अमर उजाला की बैठक में नामवर सिंह और विश्वनाथ त्रिपाठी बोले, विश्वविद्यालयों के हाल पर आता है रोना

ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 18 Oct 2017 01:47 AM IST
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नामवर सिंह और विश्वनाथ त्रिपाठी
नामवर सिंह और विश्वनाथ त्रिपाठी - फोटो : FILE PHOTO

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जाने-माने आलोचक नामवर सिंह का कहना है कि सफाई और सफाये में फर्क होता है। सफाई अच्छी बात है, लेकिन उससे किसका सफाया हो रहा है, उस पर सोचना चाहिए। वहीं, सुप्रसिद्ध साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी कहते हैं कि सड़क का मैल साफ करना अच्छी बात है, मन का मैल बढ़ता रहे, उसे कौन साफ करेगा?
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हिन्दी साहित्य के दोनों दिग्गज ‘अमर उजाला’ की साहित्यिक पहल ‘बैठक’ में सवालों के जवाब दे रहे थे। उनसे सवाल था, देश में चल रहे स्वच्छता अभियान पर। बात शुरू हुई थी, नामवर के उस बयान से, जिसमें उन्होंने कहा था, मैं साहित्य का सफाई कर्मी हूं। उनका कहना था, सफाई अभियान अच्छा है, लेकिन सफाई और सफाये के बुनियादी मायने समझने होंगे। बैठक में दोनों दिग्गजों ने अपने रचनाकर्म, जीवन, शिक्षा, आरोप, विवाद और सियासत पर खुलकर बात की। 
नामवर सिंह ने कहा, आज के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की खबरें पढ़कर रोना आता है। कभी सोचा भी नहीं था कि हमारा विश्वविद्यालय ऐसा हो जाएगा। नामवर सिंह एवं विश्वनाथ त्रिपाठी, दोनों बीएचयू के छात्र रहे हैं। नामवर ने कहा, एक दौर में वहां किसी छात्रा से दुर्व्यवहार की बात कोई सोच भी नहीं सकता था, लेकिन जो खबरें अब आ रही हैं, उनसे दिल दुखता है। त्रिपाठी ने कहा, विश्वविद्यालयों की अध्यापकों की नियुक्ति में अपारदर्शिता ने भी हालात बिगाड़े हैं।
पुरस्कार वापसी पर नामवर ने कहा कि साहित्य अकादमी देश की इकलौती गैर-सरकारी और स्वायत्त संस्था है। प्रतिरोध के लिए उसके पुरस्कारों की वापसी का कोई औचित्य ही नहीं बनता था। वहीं, त्रिपाठी ने इसे विरोध का सही तरीका बताया। कहा, जिन लोगों ने सम्मान वापस किए, उनका सम्मान करना चाहिए। जो लोग चाहकर भी नहीं कर पाए, लेकिन इस माहौल केखिलाफ रहे उनका भी सम्मान करना चाहिए।

साहित्य और सियासत
साहित्य में राजनीतिक दखलंदाजी पर नामवर बोले, राजनीति करना अलग है और समझना अलग। मैं राजनीति समझता हूं। उन्होंने साफ किया, लोग कुछ भी कहें, मैं हमेशा एकनिष्ठ रहा हूं। अलबत्ता विभिन्न स्तरों पर रिश्ते भी निभाता हूं। वामपंथ ने गरीब, दलित, किसान के मुद्दों पर यानी सीधे लोक से राजनीति शुरू की थी, लेकिन वे हिन्दुस्तान के जनमानस को नहीं समझ पाए, तो मुंह की खाई। उन्होंने कहा, देश में लोक व शास्त्र, दो ही प्रमाण हैं। वही, राजनीतिक दल कामयाब हो सकता है, जो सही मायनों में आम लोगों से जुड़ेगा।

रामविलास बड़े आलोचक
नामवर ने कहा, डॉ. रामविलास शर्मा निस्संदेह मुझसे बड़े समालोचक थे। उन्होंने जितना लिखा है, उससे आधा भी मैंने नहीं लिखा। त्रिपाठी ने कहा, पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी और डॉ. रामविलास शर्मा के बाद ही आलोचक के तौर पर नामवर का नाम आता है।

कविताएं लिखनी क्यों बंद कर दीं?
नामवर बोले, कविता लिखने और प्रेम करने की उम्र होती है, वह पार कर ली, तो कविता लेखन बंद कर दिया। क्या प्यार भी किया है, इस सवाल पर उनका जवाब था-इस पर बयान जारी करवाओगे क्या? वहीं, त्रिपाठी ने कहा, सबसे बड़ा प्रेम दाम्पत्य होता है। प्रेम करने और समझने की असली उम्र बुढ़ापा होती है।
 
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