1.65 लाख मुस्लिम लोगों के बीच कारगिल में रहता है यह हिंदू परिवार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कारगिल Updated Mon, 01 Oct 2018 12:39 PM IST
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कारगिल में रहने वाला अकेला हिंदू परिवार
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कारगिल युद्ध को 20 साल हो चुके हैं। इसके बावजूद इस जगह पर एक हिंदू और एक सिख-मुस्लिम परिवार विश्वास कायम किए हुए है। 1999 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस क्षेत्र की शांति भंग हो गई थी। रविंद्र नाथ और उनकी पत्नी मधु अपनी होलसेल दुकान पर बैठकर सीमा के पास स्थित इलाके में मुस्लिम खरीदारों को सामान बेचते हैं। यह स्थान लाइन ऑफ कंट्रोल से महज 200 मीटर की दूरी पर है। पिछले दो दशकों के दौरान यह परिवार अकेला हिंदू है जो 1.65 लाख की आबादी के बीच अकेले रहते हैं।
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रविंद्र बताते हैं, 'हम 45 साल से यहां रह रहे हैं। कई हिंदू परिवार यहां से बड़े शहरों की ओर जा चुके हैं लेकिन हमने महसूस किया कि यहां के लोग हमें हमारे पंजाबी दोस्तों के मुकाबले ज्यादा प्यार करते हैं। हमारा ख्याल रख रहे हैं। यहां ऐसा कोई दिन नहीं बीता जब हमें अकेला महसूस हुआ हो। मधु कहती हैं, 'जब हम एलओसी में सुरक्षित रह सकते हैं तो बाकी देश क्यों नहीं रह सकता?' कारगिल युद्ध के दौरान यहां काफी तनाव पैदा हो गया था लेकिन फिर भी अलग-अलग धर्मों- हिंदू, मुस्लिम, सिख और बौद्ध के लोगों के बीच आज भी सौहार्द कायम हैं।
रविंद्र से कुछ ही दूरी पर तीन सिख परिवार रहते हैं जिन्होंने एक गुरुद्वारा बनाया हुआ है। उनके गुरुद्वारे की दीवार से हनफिया अहले-ए-सुन्नत मस्जिद सटी हुई है। जिसे कि सुन्नी मुसलमान चलाते हैं। दोनों पूजा स्थलों के बीच इस बॉन्ड ने जसविंदर सिंह (अब जुनैद) और खतीजा बानो के बीच 1996 में प्यार को जन्म दिया। जुनैद ने बताया, 'खतीजा गुरुद्वारे में पानी भरने के लिए आया करती थी। मैं उसे देखता रह गया। मैं उसे प्रेमपत्र लिखने लगा और हम दोनों को प्यार हो गया। मेरे पास अपनी शादी को संभव करने के लिए दो विकल्प थे। या तो मैं इस्लाम अपना लूं या फिर वो सिख बन जाए। इसके बाद मैंने जुनैद अख्तर बनने का फैसला किया।'
जुनैद ने आगे कहा, 'आज मैं अपनी मां और भाईयों के साथ बैसाखी मनाता हूं और अपने बच्चों- मंसूर, शोएब और तनाज फातिमा के साथ ईद। मैं एक परिवार के लिए जसविंदर तो दूसरे के लिए जुनैद हूं।' वहीं खातिजा ने बताया, 'मैं जुनैद से ज्यादा गुरुद्वारे जाती हूं और मैंने गुरुवाणी  भी सिख ली है। हम बहुत उदार माता-पिता हैं। हमने अपने बच्चों से कहा है कि वह किसी भी धर्म से अपना जीवनसाथी चुन सकते हैं। हालांकि युवा हिंदू-मुस्लिम लड़के लड़कियों द्वारा इन दोनों धर्मों के बीच खड़ी दीवार को तोड़ने पर होने वाले हमले हमें डराते हैं।' यह जोड़ा जम्मू-कश्मीर के शिक्षा विभाग में कार्यरत है और खुशी से अपनी लव केमिस्ट्री के बारे में बताता है।
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