भारत-चीन विवाद: लद्दाख और दोकलम गतिरोध के पीछे इस सैन्य कमांडर का हाथ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 21 Jun 2020 09:26 AM IST
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भारत-चीन विवाद
भारत-चीन विवाद - फोटो : PTI

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करीब दो साल पहले दोकलम में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ क्योंकि भारतीय जवानों ने चीन को वहां एक सड़क बनाने से रोका था। इससे चीनी सेना दक्षिण दोकलम में वाहनों को जम्फेरी रिज की ओर ले जाती रही जो सिलीगुड़ी गलियारे के पास है। चूमार की तरह दोकलम गतिरोध की शुरुआत स्थानीय कमांडरों ने की थी और बात वरिष्ठ सैन्य कमांडरों तक पहुंची थी।
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यह विवाद उस समय 73 दिनों बाद खत्म हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने उठाया। दोनों नेता इस बात पर राजी हुए कि दोनों देश टकराव नहीं चाहते हैं। इसके बाद दोनों सेनाएं पीछे हटीं। अब लद्दाख में दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं। इन दोनों ही गतिरोध में एक बात जो समान है वो है जनरल झाओ जोंग्की, जो इस समय वेस्टर्न थिएटर कमांड के उच्च अधिकारी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि हमारी समझ बताती है कि लद्दाख में हुए गतिरोध की शुरुआत ऊपर से हुई है। 15 जून को हुई घटना से पहले दो सैन्य जिलों में पहले भी हिंसक झड़प हो चुकी थी। पहली झड़प 5-6 मई को हुई थी जब भारतीय और चीनी सैनिक पेंगोंग त्सो के उत्तर में पेट्रोलिंग कर रहे थे। उस समय दोनों सेनाओं के जवान घायल हुए थे और इसमें 250 सैनिक शामिल थे।
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इसके कुछ दिनों बाद नौ मई को फिर भारतीय और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों के बीच सिक्किम के लाकु ला क्षेत्र में तीखी बहस हुई जो हिंसा में भी बदली। इस घटना में 150 जवान शामिल थे। चार भारतीयों और सात चीनी सैनिक इसमें घायल हुए। तीसरी हिंसक झड़प 15 जून को हुई। इसमें 45 साल में पहली बार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हमारे जवान शहीद हुए।

एक अधिकारी मे कहा कि ऐसा पीएलए के सैनिकों ने एक उच्च कमांडर के नेतृत्व में किया। जिसने तिब्बत और शिनजियांग सैन्य जिलों में एक जैसी रणनीति को अपनाया। उन्होंने मई में लद्दाख और सिक्किम में हुई घटना का हवाला दिया। दोनों ही सैन्य जिलों की रिपोर्टिंग जनरल झाओ को होती है। माना जाता है कि वे एलएसी पर कार्रवाई का निर्देश देते हैं। 

हालांकि अधिकारियों ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि जनरल झाओ अपने आप इस तरह के कदम उठा रहे होंगे। एक राजनयिक ने कहा कि चीनी सेना गतिरोध को बढ़ाने वाले कदम क्यों उठाती रही जबकि दोनों देशों के विदेश मंत्री बातचीत के बाद इस नतीजे पर पहुंचे थे कि छह जून को सेना अधिकारियों के बीच हुई चर्चा को लागू किया जाए और दोनों सेनाएं पीछे हटेंगी। इसके बावजूद 15 जून को खूनी संघर्ष क्यों हुआ।
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