गुलाम नबी, चिदंबरम या खड़गे में से किन्हीं दो को मिल सकती है नंबर दो की हैसियत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 24 Aug 2020 05:16 AM IST
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Ghulam nabi azad, P chidambaram, Kharge
Ghulam nabi azad, P chidambaram, Kharge - फोटो : पीटीआई

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सार

  • कांग्रेस कार्यसमिति की अहम बैठक आज
  • राहुल गांधी की कार्यशैली है लेटर बम का कारण
  • बिना विमर्श के विभिन्न मुद्दों पर बयान से असहज हैं वरिष्ठ नेता

विस्तार

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले 23 वरिष्ठ नेताओं द्वारा फोड़े गए लेटर बम की मुख्य वजह पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को खत लिखने वाले नेता न सिर्फ राहुल की कार्यशैली से असहज हैं, बल्कि उनकी कार्यशैली को पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला भी मान रहे हैं। असंतुष्ट नेताओं ने दो हफ्ते पहले यह पत्र सोनिया गांधी को भेजा था लेकिन पार्टी ऐसे किसी पत्र के होने से बार-बार इनकार करती रही है।
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दरअसल, यह बात उस घटना से बिगड़ी, जब राहुल ने राजस्थान विवाद में प्रक्रियाओं का पालन किए बिना सचिन पायलट की वापसी की राह तैयार की। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल इस विवाद को ठंडा करने के लिए पार्टी में दो उपाध्यक्षों की नियुक्ति की जा सकती है।
निकट भविष्य में गुलाम नबी आजाद, पी. चिदंबरम और मल्लिकार्जुन खरगे में से दो को पार्टी में नंबर दो की हैसियत दी सकती है। हालांकि इस फार्मूले से विवाद का हल निकालना मुश्किल दिख रहा है क्योंकि पार्टी में राहुल खेमा जहां जवाबी हमला बोलने को तैयार है, वहीं राहुल विरोधी खेमा भी अपने कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं है।
पायलट प्रकरण बना बड़ी वजह
सूत्रों का कहना है कि राजस्थान के सियासी संकट मामले में जिस प्रकार राहुल ने हस्तक्षेप किया, उससे उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ी है। पायलट की घर वापसी के लिए राहुल ने तय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। राज्य के प्रभारी महासचिव सहित अन्य पक्षों से बिना विचार विमर्श किए उनकी वापसी की राह बनाई। इससे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी खफा हुए।

मुद्दों से भी परेशानी
कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि भाजपा के खिलाफ बोलने, मुद्दों का चुनाव करते समय राहुल उनसे विचार विमर्श नहीं करते हैं। मसलन आर्थिक या विदेश नीति पर बोलते समय पार्टी में इससे जुड़े अनुभव और विशेषज्ञता वाले नेताओं से बात नहीं करते। भाजपा के खिलाफ मुद्दों के चयन में भी यही स्थिति है। इससे आखिर पार्टी को नुकसान हो रहा है। मसलन चीन से जारी सीमा विवाद मामले में पूरे विपक्ष के इतर राहुल गांधी एकतरफा मोर्चा खोले हुए हैं।

राहुल खेमा भी पलटवार को तैयार
जिन 23 नेताओं ने पत्र लिखकर पार्टी में आमूलचूल बदलाव की मांग रखी है, उन्होंने कहीं भी अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की आलोचना नहीं की है। युवाओं का मोदी के प्रति आकर्षण बढ़ने की बात कर राहुल पर परोक्ष निशाना साधा गया है। सूत्रों का कहना है कि अब बारी राहुल समर्थक नेताओं की है। राहुल समर्थक नेता पिछले दिनों पार्टी सांसदों की वर्चुअल बैठक में यूपीए-दो सरकार को लोकसभा चुनाव में मिली हार के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। पार्टी का धड़ा राहुल को समर्थन नहीं करने का भी आरोप लगा चुका है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को होने वाली कार्यसमिति की बैठक में इस खेमे के नेता राहुल के समर्थन में मोर्चा खोल सकते हैं।

पत्र में पार्टी की लचर कार्यप्रणाली, कमजोर संगठन, फैसलों में देरी का जिक्र्र
पत्र लिखने वाले नेताओं ने पार्टी की लचर कार्यप्रणाली, कमजोर संगठन, फैसलों में देरी के चलते कार्यकर्ताओं में निराशा और जनता से दूरी बनने की बात कही है। उन्होंने भविष्य में पार्टी में अहम फैसलों के लिए एक प्रभावी सामूहिक प्रणाली स्थापित किए जाने की मांग की है।

पत्र कहा गया है कि मौजूदा माहौल से कार्यकर्ताओं में हताशा और पार्टी कमजोर हुई है। पार्टी का जमीनी और युवाओं से जुड़ाव खत्म हो रहा है। पार्टी की मजबूती और राज्यों में मजबूत संगठन खड़ा करने के लिए कार्यसमिति के सदस्यों का चुनाव कराने और नए सिरे से नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही गई है।

साथ ही सवाल उठाया है कि आखिर कार्यसमिति अपनी भूमिका सही ढंग से क्यों नहीं निभा पा रही है। मुसीबत के समय कार्यसमिति पार्टी को सही मार्गदर्शन देने में भी असमर्थ रही है।

पत्र पर गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, शशि थरूर, मनीष तिवारी के दस्तखत
कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे पत्र में दस्तखत करने वालों में राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों में आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मनीष तिवारी, मुकुल वासनिक, मिलिंद देवड़ा शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों में भूपिंदर सिंह हुड्डा, एम. वीरप्पा मोइली, पृथ्वीराज चव्हाण, राजेंद्र कौर भट्टल, पीजे कुरियन शामिल हैं।

इसके अलावा जितिन प्रसाद, सांसद विवेक तन्खा, अजय सिंह, रेणुका चौधरी, के साथ पूर्व प्रदेश अध्यक्षों में राजबब्बर, अरविंदर सिंह लवली, दिल्ली के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष योगानंद शास्त्री, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित, अखिलेश प्रसाद सिंह और कुलदीप शर्मा के हस्ताक्षर हैं।

 
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