कीर्ति आजाद के रास्ते में कांटे ही कांटे, बगावत के मूड में हैं कांग्रेस के नेता

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 16 Oct 2019 08:25 PM IST
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पुराने क्रिकेटर, भाजपाई और अब कांग्रेसी बने कीर्ति आजाद की राह में कांटे ही कांटे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस बनाना चाहती हैं, लेकिन ये बात दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन समेत अन्य के गले के नीचे जरा कम उतर रही है। खबर है कि कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली के नेताओं से मिल चुके हैं, लेकिन उनके पास फिलहाल अभी सामाधान नहीं है।

बाहरी हैं कीर्ति आजाद

कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि कीर्ति आजाद एक बार दिल्ली से भले विधायक रह चुके हैं, लेकिन उन्हें अध्यक्ष बनाने से कुछ हासिल नहीं होगा। दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको खुद बड़े असमंजस की स्थिति में हैं। शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित ने पीसी चाको पर अपनी मां को मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस बाबत चिट्ठी भी लिखी है। संदीप दीक्षित पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस के सांसद रहे हैं और राजनीति में महत्वाकांक्षा रखते हैं। 2014 से वह राजनीति में सफलता पाने से वंचित हैं।

कांग्रेस कल्चर की समझ नहीं

वहीं कीर्ति आजाद को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना न तो अजय माकन को अच्छा न लग रहा है और न ही शीला दीक्षित के खेमे को। सूत्र बताते हैं अरविंदर सिंह लवली समेत अन्य भी इसे ठीक नहीं मान रहे हैं। वहीं कांग्रेस के एक वर्ग ने कीर्ति आजाद को अध्यक्ष बनाने के फैसले के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान भी चलाया है। कांग्रेस के नेताओं का तर्क है कि कीर्ति आजाद बाहरी हैं। साथ ही, उन्हें कांग्रेस की रीति, नीति की ढंग से जानकारी नहीं है और न ही वे कांग्रेस के कल्चर को समझते हैं। कीर्ति को खारिज करने के पीछे कांग्रेस नेताओं का एक तर्क यह भी है कि वह लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में आए हैं। इसलिए अध्यक्ष पद परोस देने से पार्टी के पुराने नेता की उपेक्षा जैसा गलत संदेश जाएगा।

ठिठक गया है कांग्रेस नेतृत्व

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कीर्ति आजाद को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का मन बना लिया था। घोषणा ही शेष थी और अचानक एक बड़े कांग्रेस नेता की सलाह पर रुक गई। बताते हैं इसी नेता ने हरियाणा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तय करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। अब घोषणा से पहले कांग्रेस अध्यक्ष फिर से गहराई से होमवर्क कर लेना चाहती हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस होमवर्क में अपना योगदान देना शुरू कर दिया है।
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गौरतलब है कि 20 जुलाई से दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद खाली है। तीन महीने से नए अध्यक्ष के चयन की कवायद चल रही है। तीन महीने बाद ही दिल्ली विधानसभा चुनाव भी होने के आसार हैं। जून-जुलाई 2019 में कांग्रेस जहां दिल्ली की राजनीतिक लड़ाई में मजबूती के साथ खड़ी हो रही थी, वहीं अक्टूबर 2019 आते-आते संगठनात्मक काम के रुकने के कारण एक बार फिर गिनती से बाहर होती नजर आ रही है।

हरियाणा जैसा न हो जाए हाल

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के एक पदाधिकारी का कहना है कि अध्यक्ष पद पर सही व्यक्ति का होना आवश्यक है। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस हाई कमान ने अपने नेताओं को ढंग से न टटोला तो दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का हाल हरियाणा प्रदेश कांग्रेस जैसा हो सकता है। सूत्र का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व की ढिलाई, निर्णय लेने में देरी तथा पैराशूट से उतरे नेताओं पर भरोसा कर लेने के कारण ही पार्टी अजीब मोड़ पर खड़ी है। दक्षिणी दिल्ली के एक नेता का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में उनका पूरा जीवन गुजर गया। यह उनके लिए बड़ी अजीब स्थिति है कि वह कांग्रेस पार्टी में ऐसा दौर देख रहे हैं।
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