क्या जीवन की सबसे कठिन राजनीतिक लड़ाई में फंस गए हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत?

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Fri, 31 Jul 2020 07:47 AM IST
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : फाइल

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सार

  • राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की चुप्पी बढ़ा रही है क्लाइमेक्स
  • विज्ञान, अर्थशास्त्र, कानून की डिग्री वाले गहलोत की राजनीति में बड़ी अग्नि परीक्षा

विस्तार

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विज्ञान में स्नातक, अर्थशास्त्र में परास्नातक और कानून के छात्र रहे हैं। 69 वर्षीय गहलोत कहीं जगन्नाथ पहाड़िया तो कहीं मोहन लाल सुखाड़िया जैसे दिग्गज कांग्रेस के नेताओं से सीख लेने के बाद भाजपा के संस्थापक नेताओं में रहे भैरोंसिंह शेखावत की तरह राजनीति के घाघ के माने जाते हैं। 
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लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी के हर गुट पैठ और भाजपा नेता वसुंधरा राजे से संतुलित रिश्ता रखने वाले गहलोत की कूटनीति की अग्नि परीक्षा शुरू हो गई है। गहलोत अब विधानसभा में विश्वासमत पाकर भाजपा और विरोधियों का मुंह बंद कर देने वाली 14 अगस्त वाली पारी खेल रहे हैं।
सचिन पायलट की खामोशी बढ़ा रही है क्लाइमैक्स
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम में शुमार रहने वाले बागी नेता सचिन पायलट ने गहलोत की मुश्किल बढ़ा दी है। सचिन पायलट कांग्रेस में ही हैं। उनके साथ कांग्रेस पार्टी के 18 विधायक स्पष्ट तौर पर हैं। खामोश रहकर, खुद को कांग्रेसी बताकर सचिन पायलट कम से कम 30 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं।

पायलट ने खम ठोककर अशोक गहलोत की सरकार को अल्पमत में बताया है। विधायकों की सदस्यता बचाने के लिए कानूनी से लेकर राजनीतिक दांव चल रहे हैं, लेकिन पार्टी के व्हिप का उल्लंघन भी कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट की गतिविधियों को पार्टी विरोधी मानते हुए बागी करार देते हैं, लेकिन पार्टी में लौट आने, भाजपा के खिलाफ विचारधारा की लड़ाई लड़ने का अभी भी आमंत्रण दे रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी के अशोक गहलोत के अलावा दूसरे धड़े के भी तमाम नेताओं का मानना है कि सचिन पायलट अपने मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के इशारे पर भाजपा की गोद में खेल रहे हैं। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव कहती हैं कि उनमें पोटेंशियल है, लेकिन यदि भाजपा के षड्यंत्र में राजस्थान की सरकार गिर गई तो लोकतंत्र के लिए बहुत खराब दिन होगा। कुल मिलाकर सचिन पायलट की चुप्पी क्लाइमैक्स बढ़ा रही है।
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हर रोज गहलोत को देना पड़ रहा है बयान

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