खिचड़ी बन जाने के कारण बड़ा फोड़ा होता जा रहा है जेएनयू का मामला, एचआरडी मंत्रालय भी परेशान

शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Jan 2020 10:57 PM IST
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जेएनयू के बाहर पुलिस
जेएनयू के बाहर पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रदर्शन बड़ा फोड़ा बनता जा रहा है। एचआरडी मंत्रालय के एक अफसर का मानना है कि अब इसमें तेजी से मवाद बनने लगा है। सूत्र का कहना है कि केवल एचआरडी तक की बात हो तो जेएनयू में दो दिन में शांतिपूर्ण स्थिति आ जाए। परेशानी यह है कि अब इस मामले का रायता अधिक फैल जाने के कारण खिचड़ी बन गया है।

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जेएनयू मामले के समाधान को लेकर नलिन कोहली का कहना है कि इसका समाधान दोनों तरफ से होना चाहिए। कहने का अर्थ साफ है कि कुछ छात्र समाधान के लिए नरमी बरतकर, छात्र बनकर आगे आएं और कुछ सरकार, विश्वद्यिालय प्रशासन। 
एचआरडी मंत्री चेन्नई में
एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक फिलहाल चेन्नई के दौरे पर हैं। मंत्रालय के सचिव के कंधे पर ही पूरा भार है। सूत्र बताते हैं कि कुलपति एम जगदीश कुमार का विश्वविद्यालय में विरोध बढ़ जाने के कारण वह (कुलपति) छात्रों की नाराजगी दूर करके विश्वविद्यालय को सामान्य आवस्था में लाने में असफल साबित हो रहे हैं। छात्र पुलिस की कार्रवाई और प्रशासन के दबाव के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। छात्रों के इस विरोध को राजनीतिक दलों और अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों, संगठनों, शिक्षकों का समर्थन मिलने के बाद यह काफी पेचीदा हो गया है। फिलहाल इस मामले पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय भी बारीक नजर रख रहा है।
  
क्या है मामले की खिचड़ी
छात्र जेएनयू में फीस वृद्धि को लेकर अक्टूबर महीने से विरोध कर रहे हैं। इसको लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों और छात्रों के प्रतिनिधि के बीच में बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन अभी तक कोई कारगर उपाय नहीं निकल सका है। विश्वविद्यालय के छात्रों का कहना है कि कुलपति का सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से रिश्ता है। उनके ऊपर पीएमओ का आशीर्वाद है। इसलिए स्थिति पेचीदा हो रही है।

विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष आईशी घोष का कहना है कि विश्वविद्यालय काफी समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निशाने पर है। इसलिए केन्द्र सरकार लगातार जेएनयू को टारगेट कर रही है। इसके लिए पर्दे की आड़ में भाजपा, संघ, छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा है। छात्र आशीष का कहना है कि दिल्ली नहीं आप देश के कई हिस्से में घूम आइए, टुकड़े-टुकड़े गैंग शब्द भाजपा के नेताओं, कार्यकर्ताओं के मुंह से निकलेगा। कुछ दिन पहले गृहमंत्री ने भी कहा है। आईशी का कहना है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग का भाजपा का तंज जेएनयू को लेकर निकला है। आखिर कौन है टुकड़े-टुकड़े गैंग? सरकार को क्या इस तरह से टारगेट करना चाहिए? 

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