विज्ञापन

भारत और जापान को जोड़ने वाले पर्यटक

Ramchandra Guhaरामचंद्र गुहा Updated Sun, 29 Dec 2019 02:23 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
यह कॉलम क्रिसमस के दिन लिखा जा रहा है और पाठकों तक नए साल से थोड़ा पहले पहुंचेगा। मैंने सोचा कि कम से कम इस हफ्ते मुझे आज के 'किसी ज्वलंत मुद्दे' के बजाय कुछ अलग विषय पर लिखना चाहिए। सो, यह इस तरह है। जापानी पर्यटकों की एक आम छवि है कि वे किसी देश में हड़बड़ी में किसी स्मारक या तीर्थस्थल पर जाते हैं, तस्वीरें खींचते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं। एक वेबसाइट ने उनके बारे में कुछ यों दर्ज किया है, 'जापानी पर्यटक दुनिया में हर जगह नजर आते हैं। वे किसी ऐसे पर्यटकों के दल का हिस्सा होते हैं, जिसमें एक गाइड एक छोटा-सा झंडा हाथ में रखे होता है और पूरे दल को तेजी से दिन भर दौड़ाता रहता है। 
विज्ञापन
ये पर्यटक कैमरे, वीडियो रिकॉर्डर और संभवतः चिड़िया की आवाज दर्ज करने के लिए टेप रिकॉर्डर जैसे सामान से लदे होते हैं। उनके कपड़े भी तकरीबन यूनिफॉर्म जैसे होते हैं और दल के सदस्यों के कपड़ों में मामूली-सा फर्क होता है। टूर में शामिल विभिन्न दल एक जैसे भ्रमण कार्यक्रम पर अमल करते हैं और एक जैसी पर्यटक बसों में सफर करते हैं और प्रत्येक दल के सारे सदस्य एक जैसा व्यवहार करते दिखते हैं।' (एनएकेएएसईएनडीओडब्ल्यूएवाई डॉट कॉम) 21 वीं सदी में विभिन्न देशों के बीच पर्यटन पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। 

आप कम समय में किसी विदेशी जमीन से जाना-आना कर सकते हैं, और आप जिन जगहों को जल्दी में देखना चाहते हैं, तो आप ऐसा भी कर सकते हैं। इसीलिए हम भारतीय जापानी पर्यटकों को ताजमहल, अजंता और एलोरा, विक्टोरिया मेमोरियल, हुमायूं का मकबरा और ऐसे सैकड़ों स्थलों में तेजी से घूमते देख सकते हैं। लेकिन एक समय ऐसा नहीं था, जैसा कि मुझे 19वीं और 20वीं सदी में भारत आए जापानी पर्यटकों के एक मनोरंजक विवरण को पढ़ते हुए महसूस हुआ। गौर करने वाली बात यह है कि ये सिर्फ मजे के लिए आए पर्यटक नहीं थे, बल्कि ये जिज्ञासु और तीर्थयात्री थे। रिचर्ड जैफ की नई किताब, सीकिंग शाक्यमुनि, साऊथ एशिया इन द फॉरमेशन ऑफ मॉडर्न जापनीज बुद्धिज्म में उनकी कहानियां दर्ज की गई हैं। 

भारत में सबसे पहले आने वाले जापानी पर्यटकों में एक नन्जो बुनयू (1849-1927) शामिल थे और उन्होंने ऑक्सफोर्ड में मैक्स मूलर के साथ संस्कृत की पढ़ाई की थी और उनकी जिज्ञासा उन्हें बुद्ध की जमीन तक खींच लाई। नन्जो 1887 में भारत आए थे। उनके बाद अनेक जापानी अध्येता बौद्ध स्थलों को देखने के लिए भारत, या सिलोन या फिर दोनों जगह आए। जैफ लिखते हैं, 'शुरुआती जापानी बौद्ध पर्यटकों की दक्षिण एशिया के इन दूरस्थ क्षेत्रों की ये यात्राएं यूरोप से जापान जाते हुए अपनी सुविधा से पर्यटन के लिहाज से की गई यात्राएं नहीं थीं। जापानियों की दक्षिण एशिया के 

बौद्ध तीर्थस्थलों की ये जोखिमभरी यात्राएं
19वीं सदी के अंत और बीसवीं सदी की शुरुआत में जापान के बौद्ध स्थलों में दक्षिण एशिया द्वारा निभाई गई अहम भूमिका को रेखांकित करती हैं।' कुछ यात्री स्थलों तक आए और वहां से लौट गए। तो कुछ अन्य यहां भारतीय पंडितों से भाषाएं सीखने और प्राचीन पाठ का अध्ययन करने आए, ताकि वे बुद्ध की सच्ची शिक्षा और धर्मादेश को लेकर बेहतर समझ विकसित कर सकें। ये अध्येता दक्षिण एशिया में बुद्धिज्म से जुड़ी किताबें, अवशेष, और कलाकृतियां अपने साथ लेकर गए और अपनी तथा हमारी भूमि के संबंध को और आगे बढ़ाया। 

उन्होंने भारत और श्रीलंका में जो कुछ भी देखा और अध्ययन किया उसके आधार पर जापानी बौद्ध धार्मिक अभ्यासों और वास्तु शैली को फिर से आकार देने में मदद की। जैफ ने दिखाया कि कैसे 19वीं सदी की दो महान प्रौद्योगिकी भाप से चलने वाले जहाज और रेलवे ने जापान और भारत के बीच यात्राओं को सक्षम बनाया। पहले जापान और दक्षिण एशिया के बीच यात्रा सुगम हुई और फिर दक्षिण एशिया के भीतर। बीसवीं सदी की शुरुआत तक तो भारत और जापान के बीच खासतौर से कपास और कपास से बने उत्पादों का फलता-फूलता व्यापार होने लगा, जिसने इन दो महान और प्राचीन संस्कृतियों के बीच मेल-मिलाप को मजबूती दी, जो कि अन्यथा व्यापक रूप से संपर्क में नहीं थे। 

सांस्कृतिक आदान-प्रदान की प्रक्रिया को सुगम बनाए जाने की घटना को पैन-एशियनिज्म यानी अखिल एशियावाद की अवधारणा कहा गया, जिसके तहत एक्टिविस्ट्स और विचारकों ने यूरोप के प्रभुत्व को खत्म करने के लिए अंतर-सामुद्रिक एकता का नेटवर्क बनाने के प्रयास किए। पैन-एशियनिज्म दो रूपों में आया; एक ने 'सभी एशियाइयों के बीच आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया और उन्हें भौतिक रूप से उन्मुख यूरोपीय और अमेरिकियों के बरक्स खड़ा किया' और दूसरा राजनीतिक रूप से प्रेरित था, 'जिसमें यूरोपीय और अमेरिकी औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष में जापान एशियाई देशों के गठबंधन का न्यायसंगत और अपरिहार्य नेता था।' 

जैफ लिखते हैं कि इस दूसरी तरह के पैन एशियनिज्म में, जापान, अपने सफलतापूर्वक आधुनिकीकरण, सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण अकेला ऐसा देश था, जो यूरोप और अमेरिका के खिलाफ संघर्ष में अन्य एशियाई देशों का नेतृत्व कर सका। शाक्यमुनि का अनुसरण करने वाले एक केंद्रीय शख्स थे कावागुची एकाई (18866-1945), जो कि एक जापानी अध्येता थे और जिन्होंने करीब दो दशक भारत और तिब्बत में बिताए थे, जिनमें से सात वर्ष तो उन्होंने अकेले बनारस में गुजारे। हिंदुओं के पवित्र शहर में शिक्षकों के साथ उनकी दिनचर्या कैसी थी, इसे जैफ ने इस तरह से दर्ज किया है, 'कावागुची रोज सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाते और पद्मासन की मुद्रा में जेन ध्यान करते और फिर स्नान। 

इसके बाद तीन मिनट का चायकाल होता, उसके बाद कावागुची 9.30 बजे तक धम्मसंगनी के अंग्रेजी अनुवाद का अध्ययन करते, इसके बाद वह दो घंटे तक अपना ध्यान संस्कृत पढ़ने और व्याकरण के अभ्यास में लगाते। इसके बाद आधे घंटे का समय भोजन और विराम के लिए होता, फिर दो से पांच बजे तक वह मौखिक रूप से संस्कृत अनुवाद का अभ्यास करते, फिर 6.30 बजे संस्कृत व्याकरण को दोहराते, साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक कावागुची कक्षा में शामिल होते, इसके बाद दस बजे रात तक अनुवाद का मौखिक अभ्यास जारी रहता और उसके एक घंटे बाद तक उसे दोहराते!' 

हम आज जैसे जापानी पर्यटकों को जानते हैं, वह उनसे एकदम अलग तरह के 'पर्यटक' थे। आधुनिक भारत की राजनीतिक कल्पना में जापान वह जगह है, जिसने सुभाष चंद्र बोस और उनकी इंडियन नेशनल आर्मी को मदद दी थी। आधुनिक भारत की प्रौद्योगिकी कल्पना में जापान वह जगह है, जो मुंबई और अहमदाबाद के व्यापारिक केंद्रों को जल्दी और कुशलतापूर्वक जोड़ देगा। 

सीकिंग शाक्यमुनि, हमें आईएनए और बुलेट ट्रेन के काफी पहले के दौर में ले जाती है, जब भारतीयों की महान चीजों की ओर जापानियों के आध्यात्मिक झुकाव के कारण दोनों देश करीब आए थे। यह कॉलम अब 2020 में प्रकाशित होगा और मुझे संदेह है कि, चीजें जिस तरह से घट रही हैं, उसमें अतीत के किसी स्वर्णिम अध्याय की याद के बजाय एक बार फिर आज के किसी विवादित मुद्दे पर उसे केंद्रित करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Election
  • Downloads

Follow Us