परिवार के साथ सामूहिक आत्महत्या करने वाले कारोबारी की आखिरी इच्छा भी रह गई अधूरी!

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Dec 2019 06:31 PM IST
विज्ञापन
murder and suicide in ghaziabad
murder and suicide in ghaziabad - फोटो : अमर उजाला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
गाजियाबाद के इंदिरापुरम में अपने परिवार के साथ सामूहिक आत्महत्या करने वाले कारोबारी गुलशन वासुदेव की अंतिम इच्छा भी अधूरी रह गई। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने सभी परिजनों का अंतिम संस्कार एक साथ किए जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनकी दूसरी पत्नी और सहकर्मी संजना के परिवार वाले उनके शव को अपने साथ ले गये। परिवार अपनी बेटी का अंतिम संस्कार अपने धार्मिक रीति-रिवाज के मुताबिक करना चाहता था।
विज्ञापन

दरअसल संजना मुस्लिम समुदाय से थीं और गुलशन वासुदेव के संपर्क में आने के बाद उन्होंने अपना नाम चांदनी से बदलकर संजना रख लिया था। संजना के परिवारवालों की इच्छा के कारण हिंडन नदी के किनारे बने मुक्तिधाम श्मशान घाट पर केवल गुलशन वासुदेव, उनकी पत्नी परवीन, बेटी ऋतिका और बेटे ऋतिक का अंतिम संस्कार किया गया। पिता और मां के चिताओं के बीच दोनों बच्चों की चिता बनाई गई। उनके बड़े भाई विपिन वासुदेव ने सभी को मुखाग्नि दी। लेकिन संजना के लिए बिछाई गई चिता खाली रह गई।

दर्द से कराह उठा घाट

इस ह्रदय विदारक घटना को सुनने के बाद परिवार ही नहीं आसपास के लोग भी स्तब्ध हैं। उनके निवास स्थान झिलमिल कालोनी और व्यापार स्थल लाल क्वार्टर और गांधी नगर में उनके करीबी भी हैरान हैं। उनके एक करीबी परिवार के इस तरह उजड़ जाने से किसी से कुछ कहते-सुनते नहीं बन रहा है। यह खबर सुनकर श्मशान घाट पर भारी संख्या में लोग पहुंचे. गुलशन वासुदेव (हरीश) के सबसे बड़े भाई विपिन वासुदेव ने सबकी चिता को मुखाग्नि दी। इस दुखद मौके पर पूरे परिवार और दोस्तों की आंखों से आंसू आ गए। पूरा वातावरण इस असहनीय गम से बोझिल था।

काश बच्चों को रोक लेती

गुलशन वासुदेव (हरीश) की मां शारीरिक रूप से काफी कमजोर थीं। यही कारण है कि उनकी परवरिश उनकी भाभी अचला वासुदेव ने की थी। वे यह कहते हुए फफक पड़ीं कि जिसे अपने बच्चे की तरह पाला था, ख्वाब में भी सोचा न था कि एक दिन उसका अंतिम संस्कार भी अपने ही हाथों से करना पड़ेगा। व्यापार में बेहतर ढंग से सेटल हो जाने के बाद हरीश झिलमिल कालोनी छोड़कर दूर रहने लगे थे। लेकिन बच्चों का आना-जाना अक्सर लगा रहता था। कभी-कभी बच्चे उनके घर पर रुक भी जाते थे। घटना वाली रात के एक दिन पहले भी बच्चे उनके घर आये थे। अब वे सिर्फ ये कहते हुए अफसोस कर रही हैं कि काश उन्होंने बच्चों को अपने घर रोक लिया होता।

जिंदगी चुनी थी तो आत्महत्या क्यों की?

संजना सीलमपुर की रहने वाली थीं। नौकरी की तलाश नें उन्हें गुलशन वासुदेव से मिलवा दिया था। धीरे-धीरे वे उनका पूरा कारोबार संभालने लगीं। कुछ लोगों का कहना है कि इसी बीच दोनों करीब आ गये थे और लगभग साल भर पहले विवाह भी कर लिया था। संजना की मां नूरजहां ने बताया कि उसकी खुशी के आगे हमनें कोई सवाल नहीं किया था। लेकिन जब वह अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी चुनने गई थी तो आखिर मौत को गले क्यों लगा लिया? वे हैरान थीं कि गुलशन के इस फैसले का परवीन या संजना, दोनों में किसी एक ने भी विरोध क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि अब वे अपनी बेटी का अंतिम संस्कार अपने धार्मिक रीति-रिवाज से करना चाहती हैं जिससे उसकी आत्मा को शांति मिल सके।

खरगोश को भी नहीं छोड़ा

वासुदेव परिवार के एक करीबी का कहना है कि वे अपने खरगोश को बहुत प्यार करते थे। सुबह-शाम उसे खुद अपने हाथ से चारा खिलाते थे। कोई बच्चा भी खरगोश को तंग करे तो वे उसे डांट दिया करते थे। लेकिन अपने जीवन के अंतिम क्षण में वे उसे भी खत्म कर गये। शायद वे नहीं चाहते थे कि उनके जाने के बाद उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति को कोई तकलीफ पहुंचे। यही कारण है कि उन्होंने अपने बच्चों के साथ-साथ खरगोश तक को जिंदा नहीं छोड़ा। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X