पाकिस्तानी सीमा में बने लॉन्चिंग पैड्स पर आतंकियों में हो रही है मारपीट, खौफ में है आईएसआई!

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Jul 2020 07:35 PM IST
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सार

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में जम्मू-कश्मीर डेस्क का कामकाज देख रहे एक अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में दर्जनभर लॉन्चिंग पैड पर चार सौ से अधिक प्रशिक्षित आतंकवादी घुसपैठ का इंतजार कर रहे हैं...

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में छिपे आतंकियों के ठिकानों पर भारतीय सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से पाकिस्तान बौखला गया है। घुसपैठ का मौका न मिलने की वजह से पाकिस्तानी सीमा के भीतर बने लॉन्चिंग पैड पर आतंकियों का जमावड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।
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केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में जम्मू-कश्मीर डेस्क का कामकाज देख रहे एक अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में दर्जनभर लॉन्चिंग पैड पर चार सौ से अधिक प्रशिक्षित आतंकवादी घुसपैठ का इंतजार कर रहे हैं।
अगर पिछले तीन-चार महीनों की बात करें, तो सीमा पार से आने वाले आतंकियों की संख्या बहुत कम है। गत सप्ताह पीओके स्थित तीन लॉन्चिंग पैड और खैबर पख्तूनख्वा के एक पैड पर आतंकियों के साथ जमकर मार-पिटाई हुई है।
यहां पर करीब 300 आतंकी ऐसे हैं, जो पांच महीने पहले आए थे, लेकिन उन्हें अभी तक घुसपैठ का मौका नहीं मिल सका।

आईएसआई और विभिन्न आतंकी तंजीमों के बीच इस मसले पर आपसी तकरार होने की बात भी सामने आ रही है।
 
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की संख्या सबसे ज्यादा है। ये कहा जा सकता है कि सभी लॉन्चिंग पैड पर मौजूद आतंकियों का हिसाब लगाएं, तो उनमें से आधे आतंकी लश्कर के हैं।

इसके बाद जैश-ए-मोहम्मद का नंबर आता है। इस संगठन ने करीब 140 आतंकियों को तैयार किया है। हिजबुल मुजाहिद्दीन और नई तंजीमों के आतंकियों की संख्या अभी कम है।

इन दोनों संगठनों को मिलाने के बाद आतंकियों की संख्या डेढ़ सौ को पार कर जाती है। आतंकियों के सर्वाधिक ट्रेनिंग कैंप पाक अधिकृत कश्मीर में बताए गए हैं। तकरीबन सभी तंजीमों के कैंप यहां मौजूद हैं।

इसके बाद पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा का नंबर आता है। आतंकियों की घुसपैठ पीओके में बने लॉन्चिंग पैड से कराई जाती है।

आतंकियों को नहीं मिल रहा घुसपैठ का मौका

पिछले दिनों कश्मीर में सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने कहा था कि पीओके में डेढ़ दर्जन कैंप आतंकियों से भरे पड़े हैं। उन्हें घुसपैठ का अवसर नहीं मिल रहा है। पिछली सर्दियों में भी घुसपैठ का कोई बड़ा मौका नहीं मिला।

अब वे बरसात के दौरान या दिसंबर-जनवरी में घुसपैठ की दोबारा कोशिश करेंगे। घाटी में आतंकवाद की कमर टूटने लगी है। घाटी में मौजूद आतंकी संगठनों को लोकल स्पोर्ट नहीं मिल पा रहा है।

दूसरी ओर केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी भी यही मानते हैं कि घाटी में आतंकवाद अब लंबा नहीं चलेगा।

आईएसआई का धैर्य जवाब दे गया

पाकिस्तान में बने लॉन्चिंग पैड्स पर जैसे-जैसे आतंकियों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे ही आईएसआई का धैर्य भी जवाब देता जा रहा है। बीते दिनों लॉन्चिंग पैड पर जो मारपीट की घटना हुई है, उससे एक बड़ा संदेश मिल रहा है।

पहला, आतंकियों को लंबे समय तक खाली बैठाकर खिलाने की गुंजाइश पाकिस्तान की नहीं है। दूसरा, पाकिस्तानी आईएसआई को सदैव यह डर लगा रहता है कि भारत की ओर से लॉन्चिंग पैड पर कोई सर्जिकल स्ट्राइक न हो जाए।

आतंकियों का रोजाना का खर्च भी बढ़ता जा रहा है। खाने-पीने से लेकर पीओके और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकियों को बुरी तरह मारा गया। कई दिनों तक उन्हें खाना नहीं मिला।

इस मसले पर आईएसआई और आतंकी संगठनों के बीच तकरार की बात सामने आ रही है। किस तंजीम के आतंकियों को कब और कौन सी जगह से घुसपैठ करानी है, इसे लेकर भी आतंकी संगठनों व आईएसआई में मतभेद उभर रहे हैं।

बीते दिनों आतंकियों के लक्ष्य और मकसद को लेकर आईएसआई व तंजीमों के प्रमुख लोगों के बीच दो बैठक हो चुकी हैं। इस वक्त पीओके में सबसे ज्यादा बुरी स्थिति है। वजह, यहां पर विभिन्न तंजीमों के आतंकी एक साथ ट्रेनिंग लेते हैं।

करीब दर्जनभर कैंप अकेले पीओके में हैं। बाकी के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में चल रहे हैं।
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