भारत ने रिहा किए थे पाकिस्तान के 93 हजार युद्धबंदी, हमारे 54 सैनिक अब भी उनकी जेल में बंद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Dec 2019 06:12 PM IST
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1971 युद्ध
1971 युद्ध - फोटो : अमर उजाला

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भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में ले लिया था। जिसके करीब 60 घंटे बाद उनकी रिहाई की गई। अभिनंदन की रिहाई के बाद से ही उन भारतीय सैनिकों की रिहाई का मुद्दा भी उठने लगा जो 1971 से पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। भारत की ओर से कई सबूत पेश किए गए लेकिन बावजूद इसके ये लोग आज भी जेल में बंद हैं। पाकिस्तान इन सैनिकों के अस्तित्व से इनकार करता रहा है। 
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45 साल पहले, पाकिस्तानी सेना के 93,000 सदस्यों ने सफेद झंडे उठाए और 1971 के भारत-पाक युद्ध का अंत करते हुए भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।यह संघर्ष बांग्लादेश की आजादी के युद्ध का परिणाम था, जब बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) पाकिस्तान (पश्चिम) से आजादी की लड़ाई लड़ रहा था।


ऐसा माना जाता है कि 54 भारतीय सैनिक पाकिस्तान की जेलों में कैद हैं। इन सैनिकों को 'मिसिंग 54' कहा जाता है। भारत की ओर से अथक प्रयासों के बावजूद भी ये भारतीय सैनिक वापस नहीं लौटे। जब शुक्रवार को अभिनंदन की रिहाई हुई तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 1971 के युद्धबंदियों को रिहा करने की मांग की।

भारत को मिली थी जीत

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध में पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा और पूर्वी पाकिस्तान ने आजाद होकर बांग्लादेश का रूप ले लिया। इस युद्ध की जीत के बाद भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया। उनकी इच्छा शक्ति और सेना के पराक्रम के कारण ही बांग्लादेश की आजादी संभव हो पाई। लेकिन ये भारतीय सैनिक जिन्हें पाकिस्तान ने जेलों में डाल दिया था, गुमनाम हो गए। 

इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के 90 से 93 हजार सैनिकों और नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इनमें पाकिस्तानी सैनिकों की संख्या 81 हजार और नागरिकों की संख्या 12 हजार थी। युद्ध खत्म होने के करीब 8 महीने बाद अगस्त 1972 में शिमला समझौता हुआ। जिसके तहत पाकिस्तानी प्रिजनर्स ऑफ वॉर (पीओडब्लू) यानि युद्धबंदियों को रिहा किया गया।
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