घटना भारतीय जल क्षेत्र में हुई और मारे गए मछुआरे भी भारतीय थे। इसलिए इस मामले की सुनवाई भारतीय कानूनों के अनुसार होनी चाहिए। वहीं इटली ने दावा किया था कि गोलीबारी भारतीय जल क्षेत्र से बाहर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई थी और उसके नौसैनिक इतालवी ध्वज के वाले जहाज पर सवार थे।

इटली के कहने पर हुआ था न्यायाधिकरण का गठन

इस विवाद के संबंध में इटली के अनुरोध पर 2015 में यूएनसीएलओएस की धाराओं के तहत न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार की रात को इस मामले में कहा था कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने फैसला दिया कि भारत जीवन के नुकसान सहित अन्य नुकसान को लेकर मुआवजे का हकदार है। न्यायाधिकरण ने यूएनसीएलओएस (UNCLOS) के प्रावधानों के तहत भारतीय अधिकारियों के आचरण को सही करार दिया था।
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